बीरभूम नरसंहार : बर्बरता की चपेट में बंगाल
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बीरभूम नरसंहार : बर्बरता की चपेट में बंगाल

बीरभूम में हुआ नरसंहार कोई राजनीतिक वर्चस्व का संघर्ष नहीं, वरन समानांतर अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण का संघर्ष है। यह राज्य की आर्थिक बदहाली व लचर कानून व्यवस्था की भी पोल खोलता है

Written byअंबा शंकर वाजपेयीअंबा शंकर वाजपेयी
Apr 5, 2022, 01:10 pm IST
in भारत

पश्चिम बंगाल में मई, 2021 में विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद राज्य में ममता बनर्जी व उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने अपने राजनीतिक विरोधियों के प्रति बर्बरता और निरंकुशता की सारी हदों को पार कर दिया था। मतगणना के उपरांत पूरी दुनिया ने नृशंसता और नरसंहार, स्त्रियों व लड़कियों से बलात्कार का नंगा नाच देखा। नरसंहार का यह खूनी संघर्ष ‘खेला होबे’ थमने का नाम ही नहीं ले रहा है और अब 21 मार्च, 2022 को बीरभूम जिले के रामपुरहाट की बरसाल ग्राम पंचायत के तृणमूल कांग्रेस के उपप्रधान भादू शेख की बम मारकर हत्या कर दी गई। इसका बदला लेने के लिए उसके लोगों ने बागतुई गांव में बम, पेट्रोल बम आदि से हमला कर दिया। इसमें एक ही परिवार के 9 लोग आग में जलकर मर गए। हमलावरों ने घरों को बाहर से बंद करके पेट्रोल बम से हमला किया था। स्थानीय लोगों से पता चला कि पेट्रोल बम हमले से 13 घर जलकर राख हो गए। स्थानीय निवासियों ने 12 लोगों की मृत्यु बताई है।

इस लोमहर्षक नरसंहार के बाद राज्यपाल जगदीप धनकड़ ने ट्वीट किया कि बीरभूम के रामपुरहाट में हुई भयावह हिंसा एवं आगजनी इस बात का संकेत है कि राज्य हिंसा एवं अराजकता की संस्कृति की गिरफ्त में है। राज्यपाल ने यह भी कहा कि यह घटना राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था का संकेत है। इस खूनी संघर्ष से इस निष्कर्ष पर पहुंचने से रोक पाना बड़ा मुश्किल है कि पश्चिम-बंगाल में मानवाधिकार धूल चाट रहा है एवं कानून के शासन की नैया पलट चुकी है।

न्यायालय को नहीं है ममता पर भरोसा
बागतुई ग्राम में हुए इस नरसंहार की गंभीरता को देखते हुए 23 मार्च को कोलकाता उच्च न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लिया और यह चिंता जताई कि इस घटना के बाद से लोगों में डर व्याप्त है। कोलकाता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति आर. भारद्वाज की पीठ ने सीबीआई को जांच के आदेश दिए और 7 अप्रैल तक प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। उच्च न्यायालय ने कहा कि ‘मामले के तथ्य और परिस्थितियों की मांग है कि न्याय के हित में और समाज में विश्वास पैदा करने के लिए निष्पक्ष जांच की जाए। सच तो यह है कि जांच सीबीआई को सौंपना जरूरी है।’इस आदेश से उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को राज्य के अधिकारियों को यह निर्देश देने के लिए बाध्य कर दिया कि सीबीआई अधिकारियों को राज्य पुलिस प्रशासन पूरा सहयोग दे। इसके मद्देनजर राज्य द्वारा गठित एसआईटी जांच को निरस्त किया जाए और एसआईटी द्वारा हिरासत में लिये गए संदिग्धों को और संबंधित कागजात सीबीआई को सौंपे जाएं। आदेश मिलते ही सीबीआई जांच में जुट गई। स्थानीय पुलिस प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि 70-80 लोगों की भीड़ ने पीड़ितों के घरों में तोड़फोड़ की। भीड़ ने 9 लोगों को घरों में बंद करके आग लगा दी जिससे 8 लोगों की जलकर मृत्यु हो गई और एक व्यक्ति की अस्पताल में मृत्यु हुई। जांच में सीबीआई ने 22 लोगों को नामजद किया है जो सभी तृणमूल कार्यकर्ता हैं।

कभी बंगाल भारत की आर्थिक व संस्कृति राजधानी हुआ करता था। बंगाल की आर्थिक-सांस्कृतिक समृद्धि के कारण ब्रिटिश शासन ने कोलकाता को अपनी राजधानी बनाया था लेकिन आजादी के बाद कांग्रेस की आर्थिक नीतियों ने राज्य को तोड़ कर रख दिया। 1977 से 2011 तक राज्य में सत्तारूढ़ वाममोर्चे की आर्थिक नीतियों ने राज्य को उद्योग विहीन बना दिया। राज्य का अपना कोई आर्थिक आधार नहीं है। 2011 से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने उसी राजनीतिक संस्कृति को आगे बढ़ाया जिसे वाममोर्चे ने शुरू किया था। आर्थिक आधार न होने से राज्य सत्ता माफिया कब्जे में है और राज्य में कानून व्यवस्था खत्म हो चुकी है, ‘हिंसा और अराजकता’की संस्कृति फल-फूल रही है। राज्यसभा में राज्यसभा सदस्य रूपा गांगुली ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था खत्म हो चुकी है। राज्य में बीते एक सप्ताह में 26 लोगों की राजनीतिक हत्या हुई। राज्य से लोग भाग रहे हैं, स्वामी विवेकानंद की धरती अब रहने लायक नहीं है।

मुस्लिमों ने बंगाल के 8 जिलों में जनांकिकी बदली

पश्चिम बंगाल में 1977 में आई वाममोर्चा सरकार ने बांग्लादेश से हो रही मुस्लिम घुसपैठ को रोकने के बजाय घुसपैठियों को वोटबैंक बनाने के लिए उन्हें मतदाता पहचान पत्र, राशन कार्ड उपलब्ध कराने के साथ ही साथ सीमावर्ती जिलों में आवास और जमीन के पट्टे आदि दिए। इसके एवज में 2006 तक वाममोर्चा को एकमुश्त मुस्लिम वोट मिले। 2011 की जनगणना में बंगाल के सीमावर्ती 8 जिलों उत्तरी दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया, 24 उत्तर परगना व 24 दक्षिण परगना और हावड़ा में मुस्लिम आबादी 35 से 40 प्रतिशत हो गई थी। हुगली, बर्धमान व बीरभूम जिला अब इनके नए ठिकाने के रूप में उभरे हैं। बीरभूम जिला तो बंगाल में नया मुंगेर (मुंगेर बिहार में अवैध असलहा, घातक हथियार व बम बनाने के लिए कुख्यात था) बनकर उभरा है। दो साल पहले बीरभूम में राज्यपाल जगदीप धनकड़ ने कहा था कि बीरभूम बम व घातक हथियार बनाने की फैक्ट्री के रूप में उभर कर सामने आया है। यह उद्योग पूरी तरह मुस्लिम समुदाय के नियंत्रण में है।

बारूद के ढेर पर राज्य

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रामपुरहाट का दौरा किया और स्थानीय पुलिस की लापरवाही व निष्क्रियता के चलते रामपुरहाट के एसडीपीओ सायन अहमद को अनिवार्य प्रतीक्षा सूची में भेज दिया, वहीं थाने के आईसी त्रिदिप प्रमाणिक को निलंबित कर दिया। ममता के इस कदम के बाद पुलिस प्रशासन पूरे एक्शन में आ गया। डीजी मजोज मालवीय ने अगले 10 दिनों तक राज्यभर में अवैध हथियार जब्त करने के लिए विशेष तलाशी अभियान शुरू करने का आदेश दिया। इस अभियान के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों से अवैध हथियार, बम आदि मिले हैं जो बताता है कि राज्य बारूद के ढेर पर बैठा है।
मालदा- चांचल थाना – दो पाइप गन, 2 राउंड गोलियां
मुर्शिदाबाद- नौदा थाना –एक 9एमएम पिस्टल, एक 7.65 एमएम पिस्टल, 2 मैगजीन व 4 राउंड गोलियां
नदिया- शांतिपुर थाना- एक पिस्टल, कुछ कारतूस, रिवॉल्वर और बड़ी मात्रा में घातक हथियार
हावड़ा – रामनगर शिबपुर थाना-चार फायर आर्म्स
पश्चिम मिद्नीपुर– केशपुर थाना-100 देसी जिन्दा बम
आसनसोल- सालापुर थाना – एक बड़ी बम फैक्ट्री, 12 बम, बम निर्माण सामग्री
दुर्गापुर- अंगदपुर – बड़ी मात्रा में देसी बम
पश्चिम बर्धमान- मोरग्राम – 200 देसी जिन्दा बम, कटवा – हथियारों का बड़ा जखीरा
बीरभूम- दुबराजपुर सिकंदरपुर गांव – 30 बम
दक्षिण 24 परगना- कैनिंग बसंती व बरईपुर – 100 से ज्यादा जिन्दा बम, घातक हथियार
 उत्तर 24 परगना- बैरकपुर के भाटपाड़ा, हालिसहर – देसी बमों का जखीरा

समानांतर अर्थव्यवस्था पर वर्चस्व के लिए खूनी संघर्ष

किसी भी जीवंत लोकतंत्र का आधार राज्य सत्ता और समाज के बीच मौजूद एक मजबूत सिविल सोसाइटी होती है, जिसमें बाजार, सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक आदि उदेश्यों को लेकर अनेक संस्थाएं सक्रिय रहती हैं। ये संस्थाएं अधिकारसंपन्न और स्वायत्त होती हैं कि वे किसी राजनीतिक दल से जुड़ें या न जुड़ें। इससे विभिन्न विचारधारा के लोग साथ आते हैं और एक-दूसरे के मत का सम्मान करते हैं।

लेकिन पश्चिम बंगाल में 1977 में जब पहली बार वाममोर्चा सरकार सत्ता में आई तो उसने वामपंथ के अपरिहार्य दृष्टिकोण के अनुरूप सम्पूर्ण सिविल सोसाइटी को दल के भीतर पचा लिया और समाज के रोजमर्रा के जीवन के हरेक पहलू को दल का हिस्सा बना दिया। इससे समाज की सभी संस्थाओं, जैसे अकादमिक, सांस्कृतिक या बाजार से जुड़ी संस्थाओं की स्वायत्तता खत्म हो गई। इसने बंगाल में क्लब कल्चर को जन्म दिया। समाज के सारे आयाम, यहां तक कि लोगों सामाजिक व व्यक्तिगत चीजें दल या सत्ता के साथ अनिवार्य रूप से जुड़ गईं।

दूसरी ओर, बंटवारे के बाद पश्चिम बंगाल में जनसंख्या घनत्व इतना बढ़ गया कि विनिर्माण क्षेत्र व सेवा क्षेत्र का उन्नयन हो ही नहीं सका और वाममोर्चा सरकार आते-आते औद्योगिक क्षेत्र तबाह हो गया। इससे राज्य आर्थिक दिवालियापन की चौखट पर खड़ा हो गया। तब सत्ताधारी पार्टी ने एक समानांतर आर्थिक व्यवस्था को जन्म दिया ताकि पार्टी गतिमान रहे। सत्ताधारी दल से जुड़ना आम लोगों की मजबूरी हो गया। धीरे धीरे पश्चिम-बंगाल में गरीब, शरणार्थी व अन्य गरीब तबके एक बड़े सत्ताधारी दल के साथ जुड़ गया। आज पश्चिम बंगाल भारत का सबसे ज्यादा राजकोषीय घाटे वाले राज्यों में से एक है। सत्ताधारी दल के जीवित रहने के लिए उसके अन्दर ‘गोष्ठी द्वंद्व’(आपसी संघर्ष) चलता रहता है और समानांतर अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण के लिए हमेशा खूनी संघर्ष और राजनीतिक हत्या होती हैं। रामपुरहाट नरसंहार को इसी समानांतर अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण और वर्चस्व के लिए अंजाम दिया गया। समानांतर आर्थिक व्यवस्था राजनीतिक नेता को नहीं बल्कि राजनीतिक माफिया को जन्म देती है। तृणमूल कांग्रेस का भादू शेख उसी आर्थिक व्यवस्था की एक कड़ी था।

बीरभूम में रोजाना 1 करोड़ तक की वसूली

बीरभूम जिला पश्चिम बंगाल का वह क्षेत्र है जहां बालू (स्थानीय भाषा में बाली कहते हैं), पत्थर (जिससे सड़क व भवन निर्माण में उपयोग के लिए गिट्टी बनती है) आदि का खनन होता है। बीरभूम जिले के रामपुरहाट व बोलपुर में अजय नदी और मयूराक्षी व ब्राह्मणी नदी से बाली का सबसे ज्यादा खनन होता है। बीरभूम का रामपुरहाट, नलहाटी, पंचामी व सलबादरा बाली क्षेत्र पत्थरों के खनन के लिए प्रसिद्ध है। स्थानीय लोग बताते हैं कि बीरभूम के इन क्षेत्रों से बाली व गिट्टी से भरे ट्रकों से प्रति फेरा 5000 रुपये भारी ट्रकों से और 3000 रुपये मध्यम ट्रकों से वसूली होती है। प्रतिदिन लगभग 80 लाख से 1 करोड़ की वसूली तृणमूल के रामपुरहाट के माफिया भादू शेख व अन्य तृणमूल वसूली माफिया द्वारा की जाती है। इस वसूली का हिस्सा भादू शेख, तृणमूल कांग्रेस बीरभूम जिला अध्यक्ष व इनके माध्यम से तृणमूल कांग्रेस में ऊपर तक लोगों में जाता है। रामपुरहाट में भादू शेख की धाक थी। भादू शेख के बिना यहां कोई खनन से संबंधित कार्य नहीं कर सकता था।

रामपुरहाट से झारखण्ड के डुमरी तक जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-14 के शाखा मार्ग 114ए पर बाली व पत्थर लदे ट्रकों से वसूली की जाती है। पूरी तरह मुस्लिम आबादी वाले गांव बागतुई के लोग अवैध वसूली, गौ तस्करी व देशी बम कट्टा, घातक हाथियार बनाने में शामिल हैं। रामपुरहाट के स्थानीय लोगों ने बताया कि स्थानीय लोग बागतुई गांव के आस-पास से निकलने से परहेज करते हैं। बागतुई गांव के लोग रंगदारी वसूलने, अवैध हथियार बनाने या अन्य अवैध कार्यों में लिप्त रहते हैं। यह उनकी एकमात्र आजीविका है। भादू शेख माइनिंग के अलावा रामपुरहाट के पुलिस वाहनों का ठेकेदार भी था।

 

क्यों बौखलाई हैं ममता

सीबीआई ने रामपुरहाट नरसंहार जांच के लिए 22 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया, ये सभी तृणमूल कार्यकर्ता/सदस्य हैं। सीबीआई ने इस घटना की मुख्य कड़ी अनारुल हुसैन को हिरासत में ले लिया है। अनारुल तृणमूल विधायक व विधानसभा में उपसभापति आशीष बनर्जी का नजदीकी और तृणमूल की ओर से ब्लॉक प्रमुख है। उसे बीरभूम जिला तृणमूल अध्यक्ष अनुब्रत मंडल का दाहिना हाथ भी माना जाता है। वह रामपुरहाट में पुलिस प्रशासन को नियंत्रित करता है जिससे बाली और पत्थर खनन व रंगदारी में कोई प्रशानिक बाधा न आए।

घटना के बाद अनारुल भागकर तारापीठ क्षेत्र में छिप गया लेकिन उसे पहले एसआईटी ने गिरफ्तार किया और अब सीबीआई उससे पूछताछ कर रही है। स्थानीय लोगों से बातचीत में यह बात सामने आई कि अनारुल ने दहशत बनाने के लिए गांव में जघन्य हत्याएं, आगजनी व घातक हथियारों से दंगा किया। अनारुल ने सीबीआई के सामने यह स्वीकार किया है कि मैंने वही किया जो मुझे ऊपर से बोला गया। ये ऊपर के लोग कौन है? ज्ञातव्य है कि अनुब्रत मंडल बीरभूम जिले का तृणमूल अध्यक्ष है जिसकी जिले में तूती बोलती है। अनुब्रत पूरे जिले को नियंत्रित करता है। वह राज्य की मुख्यमंत्री का सबसे विश्वासपात्र व्यक्ति है और तृणमूल कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यकारणी का सदस्य भी है।

यहां कड़ी यह बनती है कि अनुब्रत मंडल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का विश्वासपात्र है और बीरभूम जिले को नियंत्रित करता है। अनारुल अनुब्रत मंडल का विश्वासपात्र है और बीरभूम जिले के रामपुरहाट में प्रशासन को नियंत्रित करता है। भादू शेख रामपुरहाट में बालू/बाली व पत्थर/ गिट्टी के खनन से अवैध धन उगाही को नियंत्रित करता था। चूंकि सभी कड़ियां तृणमूल से जुड़ रही हैं, इसलिए ममता ने यह कह कर इस मामले को बंगाल के गौरव से जोड़ दिया कि एक बड़ी साजिश के तहत बंगाल को बदनाम किया जा रहा है, इस घटना को बाहर से आए लोगों ने अंजाम दिया है। ममता बनर्जी ने यहां तक कहा कि ऐसी घटनाएं अन्य राज्यों में होती रहती हैं। लेकिन तब प्रधानमंत्री या राज्यों के राज्यपाल कोई ट्वीट आदि नहीं करते। बंगाल की छवि को खराब किया जा रहा है।

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