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होम भारत उत्तर प्रदेश

मशरूम ने खोली कमाई की राह

किसान एक साल में मशरूम की 6 फसलें काट सकते हैं। इससे तीन गुना कमाई आसानी से हो सकती है

Written byसुनील रायसुनील राय
May 17, 2022, 11:27 am IST
inउत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के देवरिया में मशरूम की खेती को बढ़ावा दे रहे हैं स्वतंत्र सिंह

उत्तर प्रदेश के देवरिया में मशरूम की खेती को बढ़ावा दे रहे हैं स्वतंत्र सिंह

किसान एक साल में मशरूम की 6 फसलें काट सकते हैं। इससे तीन गुना कमाई आसानी से हो सकती है। जरूरत है इसके लिए बाजार तैयार करने की। साथ ही, मशरूम की खेती में पराली का प्रयोग बढ़ने से किसानों को फायदा होगा

उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद के स्वतंत्र सिंह ने प्रयोग के तौर पर एक कमरे के अंदर आयस्टर मशरूम की खेती शुरू की। शुरुआत में उन्होंने 1,000 रुपये लगाए और मात्र दो महीने में ही उन्हें मशरूम से 2700 रुपये की कमाई हुई। यानी दो महीने में स्वतंत्र सिंह को 1700 रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। कम समय में ही जो परिणाम सामने आया, इससे वे उत्साहित हुए। उन्होंने गणित लगाया कि साल भर में मशरूम की 6 फसलें ली जा सकती हैं, फिर क्या था, उन्होंने मशरूम उत्पादन का दायरा बढ़ाया। आज वे बड़े पैमाने पर आयस्टर मशरूम की खेती कर रहे हैं। खास बात यह है कि इससे वे लागत का तीन गुना मुनाफा कमाते हैं।

आयस्टर मशरूम प्राकृतिक तरीके से उगाया जाता है। इसके अलावा, दूसरी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे गेहूं के भूसे पर उगाया जाता है। स्वतंत्र सिंह कहते हैं कि यदि आयस्टर मशरूम की खेती को बढ़ावा दिया जाए

स्वतंत्र सिंह कहते हैं, ‘‘किसानों की आय को दोगुना करने की बात पर लोग भले ही आश्चर्य करें, लेकिन मेरा दावा है कि आयस्टर मशरूम की खेती से किसानों का आय तीन गुना हो सकती है। बस जरूरत है तो इसके लिए बाजार उपलब्ध कराने की। अभी मुझे इसे बाजार में बेचने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। बड़े और आधुनिक शहर जहां लोग जागरूक हैं, वहां पर लोगों को आयस्टर मशरूम की पौष्टिकता के बारे में मालूम है। इसलिए ऐसी जगहों पर तो मशरूम बेचने में कोई दिक्कत नहीं होती, लेकिन देवरिया जैसे जिले में मशरूम बेचना टेढ़ी खीर है।’’

वे कहते हैं कि मिड डे मील में सप्ताह में एक दिन मशरूम की सब्जी बनाने का आदेश है, लेकिन अधिकांश जगहों पर इसका पालन नहीं हो रहा। यदि मिड डे मील में मशरूम बनने लगे तो मशरूम उत्पादकों की परेशानी ही खत्म हो जाएगी। उनका कहना है कि जब उन्होंने बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन शुरू किया तो बाजार की समस्या आई, क्योंकि राज्य के पूर्वी इलाके में मशरूम का बाजार ही विकसित नहीं हुआ है। लिहाजा वे देवरिया के मुख्य विकास अधिकारी से मिले और उन्हें आयस्टर मशरूम के बारे में बताया। इसकी पौष्टिकता और महत्व को देखते हुए अधिकारी ने मिड डे मील में मशरूम की सब्जी बनवाने का आदेश दिया। पुलिस लाइन में भी मशरूम की सब्जी बनने लगी। अब देवरिया और इसके आसपास के इलाके में मशरूम का पकौड़ा और प्रसंस्कृत मशरूम का अचार बनाकर बेचा जा रहा है।

सामान्य मशरूम और आयस्टर मशरूम में बहुत अंतर है। सामान्य मशरूम की खेती में रसायन का प्रयोग होता है, जबकि आयस्टर मशरूम प्राकृतिक तरीके से उगाया जाता है। इसके अलावा, दूसरी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे गेहूं के भूसे पर उगाया जाता है। स्वतंत्र सिंह कहते हैं कि यदि आयस्टर मशरूम की खेती को बढ़ावा दिया जाए तो इसमें पराली का अधिक से अधिक प्रयोग होगा। किसान भी खेतों में पराली जलाने से बचेंगे और पराली जलाने से पर्यावरण को जो नुकसान होता है, उससे भी बचा जा सकेगा। पराली जलाने से रोकने के लिए सरकार को जो विज्ञापन देना पड़ रहा है, उसका खर्च भी बचेगा।

Topics: मशरूम की खेतीसामान्य मशरूमआयस्टर मशरूम
सुनील राय
सुनील राय
पाञ्चजन्य ब्यूरो चीफ, लखनऊ, उत्तर प्रदेश [Read more]
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