द ‘उड़ता’ केरल स्टोरी
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द ‘उड़ता’ केरल स्टोरी

केरल ‘लव जिहाद’ ही नहीं, ‘नार्को जिहाद’ का भी बड़ा अड्डा है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने हाल ही में मादक पदार्थों की बड़ी खेप केरल में पकड़ी है, जिसका मूल्य 22,000 करोड़ रुपये है। इसमें 2500 किलो मेथामफेटामाइन भी शामिल है

Written byउमेश कुमार अग्रवालउमेश कुमार अग्रवाल
May 24, 2023, 01:02 pm IST
in भारत, विश्लेषण, केरल
केरल में मेथामफेटामाइन की 134 बोरियों के साथ एक पाकिस्तानी भी गिरफ्तार हुआ है

केरल में मेथामफेटामाइन की 134 बोरियों के साथ एक पाकिस्तानी भी गिरफ्तार हुआ है

केरल में इतनी बड़ी मात्रा में मादक पदार्थों की बरामदगी लगभग 15 वर्ष पहले चर्च द्वारा किए गए इस दावे की पुष्टि करती प्रतीत होती है कि आईएसआईएस इस तटीय राज्य में युवा लड़कियों को बेहोश करने, उनका ब्रेनवॉश करने, उनके साथ छेड़छाड़ और उनका कन्वर्जन करने के लिए ‘नार्को जिहाद’ का इस्तेमाल कर रही है।

केरल के नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा हाल ही में 22,000 करोड़ रुपये (2.5 अरब डॉलर) मूल्य की मादक पदार्थों की बरामदगी की गई है, जो देश की ही नहीं, विश्व की अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी है। इनमें 2500 किलोग्राम क्रिस्टल मेथ या बहुत शुद्ध मेथामफेटामाइन शामिल है। मादक पदार्थों की यह खेप कोच्चि तट पर पकड़ी गई थी। इस बरामदगी के साथ गिरफ्तार किए गए लोगों में एक पाकिस्तानी नागरिक भी शामिल है।

केरल में इतनी बड़ी मात्रा में मादक पदार्थों की बरामदगी लगभग 15 वर्ष पहले चर्च द्वारा किए गए इस दावे की पुष्टि करती प्रतीत होती है कि आईएसआईएस इस तटीय राज्य में युवा लड़कियों को बेहोश करने, उनका ब्रेनवॉश करने, उनके साथ छेड़छाड़ और उनका कन्वर्जन करने के लिए ‘नार्को जिहाद’ का इस्तेमाल कर रही है। दो वर्ष पहले भी केरल के पाला के बिशप जोसेफ कल्लारंगट ने प्रार्थना के दौरान कहा था कि केरल में ईसाई लड़कियां बड़े पैमाने पर ‘लव और नार्कोकोटिक जिहाद’ का शिकार हो रही हैं।

जिहादी जहां हथियारों का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं, वहां वे दूसरे धर्म-मत की युवा पीढ़ी को नष्ट-भ्रष्ट करने के लिए इस तरह के तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। केरल भाजपा ने भी इसका पुरजोर समर्थन किया था, लेकिन अंत में अदालत के कहने पर राज्य सरकार ने इस बिशप के ही खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया था। दूसरी ओर, मादक पदार्थों की बरामदगी इस तथ्य को भी रेखांकित करती है कि हिंद महासागर, जो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग और रणनीतिक समुद्री क्षेत्र है, पाकिस्तान की आईएसआई उसका इस्तेमाल नार्को-आतंकवाद संचालन के लिए कर रही है।

हिंद महासागर क्षेत्र के रणनीतिक महत्व को देखते हुए भारत सरकार ने पश्चिमी तट के साथ समुद्री गतिविधियां तेज कर दी हैं। क्षेत्र में निगरानी को मजबूत किया गया है। इसके लिए मानव रहित हवाई वाहनों (यूएवी) के साथ कैमरों का उपयोग करते हुए निगरानी प्रणालियां तैनात कर दी गई हैं। क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने केलिए रडार प्रणाली भी लगाई गई हैं, ताकि यहां कानून का शासन कायम हो और समुद्री सीमाओं की अखंडता को बनाए रखा जा सके।

अंदमान द्वीप समूह की ही तरह लक्षद्वीप द्वीप समूह भी भारतीय समुद्री हितों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। लक्षद्वीप 36 द्वीपों का एक समूह है, जिसका कुल भू-क्षेत्र 32 वर्ग किलोमीटर है। इससे भारत को विशाल क्षेत्रीय जल तक पहुंच प्राप्त होती है, जो लगभग 20,000 वर्ग किलोमीटर तक फैला है। यहां भारत का लगभग 4,00,000 वर्ग किलोमीटर का एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) है।

इसके अलावा, भारत ने तटरक्षक बल, नौसेना, पुलिसबलों और सीमा गश्त सहित विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच घनिष्ठ समन्वय और सहयोग भी सुनिश्चित किया है। इन प्रयासों के बहुत अच्छे परिणाम भी मिले हैं। भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल पश्चिमी तट पर, जिसमें तटीय केरल और लक्षद्वीप शामिल हैं, मादक पदार्थों के तस्करों को नियमित रूप से पकड़ रहे हैं। पिछले वर्ष मई में लक्षद्वीप से 220 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई थी। राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) के अनुसार, इस हेरोइन का संबंध पाकिस्तान से था।

अफगानिस्तान, पाकिस्तान और म्यांमार दुनिया के सबसे बड़े अफीम उत्पादक देश हैं। लंबे समय से अवैध हथियारों और ड्रग्स के परिवहन के लिए हिंद महासागर क्षेत्र का उपयोग किया जाता रहा है। दक्षिण एशियाई सुरक्षा के लिए इन गतिविधियों का व्यापक भू-राजनीतिक प्रभाव पड़ा है, जिससे यह क्षेत्र आतंकवाद और चरमपंथी विचारधारा की धुरी बन गया है।

चीन लंबे समय से भारत को घेरने और अपना दबदबा बढ़ाने की रणनीति पर काम करता रहा है, जिसे ‘स्ट्रिंग आफ पर्ल्स’ कहा जाता है। बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका सहित हिंद महासागर में नौसैनिक अड्डों और बंदरगाहों का नेटवर्क तैयार करना भी इस योजना में शामिल है। चीन द्वारा चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) में 62 अरब डॉलर का बड़ा निवेश किए जाने से इन सभी देशों में पाकिस्तान इस चीनी परियोजना के मुख्य लाभार्थी के रूप में उभरा है। चीन की ‘स्ट्रिंग आॅफ पर्ल्स’ परियोजना की सफलता बहुत बड़े पैमाने पर केरल और लक्षद्वीप के तटों के साथ चलने वाली आवाजाही लायक नहरों पर निर्भर करती है। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन और उसके सहयोगियों के बीच संपर्क और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए ये समुद्री मार्ग आवश्यक हैं। इसलिए अगर चीन को इस क्षेत्र में अपने को लक्ष्य प्राप्त करना है, तो उसके लिए इन प्रमुख पारगमन जलमार्गों को नियंत्रित और सुरक्षित करना आवश्यक हो जाता है।

पूर्व में अंदमान द्वीप समूह की ही तरह लक्षद्वीप द्वीप समूह भी भारतीय समुद्री हितों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। लक्षद्वीप 36 द्वीपों का एक समूह है, जिसका कुल भू-क्षेत्र 32 वर्ग किलोमीटर है। इससे भारत को विशाल क्षेत्रीय जल तक पहुंच प्राप्त होती है, जो लगभग 20,000 वर्ग किलोमीटर तक फैला है। यहां भारत का लगभग 4,00,000 वर्ग किलोमीटर का एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) है।

ईईजेड किसी राष्ट्र को समुद्री संसाधनों का पता लगाने और उपयोग करने का विशेष अधिकार देता है, जिसमें पवन और जल ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए उपयोगी संसाधन भी शामिल हैं। अब चूंकि भारत और चीन, दोनों ही देश समुद्र में वर्चस्व और प्रभाव के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, इसलिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद महासागर क्षेत्र में उनके बीच तनाव बढ़ा हुआ है। दो एशियाई महाशक्तियां इस क्षेत्र में वर्चस्व के लिए होड़ कर रही हैं, जो उनकी प्रतिद्वंद्विता में एक टकराव का बिंदु बन गया है।

‘लव जिहाद’ के साथ-साथ ‘नार्को जिहाद’ का खतरा बहुत साफ है। ‘द केरल स्टोरी’ सिर्फ केरल तक सीमित नहीं रही है। पिछले वर्ष केरल के त्रिशूर से बाइक पर मिथीलीन डाई आक्सी मेथामफेटामाइन (एमडीएमए) बांटने वाले एक दंपती कुरकनचेरी के मूल निवासी अजमल और उसकी साथी पवित्रा को कोराट्टी पुलिस ने हिरासत में लिया था। नार्को जिहाद की शिकार पवित्रा पलक्कड़ की रहने वाली है। यह दोनों त्रिशूर और एर्नाकुलम के पड़ोसी जिलों में एमडीएमए की आपूर्ति करते थे। इन तक ड्रग्स पहुंचाने वाला बेंगलुरु में रहता था।

रक्षा विशेषज्ञ इस बात को लेकर चिंता व्यक्त कर चुके हैं कि, जैसा कि दावे किए जाते हैं, चीन विभिन्न विकास परियोजनाओं का विरोध करने वाले व्यक्तियों और संगठनों को सहायता देकर भारत के विकास को बाधित करने का प्रयास कर रहा है। गौर करने लायक बात यह है कि केरल और लक्षद्वीप के तटीय क्षेत्रों में विकास के प्रयासों का विरोध करने की कोशिश की गई थी। भारत के इन विकास प्रयासों में लक्षद्वीप को एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल में बदलना, केरल में विझिंजम बंदरगाह का निर्माण करना और तमिलनाडु में वेदांत कॉपर मिल परियोजना शामिल है।

चीनी जासूसी जहाजों और पनडुब्बियों को अक्सर श्रीलंका के बंदरगाहों पर आते देखा गया है। कहा जाता है कि हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी गतिविधियों में वृद्धि हो रही है। इन चीनी गतिविधियों में कलाम द्वीप समूह में मिसाइल परीक्षण स्टेशन और श्रीहरिकोटा में अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र जैसे महत्वपूर्ण भारतीय प्रतिष्ठानों पर संभावित जासूसी के संबंध में चिंताएं व्यक्त की जा चुकी हैं। हिंद महासागर क्षेत्र सामरिक महत्व रखता है और स्वाभाविक है कि विदेशी संस्थाओं द्वारा किसी भी अनधिकृत निगरानी या खुफिया जानकारी एकत्र करने की गतिविधियों के गंभीर प्रभाव हो सकते हैं।

वापस कोच्चि की घटना पर लौटें। ‘लव जिहाद’ के साथ-साथ ‘नार्को जिहाद’ का खतरा बहुत साफ है। ‘द केरल स्टोरी’ सिर्फ केरल तक सीमित नहीं रही है। पिछले वर्ष केरल के त्रिशूर से बाइक पर मिथीलीन डाई आक्सी मेथामफेटामाइन (एमडीएमए) बांटने वाले एक दंपती कुरकनचेरी के मूल निवासी अजमल और उसकी साथी पवित्रा को कोराट्टी पुलिस ने हिरासत में लिया था। नार्को जिहाद की शिकार पवित्रा पलक्कड़ की रहने वाली है। यह दोनों त्रिशूर और एर्नाकुलम के पड़ोसी जिलों में एमडीएमए की आपूर्ति करते थे। इन तक ड्रग्स पहुंचाने वाला बेंगलुरु में रहता था।

आंखें खोलने वाली बात यह है कि एमडीएमए केरल को अभूतपूर्व पैमाने पर तबाह कर रहा है। पिछले वर्ष नशे के आदी एक युवक द्वारा अपनी बुजुर्ग मां के दोनों हाथ काट डालने की घटना सामने आई थी। एमडीएमए के एक अन्य आदी बेटे से मां-बाप को बचाने के लिए पुलिस को हवा में गोलियां चलानी पड़ी थीं। बेटे ने बिस्तर पर पड़े पिता को आठ बार और मां को दो बार चाकू मारा था। इस घटना का प्रसारण कई टीवी न्यूज चैनलों पर भी हुआ था। स्थिति यह है कि केरल के आबकारी विभाग की खुफिया शाखा राज्य के 250 स्कूलों को ‘ड्रग-सेंसिटिव’ के रूप में चिह्नित कर चुकी है। विडंबना यह है कि केरल में नशा तस्करी के अधिकांश मामले दर्ज नहीं होते हैं। पूरी कहानी दिखाने के लिए ‘द केरल स्टोरी’ की कई कड़ियां बनानी पड़ सकती हैं। ल्ल

Topics: लक्षद्वीप द्वीप समूहहिंद महासागरभारत ने तटरक्षक बलnarcotics control bureauपुलिसबलों और सीमा गश्तद केरल स्टोरी‘स्ट्रिंग आफ पर्ल्स’The Kerala Story‘ड्रग-सेंसिटिव’Indian OceanPure Methamphetamineनार्को जिहादAndaman IslandsNarco JihadLakshadweep Islandslove jihadनारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरोIndia Coast Guardलव जिहादशुद्ध मेथामफेटामाइनPolice Forces and Border Patrolनौसेनाअंदमान द्वीप समूहThe 'Udta' Kerala Storynavy
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