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होम भारत

देश की आवश्यकता है अग्निपथ

Country needs Agneepath

Written byराज्यवर्धन सिंह राठौड़राज्यवर्धन सिंह राठौड़
Jul 2, 2022, 08:00 am IST
inभारत

अग्निपथ योजना से भारतीय सेना आधुनिकतम और विश्व में सर्वश्रेष्ठ बनेगी। चार वर्ष की सेवा के बाद जब ये युवा वहां से निकलकर आएंगे तो समाज को दक्ष, अनुशासित और प्रेरित मानव संसाधन मिलेगा

भारतीय सेना के आधुनिकीकरण व सुधार की क्रांतिकारी योजना ‘अग्निपथ’ भारत की वर्तमान परिस्थितियों और आवश्यकता को देखते हुए जरूरी थी। सामरिक क्षेत्र की वैश्विक चुनौतियां बदल चुकी हैं। ऐसे में भारत की सामरिक क्षमताओं को आवश्यकतानुरूप बनाने के लिए यह योजना लाई गई है। सेना की आवश्यकताओं पर लंबे मंथन और सेना की अनुशंसा के बाद शुरू यह योजना सेना के आधुनिकीकरण के साथ सीमा पर युवा एवं उपयुक्त सैनिकों की उपलब्धता निश्चित करके भारतीय सेना की क्षमताओं में अभूतपूर्व वृद्धि करेगी।

सत्ता संभालने के बाद नरेंद्र मोदी सरकार की प्राथमिकता में रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा शीर्ष पर रही है। बीते 8 वर्षों में सशस्त्र बलों को अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित कर आधुनिक युद्धक बल के रूप में विकसित करने के लिए बड़े सार्थक कदम उठाए गए हैं। इसी कड़ी में क्रांतिकारी योजना अग्निपथ भारत के स्वर्णिम कल को साकार करेगी। युवा और तकनीकयुक्त सैन्य बल के निर्माण को लक्षित अग्निपथ योजना देश के युवाओं के लिए सुनहरा अवसर सिद्ध होगी। समाज की युवा प्रतिभाएं, जो समकालीन तकनीकी प्रवृत्तियों से अवगत हैं, अग्निपथ योजना के अंतर्गत अग्निवीर के रूप में सेना का भाग बनने को आकर्षित होंगी। इससे भारतीय सेना आधुनिकतम और विश्व में सर्वश्रेष्ठ तो बनेगी ही, चार वर्ष की सेवा के बाद जब ये युवा वहां से निकलकर आएंगे तो समाज को दक्ष, अनुशासित और प्रेरित मानव संसाधन मिलेगा।

मोदी सरकार की यह योजना युवा, देशभक्त, शारीरिक रूप से स्वस्थ और उत्साह से पूर्ण युवाओं को सेना का गौरव धारण करने और अल्पावधि के लिए सेवा का नियमित अवसर देने वाली है। लंबे समय से इसकी जरूरत महसूस की जा रही थी कि सेना को और अधिक युवा, छरहरा व स्वस्थ बनाना चाहिए। यह उद्देश्य तभी पूरा हो सकता है जब सेना में युवा शक्ति की नियमित भागीदारी सुनिश्चित की जाए और अल्पावधि की सैन्य सेवा वाले सैनिकों की संख्या अधिक हो। अग्निपथ योजना इस लक्ष्य को पूरा करने में सक्षम होगी और युवा सैनिकों की निरंतर भर्ती का मार्ग प्रशस्त करेगी। सेना के तीनों अंगों थल सेना, वायु सेना और नौसेना में अखिल भारतीय सभी वर्ग (एआईएसी) आधार पर यह भर्ती औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों आदि मान्यता प्राप्त तकनीकी संस्थानों के माध्यम से केंद्रीकृत आॅनलाइन प्रणाली के साथ-साथ विशेष भर्ती रैलियों और परिसर साक्षात्कार के माध्यम से की जाएगी। भर्ती में स्वास्थ्य पात्रता व कठिन प्रशिक्षण मानकों का पूरा पालन किया जाएगा।

चार वर्ष की सैन्य सेवा के पश्चात नागरिक समाज में लौटने वाले युवा आत्म-अनुशासन, परिश्रम और ध्यान की गहरी समझ के साथ राष्ट्र निर्माण की थाती सिद्ध होंगे। अल्पकालिक सैन्य सेवा का भाग बढ़ाने का बड़ा लाभ यह भी है कि देशभक्ति की भावना, टीम वर्क, शारीरिक उपयुक्तता में वृद्धि, देश के प्रति निष्ठा और बाहरी व आंतरिक खतरों और प्राकृतिक आपदाओं के समय राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होंगे।

अग्निवीरों के सामने अवसरों के अंबार
सैन्य सेवा से मुक्त होने पर अग्निवीरों के हाथ में आयकर मुक्त ऐसी राशि होगी, जिससे वे अपने भविष्य के सपनों को पूरा कर सकेंगे। इन्हें नियमित सैनिकों के समान ही सम्मान मिलेगा। सैन्य सेवा से मुक्त होने के बाद जब ये अग्निवीर नागरिक जीवन में लौटकर आएंगे तो उनके पास विशेष योग्यता प्रमाणपत्र होगा। इन युवाओं के वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था के साथ समाज में सम्मिलन व आजीविका का प्रयास तो किया ही जाएगा, उच्च शिक्षा के इच्छुक अग्निवीरों की सहायता भी की जाएगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय एवं कई राज्य सरकारों ने सैन्य सेवा से मुक्त होने वाले युवाओं को सशस्त्र बलों में नियुक्ति में दस प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की है। यह आरक्षण पूर्व सैनिकों के लिए पहले से चले आ रहे आरक्षण के अतिरिक्त होगा।

‘अग्निवीरों की भर्ती में बदलाव नहीं’

सेना ने साफ कहा है कि उसके लिए देश सर्वोपरि है। अग्निवीरों की भर्ती में कोई बदलाव नहीं होगा। सैन्य मामलों के विभाग के अतिरिक्त सचिव ले. जन. अनिल पुरी ने कहा कि कुछ लोगों ने अफवाह फैलाई कि सेना के पुराने जवानों को अग्निवीर योजना के अंतर्गत भेजा जाएगा, जो पूरी तरह फर्जी सूचना है। रेजीमेंटल प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। सेना में काम करना देशभक्ति और जुनून का काम है। युवा देशभक्ति का अवसर हाथ से जाने न दे। यदि अग्निवीर युद्ध लड़ेगा तो उसे परमवीर चक्र भी मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अभ्यर्थियों को एक शपथ देना होगा कि वे किसी भी तरह की हिंसा में शामिल नहीं थे। एयर मार्शल एस.के. झा ने कहा कि वायुसेना में हर भर्ती अब ‘अग्निवीर वायु’ के माध्यम से होगी। वहीं, वाइस एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने कहा कि 4 साल के प्रशिक्षण के बाद अग्निवीर सीधे तौर पर मर्चेंट नेवी में भर्ती हो सकेंगे।

देश के कॉरपोरेट क्षेत्र ने इस योजना को समय की मांग बताते हुए इसका स्वागत किया है और नागरिक जीवन में लौटने वाले अग्निवीरों को अपनी कंपनियों में नौकरियां देने की घोषणा की है। अब तक चल रही व्यवस्था में सेना से सेवानिवृत्ति के लिए न्यूनतम 15 वर्ष की सेवा अनिवार्य थी। इस सेवा को पूरा करते-करते सैनिक 35 वर्ष की आयु से ऊपर पहुंच जाते थे, जिससे वे कॉरपोरेट क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप फिट नहीं बैठते थे। अब 25 वर्ष की आयु में सैन्य सेवा से निवृत्त होकर कॉरपोरेट क्षेत्र के लिए अच्छे मानवसंसाधन सिद्ध होंगे। बैंकों और वित्त संस्थानों ने भी अग्निवीरों का सस्ते दर पर वित्त पोषण कर उन्हें उद्यमी बनाने का निर्णय किया है।

वैश्विक रुझान के अनुरूप है योजना
आज विश्व की सभी प्रमुख सेनाएं सुधार की ओर अग्रसर हैं। सैन्य क्षेत्र में वैश्विक रुझान सैन्य कर्मियों की संख्या बढ़ाने के बजाय सेना के लिए अत्याधुनिक अस्त्र-शस्त्र पर पूंजीगत व्यय बढ़ाने पर है। चीन तो 1980 से इस पर काम कर रहा है। उसने सेना में सैनिकों की संख्या 45 लाख से घटाकर 20 लाख कर दी है। सैनिकों की संख्या घटाने के साथ तकनीक व प्रौद्योगिकी व्यय कर सेना का आधुनिकीकरण कर रहा है। अच्छी बात यह है कि मोदी सरकार चीन से तेज गति से सेना के लिए आवश्यक अस्त्र-शस्त्र व उपकरणों पर व्यय कर सेना का आधुनिकीकरण कर रही है।
आज के डिजिटल युग में युद्ध कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस), स्वचालित प्रणालियों, दूर से संचालित होने वाले शस्त्रों, साइबर स्पेस, अंतरिक्ष आधारित गुप्त चौकसी व टोह आदि माध्यम से लड़े जाते हैं। युवा व तकनीक से भिज्ञ अग्निवीरों की भर्ती से भारतीय सेना की यह आवश्यकता पूरी होगी। साथ ही इससे सैनिकों की औसत आयु 4-5 वर्ष तक कम होगी और युवाशक्ति से पूर्ण सेना तैयार करने का लक्ष्य पूरा होगा। विश्व की आधुनिक सशस्त्र सेनाओं में सक्रिय सैन्य सेवा की औसत 2 से 8 वर्ष तक है। विश्व की उत्कृष्ट सेना कही जाने वाली इज्राएल की सेना में पुरुष सैनिकों की औसत सैन्य सेवा मात्र 30 माह और महिला सैनिकों की औसत सैन्य सेवा मात्र 22 माह होती है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस में भी सैनिकों की औसत सेवा एक से दस वर्ष तक ही होती है। इस योजना की आलोचना करने वाले वैश्विक सामरिक रुझान और आवश्यकता की उपेक्षा कर भारतीय सेना के बहुप्रतीक्षित सुधार में बाधा पहुंचाकर इसे दुर्बल करना चाहते हैं।

रक्षा प्रणाली को उत्कृष्ट बनाने के प्रयास
अग्निपथ योजना भारतीय सेना का स्वरूप परिवर्तित कर विश्व की आधुनिकतम और युवाशक्ति से पूरित सर्वश्रेष्ठ सेना बनाना है। अग्निवीरों को जो प्रशिक्षण दिया जाएगा, वह विश्व स्तरीय सशस्त्र बल को दिए जाने वाले प्रशिक्षण के अनुसार होगा। यह योजना देश की रक्षा प्रणाली को अभेद्य व उत्कृष्ट बनाने की मोदी सरकार के इन प्रयासों की एक कड़ी है। यह योजना सशस्त्र बलों के युवा प्रोफाइल को बढ़ाएगा और ‘उत्साह’ और ‘भावना’ का नया संसाधन प्रदान करेगा और तकनीकी रूप से दक्ष सशस्त्र बलों की दशा और दिशा में आमूलचूल परिवर्तन लाएगा।

चार वर्ष की सैन्य सेवा के पश्चात नागरिक समाज में लौटने वाले युवा आत्म-अनुशासन, परिश्रम और ध्यान की गहरी समझ के साथ राष्ट्र निर्माण की थाती सिद्ध होंगे। अल्पकालिक सैन्य सेवा का भाग बढ़ाने का बड़ा लाभ यह भी है कि देशभक्ति की भावना, टीम वर्क, शारीरिक उपयुक्तता में वृद्धि, देश के प्रति निष्ठा और बाहरी व आंतरिक खतरों और प्राकृतिक आपदाओं के समय राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होंगे। अत: इस स्वागत योग्य योजना पर युवाओं और जनता को प्रेरित किया जाना चाहिए।

लेखक-पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता, भारतीय जनता पार्टी

 

Topics: भारतीय सेनाअग्निपथ योजनाक्रांतिकारी योजनाCountry needsAgneepath
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