दिग्गज गायिका और भारत रत्न लता मंगेशकर अब हमारे बीच नहीं रहीं। लता दीदी ने 92 की उम्र में रविवार सुबह दुनिया को अलविदा कह दिया। मुंबई के शिवाजी पार्क में पंडितों के मंत्र उच्चारण के बीच लता मंगेशकर को उनके भाई हृदयनाथ मंगेशकर ने मुखग्नि दी। लता मंगेशकर का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। इस दौरान राजनीति, खेल, मनोरंजन जगत सहित कई क्षेत्र के लोग लता जी की इस अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
भारत रत्न लता मंगेशकर के अंतिम संस्कार में उनके परिजन, सिनेमा जगत के सितारे, तमाम दिग्गज नेता और फैंस शामिल हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शिवजी पार्क पहुंचे जहां उन्होंने लता दीदी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, सीएम उद्दव ठाकरे, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, सचिन तेंदुलकर और अनुपम खेर समेत तमाम दिग्गज श्रद्धांजलि देने शिवजी पार्क पहुंचे थे।
भारतीय फिल्म संगीत हो या कोई अन्य संगीत, आधुनिक भारत के संदर्भ में लता मंगेशकर का नाम हमेशा याद किया जाएगा। लोगों ने माना कि उनकी आवाज में वो बात थी कि प्रशंसा के शब्द कम पड़ जाएं। और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि वह एक बेहतरीन गायिका होने के साथ-साथ एक नेक दिल इंसान भी थीं। इसीलिए वह पूरे देश की लता दीदी कहलाईं।
उनकी आवाज में ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आंख में भर लो पानी… देशभक्ति गीत सैनिकों की शहादत को नमन करता है, जिसे सुनकर आज भी हर देशवासी की आंखों में आंसू आ जाएं। ये गीत उन्होंने भारत-चीन युद्ध (1962) में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की याद में गाया था।
लता जी ने लगभग हर मौके और परिस्थिति के लिए गीत गाये, जिससे अलग-अलग पीढ़ी के न जाने कितने ही कलाकारों का करियर आगे बढ़ने में मदद मिली होगी। लेकिन चकाचौध से भरी इस फिल्म इंडस्ट्री के ग्लैमर का रंग उन पर कभी हावी नहीं दिखा। वह एक बेहद साधारण परिवार से थीं और उन्होंने पूरी जिंदगी खुद को एक साधारण महिला माना और ऐसा करती वह दिखती भी थीं। आप जब भी आंखे बंद करके उनकी छवि याद करेंगे तो वह हल्के बार्डर वाली आफ व्हाइट साड़ी में दिखाई देंगी। चेहरे पर स्नेहभरी हल्की सुस्कान, मानो सामने वाले को बड़े होने के नाते आर्शीवाद दे रही हों। और अपने जीवन के अंत समय तक उन्होंने यह छवि ही बनाए रखी।
लता मंगेशकर को फिल्मों में उनके द्वारा दिए गए अभूतपूर्व योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कार से सम्मानित किया गया। लता मंगेशकर को साल 1969 में पद्म भूषण पुरस्कार ,साल 1989 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार , साल 1999 में पद्म विभूषण(1999) और साल 2001 में 'भारत रत्न' से भी सम्मानित किया गया। वे अविवाहित रहीं। महान गायिका व भारत की अनमोल रत्न लता मंगेशकर सभी के लिए आदर्श हैं और उनका जीवन कई लोगों के लिए प्रेरणादायक है। अपनी सुरीली आवाज़ से दर्शकों के दिलों को छूने वाली लता मंगेशकर के चाहने वालों की संख्या लाखों में है। लता मंगेशकर का निधन संगीत जगत के एक स्वर्णिम युग का अंत है।
शिवम् दीक्षित एक अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार हैं, जिन्होंने 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत मनसुख टाइम्स (साप्ताहिक समाचार पत्र) से की। इसके बाद वे संचार टाइम्स, समाचार प्लस, दैनिक निवाण टाइम्स, और दैनिक हिंट में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया, जिसमें रिपोर्टिंग, डिजिटल संपादन और सोशल मीडिया प्रबंधन शामिल हैं।
उन्होंने न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, जहां इंडियाज़ पेपर परियोजना का नेतृत्व करते हुए 500 वेबसाइटों का प्रबंधन किया और इस परियोजना को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान दिलाया।
वर्तमान में, शिवम् राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं।
शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं।
उनकी उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी अंसार खान की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। यह सम्मान 8 मई, 2023 को दिल्ली में इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र (IVSK) द्वारा आयोजित समारोह में दिया गया, जिसमें केन्द्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल, RSS के सह-प्रचार प्रमुख नरेंद्र जी, और उदय महुरकर जैसे गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
शिवम् की लेखन शैली प्रभावशाली और पाठकों को सोचने पर मजबूर करने वाली है, और वे डिजिटल, प्रिंट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहे हैं। उनकी यात्रा भड़ास4मीडिया, लाइव हिन्दुस्तान, एनडीटीवी, और सामाचार4मीडिया जैसे मंचों पर चर्चा का विषय रही है, जो उनकी पत्रकारिता और डिजिटल रणनीति के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
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