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अब हरियाणा में बच्चे सरकारी स्कूल में हिंदी और अंग्रेजी में से किसी को भी चुन सकते

सरकार ने निजी स्कूलों में फीस से जुड़ा नया कानून लागू किया है। अब निजी स्कूल संचालक न तो अपनी मर्जी से फीस बढ़ा सकेंगे और न ही विद्यार्थियों को वर्दियां और स्टेशनरी आदि खरीदने के लिए बाध्य कर सकेंगे।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Apr 14, 2022, 04:33 pm IST
in हरियाणा
मनोहर लाल खट्टर, मुख्यमंत्री, हरियाणा

मनोहर लाल खट्टर, मुख्यमंत्री, हरियाणा

मनोज ठाकुर

बच्चों की शिक्षा को लेकर मनोहर सरकार लगातार काम कर रही है। इसी क्रम में अब सरकार ने तय किया कि हरियाणा में मॉडल संस्कृति स्कूल में हिंदी और इंग्लिश दोनों माध्यम से बच्चों के एडमिशन व पढ़ाई कराई जाएगी। विद्यार्थी किसी भी माध्यम से पढ़ना चाहें उस माध्यम से उस में एडमिशन करवाए जाएंगे। सीएम मनोहर लाल ने बताया कि योजना के पीछे सोच है कि बच्चों को विकल्प दिया जाएं। इसके साथ ही कोशिश यह है कि सरकारी स्कूल निजी स्कूलों से बेहतर बनें। सरकारी स्कूलों के प्रति बच्चों और अभिभावकों का रुझान बने, इस सोच के चलते यह निर्णय लिया गया है। कोशिश यह भी है कि सरकारी स्कूल किसी भी तरह से निजी स्कूल से कम नहीं होने चाहिए। हम अभिभावकों की इस सोच को बदलना चाह रहे हैं, जो यह सोचते हैं कि निजी स्कूलों में ही बेहतर सुविधा मिल सकती है। सरकारी स्कूल किसी भी मायने में निजी स्कूल से कम नहीं हैं।

सीएम ने बताया कि हम शिक्षा को लेकर जमीन पर काम कर रहे हैं। स्कूलों में ढांचागत सुविधाओं के साथ साथ शिक्षा का स्तर सुधारने पर लगातार काम किया जा रहा है। शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। हम भविष्य की जरूरत को ध्यान में रखते हुए शिक्षा में आवश्यक बदलाव कर रहे हैं। पिछली सरकारों खासतौर पर कांग्रेस की सरकार में शिक्षा को लेकर कोई काम नहीं किया गया था। मनमाने तबादलों के साथ—साथ अध्यापकों से शिक्षण की बजाय दूसरे काम लिए जा रहे थे। इससे प्रदेश के सरकारी स्कूलों शिक्षा का स्तर लगातार कम होता जा रहा था। हमारी सरकार ने इन खामियों को तुरंत प्रभाव से दूर किया है।

स्कूलों से बच्चे ड्रॉप आउट होते हैं तो स्कूल मुखिया होगा जिम्मेदार

शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने बताया कि इस बार अब यदि स्कूलों से बच्चे ड्राॅप आउट होते हैं तो स्कूल मुखिया इसके लिए जिम्मेदार होगा। इससे न सिर्फ स्कूल की व्यवस्था में सुधार होगा, इसके साथ ही सरकारी स्कूलों में भी प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा होगी। हम बस यह चाहते हैं कि सरकारी स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में और ज्यादा बेहतर करके दिखाएं। इसी सोच के साथ सरकार काम कर रही है।

स्कूल से ड्राप आउट बच्चों का तीसरी बार शिक्षा विभाग सर्वे करा रहा है। जिसका मुख्य उद्देश्य ड्राप आउट बच्चों का दोबारा से स्कूल में दाखिला कराकर मुख्यधारा से जोड़ना है। सर्वे कार्य खंड से लेकर जिला स्तर तक किया जाएगा। इस काम में पंचायत राज, महिला एवं बाल विकास विभाग, समाज कल्याण विभाग, सामाजिक संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाएगा। इसको लेकर हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से सर्वे का एक अलग से फार्मेट तैयार कर सभी जिला शिक्षा कार्यालयों में भिजवा दिया गया है। किसी कारणवश स्कूल न जाने वाले बच्चों को अब बिना दस्तावेज दाखिला मिलेगा। शिक्षा विभाग ने इन बच्चों को शिक्षित कर समाज की मुख्य धारा के साथ जोड़ने की प्लानिंग बनाई है। सर्वे में प्रदेश में ऐसे लगभग 18 हजार बच्चे मिले हैं।

निजी स्कूलों में फीस से जड़ा नया कानून बनाया

सरकार ने निजी स्कूलों में फीस से जुड़ा नया कानून लागू किया है। अब निजी स्कूल संचालक न तो अपनी मर्जी से फीस बढ़ा सकेंगे और न ही विद्यार्थियों को वर्दियां और स्टेशनरी आदि खरीदने के लिए बाध्य कर सकेंगे। कानून बनने के बाद अब यदि कोई स्कूल संचालक या संस्था तीन बार दोषी पाई जाती है तो उस शिक्षण संस्थान की मान्यता को रद्द कर दिया जाएगा। फीस वृद्धि कानून लागू करने के बाद शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर दिया है। सीएम मनोहर लाल ने बताया कि हरियाणा सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा अधिसूचना जारी कर दी गई है। छात्रों से फीस चेक, डीडी, आरटीजीएस, एनईएफटी या किसी अन्य डिजिटल माध्यम से ली जाएगी। इसके साथ ही कोई भी विद्यालय छमाही या वार्षिक आधार पर फीस का अनिवार्य संग्रहण नहीं कर सकेगा। फीस की स्थिति को भी स्पष्ट कर दिया है, जिसके अनुसार केवल पंजीकरण के समय एडमिशन से जुड़ी और अन्य फीस एक बार ही जा सकेगी। परीक्षा फीस केवल बोर्ड परीक्षा के लिए ही ली जा सकेगी।

किताबें, यूनिफॉर्म, जूते-मोजे खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे

अधिसूचना में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि कोई भी मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थान किसी भी छात्र को पुस्तकें, कार्य पुस्तिकाएं, लेखन सामग्री, जूते, मोजे, वर्दी इत्यादि खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा। कोई भी संस्थान लगातार पांच शैक्षिक वर्षों से पहले अपनी वर्दी में बदलाव नहीं करेगा। छात्र, अभिभावक जिला समिति को शिकायत मिलने के लिए तीन माह के अंदर निपटारा करना होगा। सीएम ने बताया कि पंजाब सरकार तो बस वादे कर रही है। हम ने तो यह करके दिखा दिया है। हम करने में यकीन रखते हैं। इसलिए वादा नहीं किया, सीधा कानून ही बना दिया। इससे अभिभावकों को राहत मिले। क्योंकि हम चाहते हैं, हर बच्चें को शिक्षा मिले। शिक्षा कमाई का जरिया नहीं है, यह सेवा है। हम इसी मंत्र को सामने रख कर काम कर रहे हैं।

पांच मई से बांटे जाएंगे निशुल्क टैबलेट

शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने बताया कि 5 मई को रोहतक में विशाल कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें हरियाणा में स्कूली विद्यार्थियों को निशुल्क टैबलेट बांटने की शुरुआत की जाएगी।

Topics: हरियाणा बच्चे सरकारी स्कूल हिंदी अंग्रेजी children Haryana Hindi English government schools
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