बैंकिंग में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ की अपार संभावना
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बैंकिंग में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ की अपार संभावना

बैंकिंग के क्षेत्र में नए अवसर के साथ स्टार्टअप और विभिन्न बैंकिंग एप्लीकेशन के कारण नई चुनौतियां भी हैं। ऐसे में बैंकिंग क्षेत्र को ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ पर ध्यान केंद्रित करना होगा

Written byबालेन्दु शर्मा दाधीचबालेन्दु शर्मा दाधीच
Aug 26, 2022, 01:40 pm IST
in विज्ञान और तकनीक

बैंकिंग के क्षेत्र में नए अवसर पैदा हुए हैं और उनके साथ ही नई चुनौतियां भी आई हैं। आपसी प्रतिद्वंद्विता और डूबत खाते जैसी पारंपरिक चुनौतियां तो आज भी मौजूद हैं लेकिन पिछले एक दशक में कुछ ऐसी चुनौतियां भी आई हैं जो पूरी तरह से नई हैं।

जैसे-जैसे देश में आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी विकास हुआ है, बैंकिंग के क्षेत्र में नए अवसर पैदा हुए हैं और उनके साथ ही नई चुनौतियां भी आई हैं। आपसी प्रतिद्वंद्विता और डूबत खाते जैसी पारंपरिक चुनौतियां तो आज भी मौजूद हैं लेकिन पिछले एक दशक में कुछ ऐसी चुनौतियां भी आई हैं जो पूरी तरह से नई हैं। मिसाल के तौर पर वित्तीय तकनीकें या फिनटेक जिन्होंने बैंकों के सामने नए प्रतिद्वंद्वी खड़े किए हैं। इसी तरह से ब्लॉकचेन, जो धीमी गति से ही सही, अपनी जगह बनाने में कामयाब हो रही है। एक तरफ ऐसी तकनीकों ने बैंकिंग सेवाओं का अपरिमित विस्तार कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली के सामने यह जोखिम भी खड़ा कर दिया है कि लोगों तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाने में उसका एकाधिकार संकट में है। खुद को प्रासंगिक और असरदार बनाए रखने के लिए जरूरी है कि बैंकिंग क्षेत्र अपने डिजिटल कायाकल्प का सिलसिला जारी रखे। वह सिलसिला जो कभी कंप्यूटरीकरण से शुरू हुआ था, और फिर कोर बैंकिंग तथा नेटबैंकिंग में दिखा, वह आज डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक जा पहुंचा है।

भारतीय बैंकिंग के साथ होड़ करने वाले विदेशी बैंक, फिनटेक एप्लीकेशन, डिजिटल भुगतान प्रणालियां और स्टार्टअप नई सोच और नई तकनीकों के साथ आगे आ रहे हैं और बेहद प्रतिद्वंद्विता वाले वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में भी उन्होंने अपने लिए अलग जगह बना ली है। न सिर्फ वित्तीय लेनदेन बल्कि कर्ज लेने-देने और निवेश, बीमा आदि क्षेत्रों पर भी बैंकों का विशेषाधिकार टूट रहा है। वित्तीय सेवाएं पैदा कराने वाले इन एप्लीकेशनों की नई जमात ग्राहकों को तलाशने, सेवाएं देने तथा उन तक सूचनाएं पहुंचाने के नए मायने गढ़ रही है। हमारे बैंक आज भी अपने ग्राहकों और भावी ग्राहकों से बहुत दूर हैं। दूसरी ओर बैंकों का कोई न कोई प्रतिद्वंद्वी एप्लीकेशन या स्टार्टअप देश के लगभग हर मोबाइल फोन में मौजूद है। आज के दस साल बाद क्या स्थिति होगी, इसकी कल्पना मुश्किल नहीं है।

कारोबार के नए अवसरों की तलाश करने, कर्ज लेने वालों के सुपात्र होने या न होने का आकलन करने, संभावित जालसाजी के बारे में सतर्क करने, निवेश के सही या गलत दिशा में जाने के बारे में अग्रिम या त्वरित सूचना देने, ग्राहकों की पहचान को प्रमाणित करने, धनशोधन की आशंका को रोकने और कामकाज के स्वचालन जैसे अनगिनत कामों में उसकी मदद मिल सकती है।

तकनीकी लिहाज से हमारे बैंक जो नया कर सकते हैं, उनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग भी एक है जो उन्हें खुद को चुस्त-दुरुस्त बनाने, लागत घटाने, कारोबार का विस्तार करने, बाहरी चुनौतियों से निपटने, कारोबारी जोखिमों को कम करने और एक स्मार्ट प्रतिद्वंद्वी बनने में मदद कर सकता है। आज की बैंकिंग ज्यादातर पैसिव बैंकिंग है जिसमें बैंकों की भूमिका तब शुरू होती है जब उसके पास बाहर से अनुरोध या निर्देश आता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उसके साथ जुड़े हुए दूसरे तकनीकी तत्व हमारे बैंकों को प्रो-एक्टिव बैंकिंग की तरफ ले जा सकते हैं जहां खुद बैंक बढ़-चढ़कर अपने लिए अवसरों की तलाश कर रहे हों। वे खुद ग्राहक के पास पहुंचें तथा उनसे जुड़े रहें। इस दिशा में थोड़ा-बहुत काम किया भी जा रहा है लेकिन जिस तेजी के साथ फिनटेक स्टार्टअप्स और ब्लॉकचेन जैसे प्रतिद्वंद्वियों ने दुनिया भर में अपनी जगह बनाई है, उसके सामने मौजूदा बैंकिंग प्रणाली की रफ्तार बहुत धीमी है और तौर-तरीके सीमित।

बैंकों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग करने के अनगिनत लाभ हो सकते हैं। बिजनेस इनसाइडर इंटेलिजेंस की तरफ से किए गए आॅटोनॉमस नेक्स्ट नामक शोध का अनुमान है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रयोग से दुनिया के बैंक सन् 2023 में अपने खर्चों में 447 अरब डॉलर (35700 करोड़ रुपये) तक की कटौती कर सकते हैं। इसमें से 90 प्रतिशत धनराशि सिर्फ फ्रंट आफिस और मिडल आॅफिस के जरिए बच सकती है। हालांकि बात यहीं तक सीमित नहीं है। एक्सेंचर की एक रिपोर्ट का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बदौलत सन् 2035 तक भारतीय अर्थव्यवस्था में एक लाख करोड़ डॉलर के योगदान की संभावना है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दायरे में बहुत सारी तकनीकें आती हैं जैसे कि मशीन लर्निंग, नैचुरल लैंग्वेज प्रॉसेसिंग, कंप्यूटर दृष्टि, ध्वनि प्रसंस्करण, रोबोटिक्स आदि। क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा एनालिटिक्स के साथ मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हजारों लोगों द्वारा किए जाने वाले काम को स्वचालित ढंग से पूरा कर सकती है। इतना ही नहीं, वह बहुत बड़े स्तर पर इन कामों को अंजाम दे सकती है, निजी स्तर पर एक-एक व्यक्ति तक पहुंच सकती है और यहां तक कि बहुत से मामलों में अग्रिम भविष्यवाणियां भी कर सकती है। कारोबार के नए अवसरों की तलाश करने, कर्ज लेने वालों के सुपात्र होने या न होने का आकलन करने, संभावित जालसाजी के बारे में सतर्क करने, निवेश के सही या गलत दिशा में जाने के बारे में अग्रिम या त्वरित सूचना देने, ग्राहकों की पहचान को प्रमाणित करने, धनशोधन की आशंका को रोकने और कामकाज के स्वचालन जैसे अनगिनत कामों में उसकी मदद मिल सकती है।
(लेखक माइक्रोसॉफ़्ट में ‘निदेशक-स्थानीय भाषाएं
और सुगम्यता’ के पद पर कार्यरत हैं)

Topics: फिनटेक एप्लीकेशनडिजिटल भुगतान प्रणालियां और स्टार्टअपआर्टिफिशियल इंटेलिजेंसतकनीकी विकासविदेशी बैंक
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