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होम भारत

अटल जी ने नींव डाली थी, आज घर है

अटलजी के बारे में कितना भी कहें, मेरे ख्याल से वह कभी पूरा नहीं होगा

Written byअनुराग पुनेठाअनुराग पुनेठा
Jan 3, 2023, 12:11 pm IST
in भारत, साक्षात्कार

अटल जी सबको साथ लेकर चलते थे। आदमी की परख उनको थी। किस आदमी को कहां लगाना है -यह प्रबंधन उन्होंने अच्छी तरह किया। उनकी सोच थी कि जब तक अच्छी तरह देश का विकास नहीं करेंगे, तब तक आगे नहीं बढ़ेंगे। पाञ्चजन्य के सागर मंथन-सुशासन संवाद में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्रीपद नाइक से वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा की बातचीत के अंश

अटलजी के साथ आपका जो संवाद रहा, एक प्रधानमंत्री के तौर पर एक प्रशासक के तौर पर, आप उसे कैसे देखते हैं?
सबसे पहले मैं पाञ्चजन्य का आभार व्यक्त करता हूँ और बधाई भी देता हूँ कि आपने यह कार्यक्रम गोवा में रखा और इस राजनीतिक मंथन को, सामाजिक मंथन को सबके सामने, गोवा वालों के सामने पेश करने का और सुनने का एक मौका आपने दिया। अटलजी के बारे में कितना भी कहें, मेरे ख्याल से वह कभी पूरा नहीं होगा। जब मुझे भारतीय जनता पार्टी का काम दिया, उस समय मैं विभाग में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का काम कर रहा था। जब मैं पणजी तहसील का संघचालक था, तब एक दिन अचानक मुझे कहा गया कि आपको कल से भारतीय जनता पार्टी का काम करना है। हम कभी सोचा नहीं था कि राजनीति में जाएंगे, लेकिन वरिष्ठ की आज्ञा का पालन तो करना ही था। जब मैं संघ का काम कर रहा था, उस दौर में जब अटलजी भारतीय जनता पार्टी के काम के लिए गोवा आते थे, तब हम सबको कुछ ना कुछ जिम्मेदारी दी जाती थी। मुझे जिम्मेदारी दी गई थी कि जब अटलजी आएं, तो जाने तक उनके साथ रहना, उनकी सिक्योरिटी देखना। अच्छी तरह और एकदम नजदीक से वातोलाप करने का मौका पार्टी में आने से पहले भी मिला। इस नेतृत्व को हम दिल से मान चुके थे, और उसके बाद में काम करते-करते पार्टी की जिम्मेदारी आ गई।

पहले मैं 1988 में गोवा में महासचिव बना। बाद में गोवा राज्य का अध्यक्ष भी बना और 1999 में मुझे कहा गया कि आपको संसदीय सीट से चुनाव लड़ना है। वह भी मान दिया गया और मैं गोवा के लोगों का बहुत आभारी हूं। भारतीय जनता पार्टी ने जो कुछ काम किया हो, गोवा के लोगों ने 34 वर्षों में भारतीय जनता पार्टी को पहले चार विधायक दिए। उसके बाद दस हुए, उसके बाद अठारह। 1999 में जब मुझे कहा गया कि संसदीय सीट लड़ना है, तो जिस तरह से अटलजी ने, हमारे अन्य नेता आडवाणी जी, जोशी जी, प्रमोद जी, मुंडे जी, इन सबने जोर लगाया, उन्होंने हमको काम की जो सीख दी थी, उसके आधार पर 1999 में हम पहली बार जीत कर आए और जीतने के बाद दिल्ली गए।

ऐसा कभी हमने सोचा भी नहीं था। सांसद होने के बाद उसी टर्म में मंत्री बनेंगे, यह भी कभी नहीं सोचा था। अटलजी ने मंत्री भी बना दिया। और एक के बाद एक करके कृषि से वित्त तक पांच मंत्रालयों तक पहुंचा दिया। उनका जो मार्गदर्शन मिला, उनके व्यवहार से जो हमें सीख मिली, हम शब्दों में इसका वर्णन कर नहीं सकते। आज भारतीय जनता पार्टी की गोवा में जो स्थिति है, यह अटलजी की बदौलत है। भारतीय जनता पार्टी 1999 में जो सीटें जीती, उस सीट से दूसरी बार कभी नहीं जीता, ऐसा इतिहास है। लेकिन मैं अटलजी और अन्य सभी नेताओं के आशीर्वाद से 1999 से आज तक पांचवीं बार चुनकर आया हूं।

ये कैसे हुआ, क्या हुआ?
यह अटलजी की सीख थी कि किस तरह से राजनीति में हमें क्या करना है। राजनीति हमारे लिए ऊपरी चीज है, लेकिन समाज को किस तरह बदलना है, समाज में किस तरह से रहना है, यह उन्होंने सिखाया। यही कारण है कि आज गांव में भारतीय जनता पार्टी अपनी पूरी ताकत के साथ खड़ी है। आपने पूछा कि किस तरह संवाद होता था? तो संवाद में अटलजी अग्रसर थे। संवाद नहीं तो कुछ छोटा भी काम हो। हम तो छोटे मंत्री थे। मैं एक राज्य मंत्री था। जब मैं कृषि मंत्रालय में था, तब मैं एक बार शनिवार को गोवा आया था, तो अटलजी का फोन आ गया। वे मुझे गोवा नरेश कहते थे। उन्होंने पूछा कि कैसे हैं आप, कैसा चल रहा है। बोले डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी कहते हैं कि आपको उनके साथ जाना है। एचआरडी में जाओ। मुझसे पूछा कि आपका क्या कहना है। मुझसे पूछने की कोई जरूरत नहीं थी। वह सीधे ही ऐसा कह सकते थे कि आप जाओ, लेकिन आपस में रिश्ता रखने का उनका तरीका था। उन्होंने पूछा क्या चाहते हैं आप? जाना चाहते हैं। मैंने कहा कि अटलजी, मुझे कृषि में थोड़ा सा काम है। कुछ नए प्रोजेक्ट किए हैं। मुझे यहां रहने दो। ऐसा बोलने के बाद मुझे वहां ही रख दिया और इस तरह से छोटी-छोटी बातों भी सबको साथ लेकर, सबको बराबर लेकर वह चलते थे और उनके इसी आदर्श से हम आज भी चलते हैं।

आप सबको साथ लेकर चलने की बात कह रहे हैं। राजग की सरकार में बहुत से सहयोगी दल थे, जिनकी अपनी मांग होती थी। अभी आपके पास बहुत से मंत्रालय हैं, पर्यटन है, सड़क है, जहाजरानी है। ये बहुत से काम अटलजी के समय भी थे। वह क्या सोच थी, क्या दबाव था। आपने नजदीक से देखा होगा कि विकास का काम आगे रखना है, देश को पहले रखना है। राष्ट्रीय राजमार्गों को बनाना है। इस तरह के काम को लेकर उनकी क्या सोच थी और क्या चुनौतियां थीं?
आज हम क्यों पिछड़े हुए हैं, क्योंकि जिस तरह से देश का विकास होना चाहिए था, उस तरह नहीं हुआ। इसीलिए विकास को लेकर हमें आगे जाना है। इसलिए उन्होंने जो नई परियोजना शुरू हो सकती थीं, उसी समय शुरू कर दीं। इसके आगे मैं कहूंगा कि यदि देश का विकास करना है तो हमको सबसे पहले देश का बुनियादी ढांचा बढ़ाने का काम पूरा करना पड़ेगा। मैं जब कृषि में था, उस वक्त मुझे बोला गया कि आपको इसे छोड़ कर राष्ट्रीय राजमार्ग में जाना है। आदमी की परख उनको थी। किस आदमी को कहां लगाना है -यह प्रबंधन उन्होंने अच्छी तरह किया। उनकी सोच थी कि जब तक अच्छी तरह देश का विकास नहीं करेंगे, तब तक आगे नहीं बढ़ेंगे। इसलिए उन्होंने उस समय नए नई परियोजनाएं शुरू की थीं। इसका नतीजा हम आज देख रहे हैं। आज पूरा नेटवर्क सभी जगह का, चाहे सागरमाला हो, पोर्ट का विकास हो, राजमार्गों का विकास हो, उन्होंने उसकी नींव डाली थी। आज हम उसका घर देख रहे हैं।

आज एलोपैथी के स्तर का पूरे देश में आयुष का बुनियादी ढांचा बन रहा है। हाल ही में तीन बड़े इंस्टीट्यूट का उद्घाटन हुआ है। भारत के ऋषि-मुनियों ने जो पद्धति तैयार की थी, वह आज पूरे समाज में जा रही है। कोविड काल में जिस तरह से इसने काम किया है, उससे दूसरे देश आज मांग कर रहे हैं कि इसे हमारे देश में आने दो। आयुर्वेद पद्धति हमारी धरोहर है, हमारी संस्कृति है। इस संस्कृति को यदि हम अपना लें तो निश्चित तौर से पूरा भारत निरोगी बनेगा।

उस समय भी पर्यटन को लेकर और धार्मिक पर्यटन को लेकर जोर था, जिस पर इस सरकार ने भी जोर दिया है। पर्यटन को लेकर इस दौरान आपने क्या कुछ परिवर्तन देखा और क्या योजनाएं आगे समय के लिए हैं।
सभी मंत्रालयों में एक नई जान डाली हुई है। किस तरह मंत्रालय को काम करना है। हमे कहां पहुंचना है। देश का उद्धार हो, देश का विकास हो-ये सारी बातें हैं। उन्होंने सर्किट बनाए। रामायण सर्किट हो, महाभारत सर्किट, बुद्धा सर्किट, अंबेडकर सर्किल-ये विचार उस समय उनका था। इसका क्रियान्वयन आज मोदी सरकार कर रही है। सबको जोड़ना, हमारी संस्कृति को जोड़ना, अध्यात्म को जोड़ना। इस तरह जब पर्यटन बढ़ेगा, तो उससे हमारी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। इस तरह काम उस वक्त शुरू हुआ था। आज वह काम पूरा हो रहा है। लेकिन उनकी सोच थी कि जब हम पर्यटन को बढ़ावा देंगे, तभी हमारा नाम भी पूरी दुनिया में जाएगा और हमें उसका फायदा भी मिलेगा।

पर्यटन के हिसाब से देखा जाए तो क्या कुछ बदलाव देखा है पिछले दो तीन सालों में और चुनौतियां क्या थीं?
पर्यटन मंत्रालय ने बहुत काम किया है। हमारी स्वदेश दर्शन योजना में पूरे देश में टूरिज्म के जो स्थान हैं, स्वदेश दर्शन योजना के जरिए उसका विकास किया गया। पर्यटकों को वहां जो भी सुविधा चाहिए, जब तक वह सुविधा निर्माण नहीं होगा, तब तक पर्यटक वहां कैसे आएंगे। इसलिए इस योजना के जरिएये सभी सुविधा उस स्थान पर देने की व्यवस्था की है। दूसरी प्रसाद योजना है। हमारे जो प्राचीन स्थल हैं, जिन्हें एएसआई भी देखती है, वहां विकास करने का काम प्रसाद योजना के जरिए होता है। तीसरी योजना आइकॉनिक स्थलों के विकास की है। बाकी त्यौहार, मेले के लिए वित्तपोषण करते हैं। पर्यटन में जितना विकास होगा, उतने विदेशी पर्यटक हमारे देश में आएंगे और इससे देश की प्रगति में निश्चित तौर से मदद मिलेगी। आज पर्यटन से सभी राज्यों का भला हो रहा है, चाहे वह विपक्ष शासित हों।

आपने आयुष मंत्रालय संभाला, आयुष मंत्रालय ने कोरोना में एक बड़ा सम्बल प्रदान किया। उसमें किस तरह का विकास देखते हैं।
आयुष मंत्रालय अटलजी के काल से ही था। पहले यह स्वास्थ्य मंत्रालय का एक विभाग था। कुछ सौ करोड़ रुपये का बजट होता था। उसमें से 50 करोड़ भी खर्च नहीं होते थे। तब यह अल्टरनेटिव मेडिसिन नाम से ही था। जब अटलजी आए, तो उन्होंने उसको आयुष नाम दिया। माननीय नरेंद्र भाई मोदी जी ने 2014 में जब कार्यभार संभाला, उस समय से दिल्ली में दो वर्ष में वर्ल्ड आयुर्वेद कांग्रेस हुई। कोरोना के दौर में इसमें थोड़ा विलंब हुआ। माननीय नरेंद्र भाई मोदी ने आयुष मंत्रालय अलग किया। फिर वह योग को पूरी दुनिया में ले गए। आज विश्व में लगभग 200 देश हर दिन 21 जून को योग करते हैं। सिर्फ एक दिन के लिए नहीं। योग अब पूरे विश्व में स्थाई है। दुनिया को कुछ देने की हमारी परंपरा है। यह परंपरा माननीय मोदी जी ने भी चला दी है। मैं भाग्यशाली हूं कि जब आयुष मंत्रालय बना, तो उसकी जिम्मेदारी मुझे दे दी और सात साल से भी ज्यादा अवधि के लिए दी। पूरी वित्तीय ताकत दी, पूरा समर्थन दिया और आज हमने 120 से अधिक जिला अस्पताल खोले हैं। हमने योजना बनाई कि हर जिले में आयुष का एक हॉस्पिटल होना चाहिए, भले ही वह आयुष हो, होम्योपैथिक हो, यूनानी हो, सिद्धा हो। जिस राज्य ने जो चाहा, वह हमने दिया। आने वाले 2-4 वर्षों में जिले में एक हॉस्पिटल 50 बेड का हो जाएगा। गोवा में दो जिले हैं, हमने दो हॉस्पिटल्स स्वीकृत किए हुए हैं। 11 तारीख को प्रधानमंत्री यहां आए थे। उन्होंने आल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ आयुर्वेद का उद्घाटन किया। आज एलोपैथी के स्तर का पूरे देश में आयुष का बुनियादी ढांचा बन रहा है। हाल ही में तीन बड़े इंस्टीट्यूट का उद्घाटन हुआ है। भारत के ऋषि-मुनियों ने जो पद्धति तैयार की थी, वह आज पूरे समाज में जा रही है। कोविड काल में जिस तरह से इसने काम किया है, उससे दूसरे देश आज मांग कर रहे हैं कि इसे हमारे देश में आने दो। आयुर्वेद पद्धति हमारी धरोहर है, हमारी संस्कृति है। इस संस्कृति को यदि हम अपना लें तो निश्चित तौर से पूरा भारत निरोगी बनेगा।

गोवा को आपने कितना बदलते देखा, भारतीयता के साथ कितना जुड़ते देखा? उन्नीस तारीख को गोवा लिबरेशन डे भी मनाते हैं और आज हम सागर मंथन कर रहे हैं। गोवा को अपने कितना और भारतीय होते देखा?
लोगों की आस्था आज गोवा में भी बढ़ गई है। लोग सोचते थे कि ये अलग तरीके का राज्य है। जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार यहां आई, सबको पता चला कि यह भी कुछ अलग है। जिस सेक्युलरिज्म की बात अटलजी ने कही, सचमुच इसका पालन और इसका क्रियान्वयन भारतीय जनता पार्टी कर रही है। हम सबका देश भारत है, हम सब भारत माता के सुपुत्र हैं। हमारी यह विचारधारा आज लोग पसंद कर रहे हैं। आज भारतीय जनता पार्टी के साथ हिंदू भी हैं और ईसाई भी।

Topics: देश का विकासकेंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्रीपद नाइकसागर मंथन-सुशासन संवाद  Bharatiya Janata PartyNational HighwaysMinistry of AgricultureDevelopment of the countryUnion Culture and Tourism Minister Shripad Naikराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघSagar Manthan-Good Governance Dialogueभारतीय जनता पार्टीराष्ट्रीय राजमार्गकृषि मंत्रालय
अनुराग पुनेठा
अनुराग पुनेठा
अनुराग पुनेठा वरिष्ठ पत्रकार हैं, टीवी पत्रकारिता में लंबा समय काम किया है, कई टीवी चैनल्स में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं। रक्षा और विदेश मामलों पर पकड़ है और तमाम अखबारों में लिखते रहे हैं। लोकसभा टीवी, संसद टीवी ज़ी न्यूज़ में कार्यरत रहे। टाइम्स ऑफ इंडिया, हिन्दुस्तान टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित दैनिकों के लिए के लिए लेखन किया है। [Read more]
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