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विहिप अपनी स्थापना के 60वें वर्ष में एक करोड़ सदस्य बनाएगी

2024 में विश्व हिंदू परिषद की स्थापना के 60 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस अवसर पर विहिप ने एक करोड़ सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा है। यह निर्णय तमिलनाडु के कांचीपुरम में विश्व हिंदू परिषद की दो दिवसीय केंद्रीय प्रबंध समिति की बैठक लिया गया।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jun 28, 2022, 03:30 pm IST
in भारत, तमिलनाडु
प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

विश्व हिंदू परिषद ने 27 जून को मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण, मंदिरों को तोड़े जाने, कन्वर्जन, हिंदू मान्यताओं और देवी-देवताओं के प्रति भड़काने वाली बातें बढ़ने जैसे मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए इन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। तमिलनाडु के कांचीपुरम में दो दिवसीय केंद्रीय प्रबंध समिति की बैठक के बाद चेन्नई में मीडिया को संबोधित करते हुए विहिप के संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन ने कहा कि सभी राज्य सरकारों को कन्वर्जन और लव जिहाद पर प्रभावी रोक लगाने के लिए कानून बनाना चाहिए। 2024 में स्थापना के 60 वर्ष पूरे होने पर कार्य योजना की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि परिषद एक करोड़ से अधिक सदस्य जोड़ेगी और 15,00,000 कार्यकर्ताओं के साथ इसकी इकाइयों की संख्या 1,00,000 तक पहुंचाई जाएगी।
डॉ सुरेंद्र जैन ने कहा कि समूचे हिंदू समुदाय को तमिलनाडु पर गर्व है, जहां हजारों वर्षों से हिंदू धर्म ध्वजा फहरा रही है। तमिलनाडु पूज्य श्री तिरुवल्लुवर, पूज्य श्री रामानुजाचार्य, पूज्य श्री वल्लालार जैसे गुरुओं और संतों की पावन स्थली रही है। उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास में तमिलनाडु हिंदू जागरण के क्षेत्र में सदैव अग्रणी रहा है। केंद्रीय प्रबंध समिति की बैठक पुरातन पावन नगरी कांचीपुरम में 26 जून को संपन्न हुई। विहिप को विश्वास है कि यह बैठक हिंदू समाज को सक्षम और समरसतापूर्ण बनाने में मील का पत्थर सिद्ध होगी।

कन्वर्जन और लव जिहाद विरोधी कानून:

विश्व हिंदू परिषद का विचार है कि कन्वर्जन मानवता के प्रति सबसे बड़ा अपराध और हिंसा है। बहुत से मुल्ला, मौलवी और ईसाई मिशनरी अपना मजहबी कर्तव्य मान कर तमाम असंवैधानिक और अनैतिक तौर-तरीके अपना कर यह आपराधिक कृत्य करने में लगी है। स्वतंत्रता के बाद से समाज के विभिन्न घटकों की ओर से इस आपराधिक कृत्य पर रोक की मांग उठती रही है। विहिप उन राज्यों का स्वागत करती है, जिन्होंने अवैध कन्वर्जन पर रोक लगाने के लिए कानून बनाए हैं।
राज्य सरकार की असंवेदनशीलता के कारण तमिलनाडु में ईसाई मिशनरी द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों में हिंदुओं को अवैध रूप से ईसाई बनाने का काम किया जा रहा है और इसके प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे ही एक प्रकरण में तंजावुर जिले में एक मासूम हिंदू बेटी लावण्या की जान चली गई। ऐसे बहुत से मामले हैं, जिनमें इस्लामिक कट्टरपंथी लव जिहाद के नाम पर हिंदू बेटियों को निशाना बना रहे हैं। बाद में हिंदू बेटियों को यौनाचार के लिए विवश किया जाता है। रामनाथपुरम और मेलूर- मदुरै में ऐसी कई बेटियों को आत्महत्या तक करनी पड़ी है। ऐसी गतिविधियों में लिप्त अपराधियों को कड़ी सजा देकर तमिलनाडु सरकार को इन कुकृत्यों पर तत्काल रोक लगानी चाहिए, ताकि हिंदू समाज पर हो रहे इस तरह के अत्याचारों पर अंकुश लग सके।
विश्व हिंदू परिषद की केंद्रीय प्रबंध समिति की मांग है कि अवैध कन्वर्जन और लव जिहाद पर रोक लगाने के लिए तमिलनाडु सरकार भी एक कड़ा कन्वर्जन विरोधी कानून बनाए।

इस्लामिक कट्टरवाद की हिंसा और आतंकवाद:

पूरा देश इस्लामिक कट्टरवाद के कारण हो रही हिंसा से त्रस्त है। सीएए, कोरोना, हिजाब और नूपुर विवाद के नाम पर वे देश को उन्मादी हिंसा की आग में झुलसाने के प्रयास कर रहे हैं। इस्लामिक कट्टरपंथी आतंकवाद को भी बढ़ावा दे रहे हैं। दुर्भाग्य से तमिलनाडु जिहादी आतंकवादियों की भर्ती का केंद्र बन गया है। हाल के महीनों में एनआईए ने बहुत से इस्लामी आतंकवादियों को गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला है कि इन आतंकवादियों की वित्तीय और दूसरी सभी तरह की सहायता के तार तमिलनाडु में मौजूद स्लीपर सेल से जुड़े हैं। लगता है कि ऐसे तत्वों के मामले में राज्य सरकार की एजेंसियां ढिलाई बरत रही हैं। राज्य पुलिस की अकर्मण्यता तमिलनाडु में इस्लामिक कट्टरपंथी समूहों को बढ़ावा दे रही है, जो मासूमों के प्रति हिंसा में लिप्त हैं।
तमिलनाडु में 1985 से लेकर, ऐसे इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा अब तक हिंदुओं के 100 से अधिक सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्या की जा चुकी है। विश्व हिंदू परिषद का आग्रह है कि ऐसे तत्वों के साथ कड़ाई से निपटा जाए, ताकि इस्लामिक कट्टरवाद के नाम पर होने वाले खून-खराबे पर रोक लगाई जा सके।

हिंदू मंदिर सरकारी नियंत्रण से मुक्त हों और मंदिरों का ध्वंस बंद हो:

हमारे मठ-मंदिर और तीर्थस्थल न केवल पूजा-अर्चना के स्थान हैं, बल्कि हिंदू सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं के पोषक हैं। ये स्थान अभावग्रस्त, निर्धन, दरिद्र लोगों की सेवा भी करते हैं। हिंदू समाज अपने सभी धार्मिक स्थलों का प्रबंधन सफलतापूर्वक करता रहा है। दुर्भाग्य से हमारे धार्मिक स्थलों की धन-संपदा और देव-निधि को लूटने के लिए अंग्रेजों ने उनका प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया था। स्वतंत्रता के बाद भी राज्य सरकारों ने यही औपनिवेशिक मानसिकता अपनाई। हिंदू समाज का सदैव से मत है कि हिंदू मंदिर सरकारी नियंत्रण से मुक्त होने चाहिए। हम उन राज्य सरकारों की प्रसंशा करते हैं, जिन्होंने हिंदू धार्मिक स्थानों का प्रबंधन हिंदू समाज के हाथों में सौंपने का निर्णय कर लिया है। विहिप की मांग है कि तमिलनाडु सहित शेष राज्य सरकारें हिंदू मंदिरों को मुक्त करें। हम हिंदू समाज से अपील करते हैं कि वह अपनी शक्ति को पहचाने और जाति और लिंगभेद भूलकर पुजारियों और श्रद्धालुओं की समितियां बना कर अपने मंदिरों की व्यवस्था प्रभावशाली और पारदर्शी ढंग से चलाने के लिए तैयार रहे।
अतिक्रमण और अवैध निर्माण के नाम पर तमिलनाडु सरकार भेदभावपूर्ण तरीके से हिंदू मंदिरों को ढहा रही है। पिछले 13 महीने में 20 से अधिक मंदिर ध्वस्त किए जा चुके हैं। ऐसी कार्रवाई किसी मस्जिद या चर्च में नहीं की गई। विहिप की मांग है कि यदि मंदिर को तोड़ना कानून के अंतर्गत आवश्यक हो, तो उसे समय रहते स्थानीय मंदिर समिति और हिंदू संगठनों के साथ विचार-विमर्श कर दूसरे स्थान पर स्थापित किया जाना चाहिए। बिल्कुल उसी तरह जैसे अतिक्रमण वाले क्षेत्रों के निवासियों को दूसरे स्थान पर विस्थापित किया जाता है, ताकि हिंदू देवी-देवताओं (सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार जागृत अस्तित्व) का सम्मान बना रहे और हिंदू समाज भी दुखी और आक्रोशित न हो।

हिंदू मान्यताओं, देवी-देवताओं के प्रति हेट स्पीच पर कड़ी कार्रवाई हो:

विश्व हिंदू परिषद सदैव अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में है। किंतु हमारा संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी को दूसरों की आस्था के अपमान की अनुमति नहीं देता। दुर्भाग्य से हिंदू मान्यताओं और देवी-देवताओं के प्रति हेट स्पीच देने वाले अपराधियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं होती, जिससे हिंदू समाज आक्रोशित है। देशभर में गैर-हिंदू आस्थाओं और नेताओं को अपमानित करने वाले बयान देने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है, किंतु हिंदू देवी-देवताओं और आस्था का अपमान करने वाले अपराधियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। हाल ही में पवित्र शिवलिंग या पवित्र चिदंबरमनटराज के लिए तमाम तरह के आपत्तिजनक वक्तव्य दिए गए, किंतु कई हिंदू संगठनों की शिकायतों के बाद भी तमिलनाडु में किसी कानूनी एजेंसी ने कार्रवाई नहीं की।
सभी राज्य सरकारों से विहिप की अपील है कि हिंदू समाज की संवेदनाओं के प्रति अमर्यादित व्यवहार नहीं किया जाए। यदि राज्य सरकारें मूकदर्शक बनी रहेंगी, तो विहिप उन्हें चेतावनी देती है कि हिंदू समाज अपने गौरव की रक्षा के लिए स्वयं उठ खड़ा होगा।
विहिप की उत्तर तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष श्री सु. श्रीनिवासन, राष्ट्रीय संयुक्त सचिव एवं प्रचार प्रमुख श्री विजय शंकर तिवारी और उत्तर तमिलनाडु के प्रचार प्रमुख श्री कार्तिकेयन रामलिंगम भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित थे।

Topics: हिंदूविश्वपरिषदएककरोड़सदस्य
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