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समाज बने समर्थ, समृद्ध और स्वाभिमानी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने सेवा संगम के समापन सत्र में समर्थ, समृद्ध, स्वाभिमानी भारत बनाने की दी प्रेरणा

अश्वनी मिश्रअरुण कुमार सिंहWritten byअश्वनी मिश्रandअरुण कुमार सिंह
Apr 19, 2023, 12:07 pm IST
inभारत, संघ @100
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले

भारत तभी समर्थ, समृद्ध और स्वाभिमानी हो सकता है, जब भारत का प्रत्येक व्यक्ति समर्थ, समृद्ध और स्वाभिमानी हो। और समर्थ, समृद्ध व स्वाभिमानी भारत ही विश्व शांति के लिए गारंटी है, यह हमारा विश्वास है।

देशभर से सेवा संगम में आए सेवाभावी कार्यकर्ता साधक हैं। भले ही हम सब छोटी इकाई पर कार्य कर रहे हैं, लेकिन हमारा विचार वैश्विक होना चाहिए। भारत तभी समर्थ, समृद्ध और स्वाभिमानी हो सकता है, जब भारत का प्रत्येक व्यक्ति समर्थ, समृद्ध और स्वाभिमानी हो। और समर्थ, समृद्ध व स्वाभिमानी भारत ही विश्व शांति के लिए गारंटी है, यह हमारा विश्वास है।

कुष्ठ रोगियों की बात हो या फिर वेश्यावृत्ति के लिए विवश महिलाओं के बच्चों के जीवन की, हमें समाज के रूप में इस हिस्से को सशक्त करने की भी चिंता करनी होगी। समाज के उस हिस्से को संबल देने की आवश्यकता है, जो हाशिए पर माना जाता है। इस सबके लिए सरकार के भरोसे बैठना उचित नहीं है। हाशिए पर माने जाने वाले समाज के इस हिस्से के प्रति सोच को बदलने व उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए सामूहिक सामाजिक प्रयास करने होंगे।
‘देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें’ की भावना जाग्रत करते हुए हमें सेवित को भी इतना सशक्त करना होगा कि वह भी सेवा करने योग्य हो जाए।

यह सेवा संगम पुण्य स्थल है। जिस प्रकार संगम में डुबकी लगाने से जो पुण्य प्राप्त होता है, उसी प्रकार इस सेवा संगम में आने पर हमें पुण्य प्राप्त हुआ है। ऐसे संगम ऊर्जा में वृद्धि करते हैं और नया सीखने का भी अवसर प्रदान करते हैं। साथ ही, यदि कुछ विफलताओं को लेकर मन कमजोर होता है, तब उसमें भी ऐसे संगम सकारात्मक ऊर्जा भरते हैं। देखिए, किसी भी कार्य के परिणाम के परिमाण में ईश्वर कृपा का भी महत्व होता है, हमें हमारे प्रयासों में किसी तरह की कमी नहीं रखनी चाहिए। श्रीमद्भगवद् गीता का श्लोक है-
अधिष्ठानं तथा कर्ता करणं च पृथग्विधम्। विविधाश्च पृथक्चेष्टा दैवं चैवात्र पंचमम्।।

हम सबमें सेवा का गुण स्वाभाविक है। सम्पूर्ण भारतभूमि सेवारूपी एक ट्रस्ट है और हम सभी उसके ट्रस्टी। यह हमारा व्यावहारिक अध्यात्म है। इसकी अनुभूति के लिए सेवा में सच्चा मन रखना होगा। एक बात और, सेवा साधकों को अपने कार्य की समीक्षा निरंतर करते रहनी चाहिए।

इसका अर्थ है कि सेवा कार्य का सबसे पहला चरण सेवा के विचार का अधिष्ठान है। दूसरा चरण, उस कार्य के करने के लिए साधनों का है। तीसरा चरण कार्य को मूर्तरूप देने का है। इसके बाद चौथा चरण ईश्वरीय कृपा का है। जिस तरह किसान खेत जोतता है, बुआई करता है, लेकिन अंत में फसल के अनुकूल बारिश, सर्दी, गर्मी ईश्वर प्रदान करता है।

हमें सेवा का कार्य ईश्वरीय कार्य समझकर करना है। स्वामी विवेकानंद जी कहा करते थे कि अज्ञानी और अशिक्षित लोगों की पीड़ा को नहीं सुनने वाले द्रोही होते हैं। इसलिए मैं उस ईश्वर की आराधना करता हूं, जिसे मूर्ख लोग मनुष्य कहते हैं। इसलिए सेवा करते समय हमें सिर्फ मनुष्य में परमात्मा का अंश देखना है और उसकी सेवा करनी है।

हम सबमें सेवा का गुण स्वाभाविक है। सम्पूर्ण भारतभूमि सेवारूपी एक ट्रस्ट है और हम सभी उसके ट्रस्टी। यह हमारा व्यावहारिक अध्यात्म है। इसकी अनुभूति के लिए सेवा में सच्चा मन रखना होगा। एक बात और, सेवा साधकों को अपने कार्य की समीक्षा निरंतर करते रहनी चाहिए।

Topics: सेवा संगमसमर्थसमृद्धस्वाभिमानीदेश हमें देता है सब कुछभारतभूमिProsperousSelf-respectingहम भी तो कुछ देना सीखेंThe country gives us everythingस्वामी विवेकानंदWe should also learn to give somethingcapable
अश्वनी मिश्र
अश्वनी मिश्र
@kashmirashwaniअश्वनी मिश्र भारत की सबसे पुरानी और व्यापक रूप से प्रसारित राष्ट्रवादी हिंदी साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं. देश के ज्वलंत मुद्दों की ग्राउंड रिपोर्ट करने के साथ ही मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा एवं राजनीतिक मुद्दों के बारे में लिखते हैं. जम्मू—कश्मीर, पश्चिम बंगाल एवं आतंकरोधी घटनाक्रम विशेष रुचि के क्षेत्र हैं. देश की विभिन्न राजनीतिक घटनाओं पर तीक्ष्ण नजर रखते हुए उनका समग्र विश्लेषण पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट स्थान रखता है। भारतीय राजनीति, समाज, खेल, मानवाधिकार क्षेत्र की विशिष्ट विभूतियों से निरंतर साक्षात्कार और चर्चा उनके पत्रकारीय अनुभव को मजबूत बनाती हैं. उनके अनेक आलेखों पर देश के राजनीतिक गलियारों में एक नरैटिव खड़ा हुआ. विभिन्न प्रासंगिक विषयों की रिपोर्ट और आलेखों को संसद के पुस्तकालय में संग्रहणीय तौर पर शामिल किया गया. बंगाल की चुनावी हिंसा की ग्राउंड रिपोर्ट एवं उसके पहले की अनेक हिंसाओं में पीड़ितों के जीवंत साक्षात्कार देशभर में सराहे गए. सोशल मीडिया पर उनकी उपस्थित विशेष दर्जा रखती है. [Read more]
अरुण कुमार सिंह
अरुण कुमार सिंह
समाचार संपादक, पाञ्चजन्य | अरुण कुमार सिंह लगभग 25 वर्ष से पत्रकारिता में हैं। वर्तमान में साप्ताहिक पाञ्चजन्य के समाचार संपादक हैं। [Read more]
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