भारत की सेना में रह कर वीर गाथा लिखने वाले डेसमंड हायड, मिला था महावीर चक्र
October 7, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

भारत की सेना में रह कर वीर गाथा लिखने वाले डेसमंड हायड, मिला था महावीर चक्र

डेसमंड की अगुवाई में जाट रेजिमेंट के कुछ सैनिकों ने 57 वर्ष पूर्व एक ऐसी भयानक जंग लड़ी थी, जिसे दुनिया की सबसे कठिन जंगों में से एक माना जाता है।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Nov 29, 2022, 03:36 pm IST
inभारत, उत्तराखंड

देहरादून : भारत जब स्वतन्त्र हुआ तो सभी ब्रिटिश फौजी अफसरों की तरह आयरिश मूल के नौजवान अफसर डेसमंड हायड के सामने भी दो विकल्प थे, पहला वापस अपने देश चला जाए, दूसरा वो चाहे तो भारत या पाकिस्तान की सेना के साथ बना रहे। लगभग सभी ब्रिटिश फौजियों ने पहला विकल्प ही चुना, लेकिन इस नौजवान अफसर ने भारत में अपनी रेजिमेंट के साथ रहने का फैसला किया, इसके बाद जो हुआ वह एक अद्भुद गाथा है। इस अफसर ने रेजिमेंट के साथ भारत के लिए जंग लड़ी, रिटायरमेंट के बाद भी इस अफसर के लिए अपनी रेजिमेंट ही सब कुछ थी और दुनिया छोड़ने के बावजूद वो आज भी अपनी रेजिमेंट के साथ ही है।

यूनाइटेड किंगडम में आयरलैंड के एक्सेटर में 28 नवंबर सन 1926 को जन्मे डेसमंड हायड ने इंडियन मिलिट्री अकादमी देहरादून में ट्रेनिंग के बाद 12 सितंबर सन 1948 को भारतीय फौज की जाट रेजिमेंट के साथ कमीशन हासिल किया था।

इनकी अगुवाई में जाट रेजिमेंट के कुछ सैनिकों ने 57 वर्ष पूर्व एक ऐसी भयानक जंग लड़ी थी, जिसे दुनिया की सबसे कठिन जंगों में से एक माना जाता है। भारतीय फौज ने ऐसी जंग कभी नहीं लड़ी थी। डेसमंड हायड के प्रेरणादायक नेतृत्व और सूझबूझ भरे कदमों के चलते भारतीय सेना की जाट रेजिमेंट ने वो कर दिखाया जो दुनिया के इतिहास में कुछ ही फौजें कर पाई हैं। इसी की एक अतुल्य दास्तान है डोगराई वॉर।

सन 1965 की भारत-पाकिस्तान जंग के दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल हायड जाट रेजिमेंट की तीसरी बटालियन या 3 जाट रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर बने थे। बटालियन की कमान सम्भालने के कुछ घंटों के भीतर ही उन्हें अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के समानांतर और पाकिस्तान के अंदर बहने वाली इछोगिल नहर को भेदने का आदेश मिला था। पाकिस्तान में आठ किलोमीटर अंदर बहने यह एक गहरी और चौड़ी नहर थी, जिसके दूसरी तरफ पाकिस्तानी फौज ने कंक्रीट के बंकर बना रखे थे, वहां उनके बख्तरबंद दस्ते भी तैनात थे। हायड की बटालियन ने इस नहर को भेद डाला, इसके बाद उन्हें लाहौर और ग्रांड ट्रंक रोड से लगते कस्बे ‘डोगराई’ पर धावा बोलने का आदेश मिला। जाट रेजिमेंट ने 6 और 7 सितंबर सन 1965 की रात को पहली बार डोगराई पर धावा बोला, लेकिन पीछे हटना पड़ा क्योंकि उनकी मदद के लिए जिस यूनिट को आना था वो संवादहीनता के चलते पहुंच ही नहीं पाई थी। जाट बटालियन को अगले आदेश तक पंद्रह दिन दुश्मन से महज आठ किलोमीटर दूर पाकिस्तान के ही संतपुरा गांव की खाइयों में बिताने पड़े थे। इतने दिनों में पाकिस्तानी फौज ने डोगराई में जबरदस्त किलेबंदी कर दी, इन विषम हालातों के बीच कर्नल हायड को 21 सितंबर सन 1965 की रात को फिर डोगराई पर धावा बोलने का आदेश मिला। डोगराई पर धावा बोलने से पहले कर्नल हायड ने दो बातें भारतीय जवानों से साफ तौर पर कह दी, वो भी ठेठ हरियाणवी में ‘पहला, एक भी आदमी पीछे नहीं हटेगा। दूसरा, जिंदा या मुर्दा, सभी को डोगराई में मिलना है’। इसी प्रेरणादायक वाक्य का नतीजा था कि जाट बटालियन अपने सर्वोच्च आत्मबल और बहादुरी के साथ जंग के मैदान में उतरी, रात को करीब 1.30 बजे सूबेदार पाले राम के ‘जाट बलवान, जय भगवान’ के जयकारे साथ ही रेजिमेंट के पांच सौ तेईस बहादुर सैनिकों ने कूच करना शुरू किया, सामने खुद से दोगुनी से ज्यादा संख्या वाली फौज थी। डोगराई में पाकिस्तानी फौज की इन्फेंट्री 3 बलोच की 2 बटालियनों ने मोर्चा संभाल रखा था, जिन्हें एक टैंक स्क्वाड्रन की भी मदद मिल रही थी। गोलियों की बौछारों के बीच जाट रेजिमेंट के जवान डोगराई तक आठ किलोमीटर छिपते हुए, रेंगते हुए आगे बढ़े। वो भी उन खाइयों में जिन्हें पाकिस्तानी फौज ने खुद अपने लिए बनाया था, साफ है हायड के सैनिकों के लिए डगर बेहद कठिन थी, इन हालातों के बीच हायड ने अपने सैनिकों से दो टूक कहा – मैं अकेला ही युद्ध के मैदान में डटा रहूंगा।

दूसरी तरफ भारतीय जवानों ने अपनी जाट रेजिमेंट के गौरवशाली इतिहास का हवाला देते हुए किसी भी सूरत में पीछे नहीं हटने का भरोसा दिया, सैनिक पालेराम को 6 गोलियां लगीं थी, युद्ध पश्चात सैनिक पालेराम को वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। कर्नल हायड के बहादुर भारतीय जवान बंदूको, संगीनों, ग्रेनेड से यहां तक कि निहत्थे लड़ते रहे, इंच दर इंच आगे बढ़ते रहे। एक-एक कर हर रास्ते, गली, घर, बंकर पर कब्जा किया था। कुछ ही घंटों के युद्ध के पश्चात पाकिस्तानियों ने भागना शुरू कर दिया था। सुबह चार बजे तक या तो पाकिस्तानी सैनिक मारे जा चुके थे, या फिर भारतीयों के कब्जे में थे और बाकी जंग के मैदान से भाग चुके थे। दिन निकलने के साथ ही लांस नायक ओमप्रकाश ने शान के साथ डोगराई में तिरंगा फहरा दिया, वो भी लाहौर नगर के बिल्कुल दरवाजे पर. 22 और 23 सितम्बर सन 1965 को भी कुल मिलाकर चार बार पाकिस्तान की तरफ से हमले हुए लेकिन उन्हें फिर मुंह की खानी पड़ी. उल्टा जाट रेजिमेंट ने डोगराई से लगते बाटापुर और अत्तोकअवान पर भी कब्जा कर लिया था। डोगराई जंग की इस रात में हायड ने अपने 86 बहादुर जवान 5 अफसर, 1 जे.सी.ओ. और 80 अन्य सैनिक तो खोए लेकिन बदले में दोगुने से ज्यादा दुश्मन सैनिक ढेर कर दिए थे। जंग की इस एक रात ने 3 जाट बटालियन को 3 महावीर चक्र, 4 वीर चक्र और 7 सेना मेडल जरूर दिला दिए जो किसी भी बटालियन के लिए असम्भव सी बात है। डेसमंड हायड को युद्धकालीन सेवाओं में दिए जाने वाले दूसरे सबसे बड़े सैनिक सम्मान महावीर चक्र से सम्मानित किया गया, हायड को मिले महावीर चक्र के साइटेशन के अनुसार – ‘पाकिस्तान की तरफ से भीषण हमले के बावजूद हायड के व्यक्तिगत साहस, अभूतपूर्व नेतृत्व के चलते 3 जाट बटालियन ने पूरे ऑपरेशन के दौरान असाधारण वीरता का परिचय दिया’।

हायड की बटालियन को एक और विशिष्ट गौरव हासिल हुआ जब 29 अक्टूबर सन 1965 के दिन भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री खुद डोगराई पहुंचे और 3 जाट बटालियन के बहादुर सैनिकों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने भारत में अब तक का सबसे मशहूर नारा – ‘जय जवान, जय किसान’ दिया था। इस जंग से जुड़ी कई जबरस्त कहानियां हैं जिसे हायड ने अपने संस्मरण में भी लिखा है – ‘सूबेदार खजान सिंह की खोपड़ी में गोली लग गई, लेकिन उन्होंने जंग का मैदान छोड़ने से इंकार कर दिया था’। ‘हथियार नहीं पहुंच पाए, फिर भी उनके जवान डटे रहे।’ हायड के मुताबिक जाटों की अनवरत जिद, हठ, साहस के चलते अत्यधिक कठिनाईयों के बावजूद भी उन्होंने डोगराई को फतह कर लिया। हायड के सैनिकों ने ऐसा साहसिक कारनामा कर दिखाया कि हायड, जाट रेजिमेंट और डोगराई की जंग पर हरियाणवी में कई लोककथाएं और लोकगीत बन गए थे. कर्नल हायड के मुताबिक उनके हरेक आदमी के बीच वीरता का असाधारण नमूना पेश करने की होड़ थी और उन्होंने कर भी दिखाया. उन्होंने अपने दबंग नेतृत्व को कभी इसका श्रेय नहीं दिया। महज एक बटालियन के साथ बहादुर और साहसी कमांडिंग अफसर ने दुश्मन की उस बटालियन को हरा दिया, जिसे एक पूरे टैंक स्क्वाड्रन के साथ-साथ एक और बटालियन की मदद मिल रही थी. कर्नल हायड के मुताबिक उनके सभी जवान और अफसर इसलिए लड़ रहे थे कि – ‘वे अपने साथियों, परिवार और समाज की नजर में अपना सम्मान खोना नहीं चाहते थे, उन्हें डर था कि जंग में फतह हासिल नहीं हुई तो वे वापस जाकर क्या मुंह दिखाएंगे, इसी हिम्मत ने उन्हें मौत के डर से बाहर निकाल लिया था’।

इसके बाद हायड ने सन 1971 की जंग में भी हिस्सा लिया, जब उन्होंने जम्मू सेक्टर में पूरी एक ब्रिगेड की कमान संभाली। मजबूत शख्सियत के धनी हायड की जिंदगी बड़ी सरल थी और उनके जीवन का सीधा-सा मूलमंत्र था – ‘आपका देश सबसे पहले है, उसके बाद दूसरे नंबर पर आपके जवान आते हैं और सबसे आखिर में आपके खुद के हित आते हैं’। यानि उनकी जिन्दगी के उसूल बड़े साफ थे, जिनकी जिन्दगी का हरेक दिन भारतीय फौज को समर्पित था। डोगराई की जंग पर ब्रिगेडियर हायड ने पुस्तक भी लिखी थी। जिन्दगी भर वो एक फौजी ही रहे, जिन्दगी के आखिरी दिनों में कैंसर से उन्होंने एक बहादुर फौजी की तरह ही जंग लड़ी थी। कहते हैं कि अपनी मौत से ठीक एक महीने पहले हायड ने कैलेंडर में 25 सितम्बर की तारीख पर गोला किया और कहा कि यह उनकी जिंदगी का आखिरी दिन होगा, उनके साथियों ने ब्रिगेडियर हायड से कहा कि आप क्या मजाक कर रहे हैं। लेकिन ऐसा ही हुआ ठीक 25 सितंबर सन 2013 के दिन हायड ने 87 साल की उम्र में यह दुनिया छोड़ दी लेकिन अपनी रेजिमेंट को नहीं छोड़ा। हायड को कोटद्वार से लाकर उसी जाट रेजिमेंट के मुख्यालय रेजिमेंटल सेंटर बरेली में ही दफनाया गया, जिससे से वे बेपनाह मोहब्बत करते थे। रेजिमेंट ने भी अपने सबसे प्रिय, सम्मानित अफसर को पूरे राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी। साफ है ब्रिगेडियर हायड कोई साधारण सैनिक नहीं थे, उनकी जैसी असाधारण वीरता के नमूने बिरले ही मिलते हैं।

Topics: UttarakhandKotdwarDehradunDesmond HydeUnited Kingdomडेसमंड हायडआयरिश मूल का नौजवान अफसरमहावीर चक्रब्रिटिश फौजी28 नवंबर 1926 आयरलैंडयूनाइटेड किंगडम25 सितंबर 2013 कोटद्वार उत्तराखंडआयरलैंड का एक्सेटरIrish-born young officerदेहरादूनBritish soldier
Share21
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

Chardham Heli Yatra Safety ICCCC Monitoring

मौसम में सुधार के बाद चार धाम यात्रा पुनः शुरू, सावधानी बरतने की सलाह

sdrf uttarakhand iso 9001 certification disaster management

SDRF उत्तराखंड ने ISO 9001 Certification की प्रक्रिया की पूरी, आपदा प्रबंधन सेवाओं में गुणवत्ता को मिलेगा बढ़ावा

uttarakhand assembly election preparations ceo bvrc purushottam

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव: तैयारियों को लेकर CEO सख्त, जिलाधिकारियों को चरणबद्ध तैयारी के निर्देश

आगामी विधानसभा चुनावों के संंबंध में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने ली बैठक, कहा-गाइडलाइन के अनुसार तैयारी में जुटें अफसर

उत्तराखंड: बीजेपी के नए प्रभारी बने राम माधव, सह प्रभारी की जिम्मेदारी बांसुरी स्वराज और अरविन्द मेनेन को

उत्तराखंड में अवैध SIM Box टेलीकॉम गेटवे का भंडाफोड़, 77 एंटीना, राउटर, मोबाइल एवं अन्य उपकरण बरामद

Load More

ताज़ा समाचार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

कभी यूपी में अराजकता की दिखती थी डरावनी तस्वीर, अब माफिया मिट्टी में मिल गए : सीएम योगी आदित्यनाथ

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम

मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए चलेगा विशेष अभियान,  8 से 10 अक्टूबर तक सभी बूथों पर विशेष कैंप लगाएंगे बीएलओ

उत्तरकाशी में सेवा ज्योति कलश यात्रा एवं सेवा संकल्प सभा में प्रतिभाग करते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।

सीएम धामी ने उत्तरकाशी में सेवा ज्योति कलश यात्रा एवं सेवा संकल्प सभा का किया आगाज, बनेगा विश्वनाथ-शक्ति मंदिर कॉरिडोर

ड्रग तस्करों के बारे में मीडिया को जानकारी देते पुलिस अधिकारी।

हल्द्वानी: बनभूलपुरा का दर्जी  निकला ड्रग तस्कर, पुलिस ने भेजा जेल 

आकाशवाणी भवन के बाहर धरने पर बैठे राहुल गांधी समेत अन्य नेता।

विपक्ष ने न समय मांगा, न माना प्रोटोकॉल; ‘संसद एनेक्सी’ में बैठक की रखी असामान्य शर्त : चुनाव आयोग

दीप प्रज्वलित कर श्री अशोक सिंहल जन्मशताब्दी वर्ष का श्रीगणेश करते महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद गिरि जी महाराज। साथ में हैं बाएं से श्री अमित शाह, श्री आलोक कुमार, श्री दत्तात्रेय होसबाले और श्री महेश भागचंदका

संगठन शिल्पी की शताब्दी

प्रतीकात्मक चित्र

‘मुस्लिम लड़कियां नास्तिक हो रहीं, उन्हें रोकें’- कांग्रेस नेता शाजी से लेकर मौलाना रशीदी की चिंता पर ‘आजादी’ वाले मौन?

छात्रसंघ चुनाव, वोट चोरी, केरल की जीत से CJP तक

संकल्प से सिद्धि तक… छवि, शक्ति और स्वराज!

कैलिफोर्निया में शिवगंगा की प्रदर्शनी

कैलिफोर्निया में गूंजी झाबुआ के विकास की कहानी, प्रदर्शनी देखकर लोगों ने कहा- गांव देखना है

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies