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आर्थिक संकट में फंसा ड्रैगन

चीन की अर्थव्यवस्था गहरे संकट का संकेत दे रही है। देश में बेरोजगारी सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई है। अमेरिकी निवेश प्रतिबंधों के कारण पूंजी जुटाना चीन के लिए समस्या है। ऐसे में मंत्रालयों और अधिकारियों-कर्मचारियों के वेतन घटाए जा रहे हैं। अब अर्थव्यवस्था में कोई और गिरावट जिनपिंग के लिए नई मुसीबतें खड़ी कर सकती है

Written byनम्रता हसीजानम्रता हसीजा
Aug 4, 2022, 12:12 pm IST
in विश्व
चीन के हेनान प्रांत में बैंक के सामने प्रदर्शन करते खातेदार

चीन के हेनान प्रांत में बैंक के सामने प्रदर्शन करते खातेदार

चीन में टैंकों का एक वीडियो वायरल हुआ जिसके बारे में सोशल मीडिया पर दावे किए गए कि उसमें चीनी सरकार द्वारा बैंकिंग घोटालों के विरुद्ध सड़क पर उतरे हेनान के प्रदर्शनकारियों का दमन दिखाया गया है। चीन के हेनान और अनहुई प्रांतों में ग्रामीण बैंकों के ग्राहक अप्रैल 2022 से अपने पैसे निकालने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। चीन के ग्रामीण बैंकों के प्रभारी वित्तीय समूह पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं।

बीती 18 जुलाई को चीन में टैंकों का एक वीडियो वायरल हुआ जिसके बारे में सोशल मीडिया पर दावे किए गए कि उसमें चीनी सरकार द्वारा बैंकिंग घोटालों के विरुद्ध सड़क पर उतरे हेनान के प्रदर्शनकारियों का दमन दिखाया गया है। चीन के हेनान और अनहुई प्रांतों में ग्रामीण बैंकों के ग्राहक अप्रैल 2022 से अपने पैसे निकालने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। चीन के ग्रामीण बैंकों के प्रभारी वित्तीय समूह पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। यह समूह औपचारिक बैंकिंग प्रणाली के बाहर एक प्रकार का बैंक है जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में अर्थव्यवस्था को सुविधाजनक बनाना है। यह भी पता चला है कि इस संकट के दौरान कुछ ग्राहकों के खातों से उनकी जीवन भर की बचत खत्म हो गई है। ऐसे बहुत से लोगों ने बैंकों के सामने प्रदर्शन कर अपने गुस्से का इजहार करते हुए समाधान और मुआवजे की मांग की है।

इस बात की अभी भी पुष्टि नहीं हुई है कि हेनान की सड़कों पर विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए वास्तव में टैंक तैनात किए गए थे या नहीं? लेकिन, एक बात की पुष्टि हो गई है कि बाहरी दुनिया और स्वयं अपने नागरिकों के सामने पेश किए जा रहे आंकड़ों के विपरीत चीनी अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है।

बेरोजगारी सर्वोच्च स्तर पर
वॉल स्ट्रीट जर्नल के 20 जून के अंक में बताया गया था कि 15 जून को जारी आधिकारिक चीनी आंकड़ों के अनुसार मई में युवा बेरोजगारी बढ़कर 18.4 प्रतिशत हो गई जो एक साल पहले 13.8 प्रतिशत थी। चीन ने 2018 में जब से आधिकारिक आंकड़े जारी करना शुरू किया है, तब से युवाओं की बेरोजगारी दर की यह दर सर्वाधिक है। चीन में कुल बेरोजगारी दर अप्रैल में 6.1 प्रतिशत से थोड़ा कम होकर मई में 5.9 प्रतिशत हो जाने के बाद भी अखबार ने कहा कि चीनी स्नातकों के लिए यह साल भी खराब रहने के आसार हैं। इस साल रिकॉर्ड 1.07 करोड़ स्नातकों के श्रम बाजार में प्रवेश करने की उम्मीद है और संभवत: जुलाई/अगस्त तक स्नातक बेरोजगारी की दर बढ़कर 23 प्रतिशत हो जाएगी।

रिक्रूटमेंट प्लेटफॉर्म झाओपिन लिमिटेड के अनुसार नौकरी की तलाश कर रहे स्नातकों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो गई थी और अप्रैल के मध्य तक आधे से भी कम लोगों को सेवा प्रस्ताव मिले थे। यह आंकड़ा एक साल पहले के 63 प्रतिशत से कम था। झाओपिन के मुताबिक जिन लोगों को अनुबंध मिले हैं, उनका भी औसत मासिक वेतन एक साल पहले की तुलना में 12 प्रतिशत घट कर 12,000 डॉलर प्रति वर्ष रह गया है। मानव-संसाधन सेवा फर्म 51जॉब इंक के अनुसार, पिछले साल ज्यादातर स्नातकों को शिक्षा, निर्माण और प्रौद्योगिकी उद्योगों में अवसर मिले थे। बीजिंग नॉर्मल यूनिवर्सिटी और टीएएल शिक्षा समूह के हालिया अनुमान के अनुसार, 2020 तक अकेले शिक्षा क्षेत्र ने एक करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार दिया था।

आर्थिक संकट के अन्य संकेतक
चीन की आर्थिक समस्याओं की गंभीरता के अन्य संकेतक भी हैं। वर्ष 2020 में घटाए गए अधिकांश मंत्रालयों के बजट अब तक पूरी तरह से सामान्य नहीं हुए हैं। अधिक समृद्ध पूर्वी प्रांतों में भी इस वर्ष कर्मचारियों को दिए गए बोनस का वापस वसूल लिया गया है और लगभग सभी प्रांतों में कर्मचारियों का वेतन घटा दिया गया है। इससे स्वाभाविक रूप से व्यापक असंतोष फैला है।

तियानमेन में भी जनता के विरुद्ध आए थे टैंक

चीन की कम्युनिस्ट सरकार द्वारा अपनी ही जनता के विरुद्ध टैंक तैनात करने की घटना कोई पहली बार नहीं हुई है। लगभग 33 वर्ष पूर्व 4 जून, 1989 को लोकतंत्र समर्थक हजारों छात्र कम्युनिस्ट पार्टी के उदारवादी नेता की मौत के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे थे। 3 और 4 जून के बीच की रात चीनी सेना ने प्रदर्शनकारियों पर टैंक चढ़ा दिए और फायरिंग कर दी। चीनवासी मानते हैं कि इसमें 3000 लोग मारे गए जबकि चीन सरकार 200 से 300 लोगों की मरने की बात मानती है। यूरोपीय मीडिया इस 10 हजार लोगों का नरसंहार मानती है। बाद में 2019 में चीन के रक्षा मंत्री जनरल वेई फंगरे ने तियानमेन चौक पर की गई कार्रवाई को सही बताया था।

शी के आगमन के बाद से आर्थिक नीति-निर्माण में राज्य परिषद् और प्रधानमंत्री ली केकियांग को पीछे कर दिया गया था, लेकिन समस्याओं की गंभीरता ने उन्हें और अधिक सक्रिय होने के लिए प्रेरित किया है। प्रधानमंत्री ली केकियांग ने गत 5 मई को कार्यकारी राज्य परिषद की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में ‘शून्य कोविड’ नीति के कारण कई शहरों और क्षेत्रों को प्रभावित करने वाले लॉकडाउन के कारण होने वाली कठिनाइयों पर चर्चा हुई। बाजार में स्थिर रोजगार सुनिश्चित करने के लिए छोटे, मध्यम और सूक्ष्म उद्यमों और व्यक्तिगत औद्योगिक और वाणिज्यिक परिवारों के लिए और राहत के उपायों पर चर्चा की गई।

बैठक में अर्थव्यवस्था और औद्योगिक आपूर्ति शृंखला को स्थिर करने में मदद के लिए विदेशी व्यापार की स्थिरता और गुणवत्ता को बढ़ावा देने के उपाय निर्धारित किए गए। बैठक में इस बात का खास तौर पर उल्लेख किया गया कि प्रासंगिक बाजार संस्थाओं की कठिनाइयों में काफी वृद्धि हुई है। इससे निपटने के लिए और कर छूट, कर कटौती और शुल्क में कटौती, रसद गारंटी, और उद्यमों के काम और उत्पादन को फिर से शुरू करने जैसे निर्णयों की एक शृंखला सामने आई है। इन निर्णयों में सभी क्षेत्रों को छोटे, मध्यम एवं सूक्ष्म उद्यमों और व्यक्तिगत औद्योगिक एवं वाणिज्यिक परिवारों को राहत के लिए विशेष धन की व्यवस्था करने तथा परिचालन कठिनाइयों से जूझ रहे लोगों के लिए किराए, गारंटी शुल्क, ऋण ब्याज तथा अन्य मदों में राजकोषीय सहायता (सब्सिडी) प्रदान करने के निर्देश शामिल हैं।

अमेरिकी प्रतिबंधों से संकट
बीजिंग डेली (13 जून) ने नेशनल स्कूल आफ डेवलपमेंट के मानद डीन, न्यू स्ट्रक्चरल इकोनॉमिक्स संस्थान के डीन और चीन की अर्थव्यवस्था और नई चुनौतियों पर केंद्रित दक्षिण-दक्षिण संस्थान के डीन जस्टिन यिफू लिन का एक लेख प्रकाशित किया था। ‘आर्थिक गतिविधियों में न्यूनतम अपेक्षित निश्चित विकास दर बनाए रखना-वर्तमान आर्थिक विकास की चुनौतियां और प्रतिपुष्टियां’ शीर्षक वाले इस लेख में कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन अपने पूर्ववर्ती ट्रम्प की चीन नीति को नहीं बदलेंगे और चीन को राजनीतिक रूप से अलग-थलग करने के लिए विभिन्न देशों की ‘राजनीतिक प्रणालियों, मूल्यों, विचारधाराओं आदि का सीमांकन करना और फिर इन देशों को चीन से आर्थिक रूप से अलग करने का प्रयास जारी रखेंगे।

इस दिशा में नवीनतम कार्रवाई के रूप में नाटो का एशियाई संस्करण बनाने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, भारत और आस्ट्रेलिया एकजुट हुए हैं। अमेरिकी नेतृत्व वाले नाटो ने जापान, दक्षिण कोरिया और अन्य पश्चिमी प्रशांत देशों को अपने शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है। बाइडेन ने वाशिंगटन में आसियान देशों का एक विशेष शिखर सम्मेलन भी आयोजित किया, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका को आसियान देशों के साथ एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर हस्ताक्षर करने और इन देशों को अपनी आपूर्ति शृंखलाएं चीन से हटाने के लिए मनाने की कोशिश की गई।

गत 3 जून तक चीन की सैन्य-औद्योगिक कंपनियों से सभी अमेरिकी नागरिकों और संस्थाओं द्वारा आवश्यक रूप से विनिवेश के संभावित परिणामों को सीमित करने के लिए बीजिंग ने सरकारी संसाधनों और पूंजी बाजार से धन जुटाया है। काली सूची में डाली गई इन कंपनियों में शामिल आर्टिफिशियल इन्टेलिजेंस सॉल्यूशन प्रदाता क्लाउडवॉक टेक्नोलॉजी ने इसकी शुरुआत करते हुए पिछले हफ्ते शंघाई स्टाक मार्केट में प्रवेश किया और घरेलू निवेशकों को नए शेयर जारी करते हुए 1.72 बिलियन युआन (258 मिलियन डॉलर) जुटाए। फोरेंसिक डेटा जांच और आॅनलाइन सेंसरशिप प्रौद्योगिकी प्रदान करने वाली फुजिÞयान स्थित कंपनी जिÞयामेन मीया पिको इन्फॉर्मेशन ने मार्च में एक निजी शेयर प्लेसमेंट के माध्यम से 760 मिलियन युआन तक जुटाने की योजना की घोषणा की है। ये शेयर पूरी तरह से कम्पनी के शीर्ष शेयरधारक एसडीआईसी इंटेलिजेंट टेक्नोलॉजी के पास जाएंगे जो बीजिंग की रणनीतिक निवेश शाखा स्टेट डेवलपमेंट एंड इन्वेस्टमेंट कॉर्प का हिस्सा है।

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के लिए लोगों से किए गए आर्थिक स्थिति में लगातार सुधार के वादे को मुश्किल होगा। लोगों के बीच असंतोष के व्यापक रूप से फैले होने के बीच कोई भी स्पष्ट आर्थिक संकट गहरे असंतोष को जन्म दे सकता है। पोस्ट किए गए वीडियो की तरह एक छोटी सी चिनगारी का परिणाम यह हुआ कि चीनी नेटिजन्स ने इसे बार-बार साझा किया। कई लोगों ने इस वीडियो को 1989 में तियानमेन चौक नरसंहार जैसी घटना बताया है जिसमें चीनी सरकार ने नागरिकों को चुप कराने के लिए टैंक और अन्य घातक हथियारों का उपयोग किया था।

निवेश प्रतिबंधों की शुरुआत नवंबर 2019 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सैन्य कार्यों से संबंध रखने वाली 31 चीनी कंपनियों में अमेरिकियों के निवेश पर रोक लगा कर की थी। बाद में राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 3 जून, 2021 को इसमें संशोधन किया था और इस निर्णय को पूरी तरह से लागू करने की समय सीमा को एक साल बढ़ाते हुए सूची में शामिल कम्पनियों की संख्या बढ़ाकर 59 कर दी थी। बाद में इसमें नौ और कंपनियां जोड़ी गईं और रोस्टर 68 कंपनियों का हो गया।

इस सूची में शामिल शंघाई, शेनझेन या हांगकांग की ज्यादातर कंपनियों के शेयरों का सार्वजनिक कारोबार होता है और कुछ कंपनियां यूरोप में भी सूचीबद्ध हैं। इनमें से अधिकांश सैन्य इंजीनियरिंग, नेविगेशन, अंतरिक्ष, विमानन, रॉकेट और उपग्रह प्रौद्योगिकियों से संबंधित हैं। ये सभी विशिष्ट सरकारी बड़ी कंपनियां हैं जो सीधे बीजिंग द्वारा नियंत्रित होती हैं। निशाने पर रखे गए देश के तीन मुख्य नेटवर्क आॅपरेटरों -चाइना टेलीकॉम, चाइना यूनिकॉम, और चाइना मोबाइल-के साथ तेल और गैस समूह सीएनओओसी तथा इनकी असूचीबद्ध मूल कंपनियों ने अपनी प्राथमिक सूचीबद्धता हांगकांग में रखते हुए अपने शेयरों को शंघाई स्टॉक एक्सचेंज में फिर से सूचीबद्ध कराया है।

वेतन और बोनस पर अंकुश
फाइनेंशियल टाइम्स के 1 जून के अंक में बताया गया था कि चीनी प्रतिभूति नियामकों और उद्योग संघों ने स्थानीय तथा विदेशी बैंकों को अपने कार्यकारियों के वेतन स्तर पर लगाम लगाने के निर्देश दिए हैं। गत 27 मई को चीन के एसेट मैनेजमेंट एसोसिएशन (एएमएसी) ने फंड हाउसों को ‘सामाजिक उत्तरदायित्व तथा अर्थव्यवस्था और देश की रणनीतियों की सेवा करने की क्षमता बढ़ाने’ का निर्देश दिया था। एएमएसी के नए नियमों के अनुसार वरिष्ठ कर्मचारियों को बोनस भुगतान का कम से कम 40 प्रतिशत तीन या अधिक वर्षों के लिए टाल दिया जाना चाहिए।

एसोसिएशन ने यह भी आदेश दिया कि वरिष्ठ कर्मचारियों को अपने बोनस का कम से कम 20 प्रतिशत अपनी कंपनियों द्वारा जारी वित्तीय उत्पादों में निवेश करना चाहिए। इसमें कहा गया है कि इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य अधिकारियों द्वारा अल्पकालिक बोनस भुगतान के रास्तों की तलाश से उपजे ‘जोखिमपूर्ण व्यवहार और संभावित जोखिमों’ को नियंत्रित करना है। सिक्योरिटीज एसोसिएशन आफ चाइना ने भी पिछले महीने इसी तरह के दिशानिर्देश जारी किए थे। चीन के प्रतिभूति नियामक के बीजिंग कार्यालय द्वारा जनवरी में सीआईसीसी, साइटिक, क्रेडिट सुइसे, गोल्डमैन सैक्स और यूबीएस आदि वित्तीय संस्थानों के साथ वेतन प्रतिबंध के बारे में हुई बैठक के महीनों बाद नए दिशानिर्देशों को अंतिम रूप दिया गया है।

घरेलू और विदेशी बैंकों को भी हाल ही में एएमएसी और एसएसी द्वारा जारी किए गए नए वेतन नियमों के बारे में जानकारी दी गई। साइटिक, सीआईसीसी और यूबीएस ने इस पर टिप्पणी के अनुरोधों का तुरंत जवाब नहीं दिया जबकि क्रेडिट सुइसे और गोल्डमैन सैक्स ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। सबसे पहले ब्लूमबर्ग द्वारा प्रकाशित वित्तीय उद्योग के प्रतिनिधियों को नियामकों के निर्देशों को इस क्षेत्र को बाधित करने के लिए शी प्रशासन के नवीनतम प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है। चीन के सभी 31 प्रांतों और एआर में वेतन कटौती और बोनस की निकासी पर रोक लागू की जा रही है।

नींव अभी मजबूत नहीं
चीनी प्रधानमंत्री ली केकियांग ने गत 27 जून को एक कार्यक्रम में अप्रत्यक्ष रूप से संकट को स्वीकार करते हुए कहा भी था कि ‘महामारी और प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव के कारण विकट परिस्थितियों में फंसी आबादी में वृद्धि हुई है।’ उन्होंने अधिकारियों से ‘उन लोगों का समयबद्ध तरीके से पता लगाने को कहा जिनकी नौकरी चली गई है या जिन्हें कम आय वाले समूहों के लिए बने कार्यक्रमों में शामिल करने की आवश्यकता है और जो अस्थायी संकट में हैं ताकि नैतिक बल को तोड़ने वाली घटनाएं रोकी जा सकें।’ ली केकियांग ने यह भी कहा कि वर्तमान अर्थव्यवस्था कुछ हद तक सुधरी है, लेकिन ‘नींव अभी भी मजबूत नहीं है।’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि,‘बेरोजगारी दर को जल्द से जल्द नियंत्रित कर नीचे लाया जाना चाहिए।’

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के लिए लोगों से किए गए आर्थिक स्थिति में लगातार सुधार के वादे को मुश्किल होगा। लोगों के बीच असंतोष के व्यापक रूप से फैले होने के बीच कोई भी स्पष्ट आर्थिक संकट गहरे असंतोष को जन्म दे सकता है। पोस्ट किए गए वीडियो की तरह एक छोटी सी चिनगारी का परिणाम यह हुआ कि चीनी नेटिजन्स ने इसे बार-बार साझा किया। कई लोगों ने इस वीडियो को 1989 में तियानमेन चौक नरसंहार जैसी घटना बताया है जिसमें चीनी सरकार ने नागरिकों को चुप कराने के लिए टैंक और अन्य घातक हथियारों का उपयोग किया था।

शी और केंद्रीय आर्थिक कार्य सम्मेलन द्वारा स्थिरता बनाए रखने पर बार-बार जोर देना उनकी गंभीर चिंता का संकेत है। यूक्रेन संकट ने इन चिंताओं को और बढ़ा दिया है, खासकर इसलिए कि वह अनाज, सोयाबीन और हाई-टेक आयात का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। चीनी अर्थव्यवस्था और शी जिनपिंग के लिए और मुश्किल समय आने वाला है!
(लेखिका सेंटर फॉर चाइना एनालिसिस एंड स्ट्रैटेजी में रिसर्च फेलो हैं)

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