बाबा श्री रुद्रनाथ ! भोले के जयकारों और सैकड़ों भक्तों की मौजूदगी में खुले चतुर्थ केदार के कपाट
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बाबा श्री रुद्रनाथ ! भोले के जयकारों और सैकड़ों भक्तों की मौजूदगी में खुले चतुर्थ केदार के कपाट

रुद्रनाथ मंदिर उत्तराखण्ड के चमोली जिले में है जो कि पञ्चकेदार में से एक है

Written byसंजय चौहानसंजय चौहान
May 20, 2023, 07:28 pm IST
inभारत, उत्तराखंड, धर्म-संस्कृति
बाबा श्री रुद्रनाथ

बाबा श्री रुद्रनाथ

रुद्रप्रयाग। आखिरकार छह महीने तक पौराणिक गोपीनाथ मंदिर में निवास करने के बाद अब छह माह तक भगवान रुद्र कैलाश हिमालय में भक्तों को दर्शन देंगे। आज ब्रह्म बेला पर चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिये गये हैं। साफ मौसम में सैकड़ों भक्तों की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोचार, विधि-विधान और बाबा रुद्रनाथ के जयकारों के साथ ब्रह्ममूहर्त में बाबा के कपाट खुले। मंदिर को फूलों से सजाया गया। इस दौरान धाम में छह महीने से पसरा सन्नाटा भी दूर हो गया।

ये है रुद्रनाथ मंदिर

रुद्रनाथ मंदिर उत्तराखण्ड के चमोली जिले में भगवान शिव का एक मन्दिर है जो कि पञ्चकेदार में से एक है। समुद्रतल से 2290 मीटर की ऊंचाई पर स्थित रुद्रनाथ मंदिर भव्य प्राकृतिक छटा से परिपूर्ण है। रुद्रनाथ मंदिर में भगवान शंकर के मुख की पूजा की जाती है। यहाँ पूजे जाने वाले शिव जी के मुख को ‘नीलकंठ महादेव’ कहते हैं। यहां विशाल प्राकृतिक गुफा में बने मंदिर में शिव की दुर्लभ पाषाण मूर्ति है, जहाँ शिवजी गर्दन टेढ़े किये हुए विराजमान हैं। माना जाता है कि, शिवजी की यह दुर्लभ मूर्ति स्वयंभू है। यहां भगवान शिव के रुद्र और शांत दोनों रूपों के दर्शन भक्तों को प्राप्त होते हैं। शीतकाल में बाबा गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में भक्तों को 6 महीने तक दर्शन देते हैं।

धार्मिक आस्था!

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार पांडवों पर गोत्र हत्या का पाप लगा। इस पाप से मुक्ति के लिए पांडवों ने भगवान शिव की आराधना की। मगर भगवान शिव पांडवों को दर्शन नहीं देना चाहते थे। पांडवों ने भगवान शिव का पीछा किया तो उत्तराखंड के पंचकेदारों में भगवान शिव ने पांडवों को अपने शरीर के पांच अलग-अलग हिस्सों के दर्शन कराए। रुद्रनाथ में जब पांडवों को शिव के मुख दर्शन हुए तब जाकर उन्हें गोत्र हत्या से मुक्ति मिली।

यह भी है मान्यता!

देवी सती ने जब अपने पिता के यहां आयोजित यज्ञ में भगवान शिव को आमंत्रण न देने का समाचार सुना तो उन्होंने आक्रोशित होकर उसी यज्ञ कुण्ड में अपने जीवन की आहुति दे दी। बताते हैं कि भगवान शिव ने रुद्रनाथ में तब तिरछी गर्दन कर नारद मुनि से सती का हाल जाना था।

बाबा का धाम प्राकृतिक सौंदर्य का खजाना!

रुद्रनाथ मंदिर के सामने से दिखाई देती नन्दा देवी और त्रिशूल की हिमाच्छादित चोटियां यहां का आकर्षण बढ़ाती हैं। इसके चारों ओर शायद ही ऐसी कोई जगह हो जहां हरियाली न हो, फूल न खिले हों। रास्ते में हिमालयी मोर, मोनाल से लेकर थार, थुनार व मृग जैसे जंगली जानवरों के दर्शन तो होते ही हैं, बिना पूंछ वाले शाकाहारी चूहे भी आपको रास्ते में फुदकते मिल जाएंगे। भोज पत्र के वृक्षों के अलावा, ब्रह्मकमल भी यहां की घाटियों में बहुतायत में मिलते हैं।

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