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अंक जो बन गए विशेषांक

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jan 21, 2022, 11:22 pm IST
in भारत, पुस्तकें, दिल्ली
सांच को नहीं आंच

सांच को नहीं आंच

पाञ्चजन्य ने अपने कई अंकों में कुछ आवरण कथाएं इस तरह प्रकाशित कीं कि उनके विषय, सामग्री और कलेवर ने पाठकों के मन में एक विशेषांक की तरह छाप छोड़ी। वे अंक उन आवरण कथाओं के कारण पहचाने गए। पाञ्चजन्य के हीरक जयंती वर्ष में प्रवेश के अवसर पर पाठकों के लिए प्रस्तुत है हमारे अभिलेखागार से इनमें से चुनिंदा अंकों की झलकियां

सांच को नहीं आंच  
देश में फेक न्यूज का बोलबाला चल रहा है। पत्रकारिता में शुचिता और सूचनाओं को सही संदर्भ में देखने के हामी पाञ्चजन्य ने सबसे पहले इस फेक न्यूज का भंडाफोड़ करने की शुरूआत की। इस क्रम में ‘नारद’ स्तंभ प्रारंभ किया गया जिसमें देश के बड़े-छोटे मीडिया संस्थानों द्वारा गलत समाचारों के प्रसारण, सूचनाओं को गलत संदर्भ में दिखाने, सूचनाएं छिपाने जैसी कारिस्तानियों को उजागर किया जाने लगा। फेक न्यूज का यह धंधा एक खास नैरेटिव सेट करने के एजेंडा के तहत हो रहा था। पाञ्चजन्य ने देश में पत्रकारिता के प्रीमियर संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान के विद्यार्थियों के साथ एक परियोजना प्रारंभ की। इसमें विशेष बात यह रही कि विद्यार्थियों ने ही जांच के लिए समाचारों का चयन किया और फिर तथ्यों के आधार पर उनकी पड़ताल की। इस परियोजना के जरिए बड़े-बड़े संस्थानों के नामधारी पत्रकारों की फेक न्यूज की आड़ में एजेंडा पत्रकारिता की पोल सामने आ गई।

पाञ्चजन्य की पत्रकारिता में शुचिता की इस मुहिम से परेशान एजेंडाधारियों ने अब नया खेल खेला। उन्होंने मीडिया में फेक न्यूज का पदार्फाश करने का अभियान छेड़ने का दावा किया। इसके लिए बाकायदा कुछ मीडिया संस्थान बनाए गए। अब चूंकि वे स्वयं फैक्ट चेकर बन गए, तो उन पर उंगलियां उठाने से लोगों का ध्यान हट गया। एजेंडाधारियों के इस अभियान के कुछ समय बाद पाञ्चजन्य की निगाह इन पर पड़ी तो शुरू हो गई निगरानी और पड़ताल। पाञ्चजन्य ने पाया कि झूठी खबरों का पदार्फाश करने वाले ये स्वनामधन्य मीडिया संस्था, जिनमें आॅल्ट न्यूज प्रमुख थी, स्वयं झूठी खबरें प्रसारित करने में सबसे आगे थे। पाञ्चजन्य ने पूरे तथ्यों के साथ उनकी इस हरकत का पदार्फाश किया और 21 जुलाई, 2021 के अंक में ‘सांच को आंच’ नाम से आवरण कथा छापी। ये आवरण कथा बहुत लोकप्रिय हुई और इस अंक को इस आवरण कथा से पहचाना गया।

इस्लाम छोड़ रहे मुस्लिम
हाल ही में उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के 15 वर्ष तक अध्यक्ष रहे वसीम रिजवी ने इस्लाम छोड़ कर सनातन धर्म अपना लिया। पाञ्चजन्य ने इसकी पड़ताल की कि आखिर रिजवी ने इस्लाम क्यों छोड़ा। इस पड़ताल के दौरान पता चला कि वसीम रिजवी ही नहीं, पूरी दुनिया में बहुत बड़ी संख्या में मुसलमान इस्लाम छोड़ रहे हैं। पाञ्चजन्य ने पड़ताल की और अपनी रिपोर्ट आवरण कथा के रूप में दिसंबर, 2021 में प्रकाशित की। अब तक जिन लोगों ने इस्लाम छोड़ा है, उनमें से ज्यादातर की प्रतिक्रियाओं में उभरने वाली साझी बात यह है कि सबसे पहले तो उन्हें पैगम्बरवाद की मूल अवधारणा ही तर्कहीन प्रतीत होती है।

रिपोर्ट में बताया गया कि नवंबर, 2015 में यूरोप में ट्विटर पर एक हैशटैग ट्रेंड हुआ था- #एक्समुस्लिमबिकॉज। इसमें यूरोप के अनेक मुसलमानों ने अपने सीने पर एक तख्ती लगाकर अपनी तस्वीर ट्वीट की थी कि उन्होंने इस्लाम क्यों छोड़ा। यूरोप से चली यह हवा अब आंधी का रूप ले चुकी है और इसने भारत में भी दस्तक दे दी है। वाशिंगटन स्थित प्रतिष्ठित प्यू रिसर्च सेंटर के एक सर्वेक्षण के अनुसार 6 प्रतिशत भारतीय मुसलमानों को अल्लाह पर भरोसा नहीं है। पिछले वर्ष तक इस्लाम त्यागने वाले दो-तीन यू-ट्यूबर ही भारत के थे। अब इनकी संख्या काफी बढ़ गई है। इनमें कई तो अरबी के भी अच्छे जानकार हैं और अपने वीडियो से भारतीय मुसलमानों को सच से रू-ब-रू करा रहे हैं। यह मोहभंग पाकिस्तान में भी दिख रहा है। पाकिस्तान में जन्मे आज के कई यूट्यूबर रोज अपने पूर्व मुस्लिम  होने की घोषणा गर्व के साथ करते हैं। फिलस्तीन में जन्मे हसन मोसाब यूसुफ ने अपने जीवन का एक लम्बा समय कुख्यात इस्लामिक आतंकवादी संगठन ‘हमास’ के लिए काम करते हुए बिताया है। उसके पिता ‘हमास’ के संस्थापक सदस्य थे, इसलिए इस्लाम के लिए जिहाद करना उसे विरासत में मिला था। किंतु धीरे-धीरे कुरान से और उसमें जिसकी इबादत’ की जाती है, उस अल्लाह से, हसन मोसाब यूसुफ का विश्वास उठने लगा। परिणामत: उसने इस्लाम को त्याग दिया। यह आवरण कथा प्रकाशित होने पर लोगों ने इसे बहुत पसंद किया।

सलीब पर बचपन
गरीबों-असहायों से करुणा का भाव रखने का प्रदर्शन-दावा करने वाले चर्च की सफेदी अपने भीतर कई कलंक की कथाएं समेटे है। पाञ्चजन्य ने अपने अक्टूबर, 2021 अंक में इसी विषय पर पड़ताल करते हुए आवरण कथा प्रकाशित दुनियाभर की उन घटनाओं का जिक्र किया है, जिसमें यौन अपराध करने वाले पादरियों की वजह से लाखों बच्चों और ननों को प्रताड़ित होना पड़ा है। अब भारत में भी पादरियों के कृत्यों की जांच की मांग की जा रही है। पड़ताल से पता चला कि फ्रांस के कैथोलिक चर्च में वर्ष 1950 से लेकर 2020 के बीच लगभग 3 लाख 30 हजार बच्चों का यौन शोषण किया गया है। इन घटनाओं में लगभग 3 हजार पादरी आरोपी रहे, जिनमें से कई अभी भी सेवारत हैं। फ्रांस में चर्च से जुड़े विभिन्न विवादों और बाल यौन शोषण की घटनाओं की जांच करने के लिए 2018 में एक आयोग का गठन किया गया था और इसी स्वतंत्र जांच आयोग की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।

बच्चों की तरह ही ननों के साथ भी यौन शोषण की घटनाएं रह-रहकर बड़ा मुद्दा बनती रही हैं। 2019 में इन घटनाओं को लेकर पोप फ्रांसिस ने क्षमायाचना की थी परंतु यह दबाव में निभाई गई औपचारिकता मात्र थी, क्योंकि इसके बाद भी इस तरह की घटनाओं में कोई कमी नहीं आ रही है।
भारत में भी इस तरह की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। चेन्नई के मिशनरी कॉलेज, केरल की सिस्टर लूसी, पंजाब के जालंधर में एक महिला के साथ दुष्कर्म के अलावा झारखंड और केरल में कई घटनाएं हो चुकी हैं। इससे अब भारत में भी लोग चर्च और पादरियों के कारनामों की जांच की मांग कर रहे हैं। चर्च की कार्यप्रणाली ऐसी है कि दुनियाभर में ननों की संख्या कम होती जा रही है. केरल जैसे राज्य में तो यह संख्या गिरकर केवल 25 प्रतिशत तक रह गई है और इसलिए आज भारत में चर्च छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों के गरीब परिवारों की लड़कियों को छल, बल और प्रलोभन के बूते अपने झांसे में ले रहा है। यह अंक भी अपने इस आवरण कथा से पहचाना गया।

ईस्ट इंडिया कंपनी 2.0
पाञ्चजन्य ने 2 अक्टूबर, 2021 के अंक में अमेरिकी ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन के कारनामों की पड़ताल की। इससे पता चला कि इस कंपनी ने मनमाफिक सरकारी नीतियों के लिए रिश्वत के तौर पर करोड़ों रुपये का भुगतान किया है। ‘ईस्ट इंडिया कंपनी 2.0’ के नाम से प्रकाशित इस आवरण कथा में हमने बताया कि ‘भारत पर 18वीं शताब्दी में कब्जा करने के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी ने जो कुछ किया, वही आज अमेजन की गतिविधियों में दिखाई देता है।’ दरअसल अमेजन भारतीय बाजार में एकाधिकार स्थापित करना चाहता है जिसके लिए इस कंपनी ने भारतीय नागरिकों की आर्थिक, राजनीतिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर कब्जा करने की पहल शुरू की है। पड़ताल से पता चला कि अमेजन का वीडियो मंच अपने मंच पर ऐसी फिल्में और वेब सीरीज जारी कर रहा है, जो भारतीय संस्कृति के खिलाफ हैं।

अमेरिकी कंपनी अमेजन भारत में अपने वकीलों द्वारा कथित तौर पर अधिकारियों को रिश्वत देने के मामले की जांच कर रही है। कंपनी ने वर्ष 2018 से 2020 के बीच भारत में अपनी मौजूदगी कायम रखने के लिए 1.2 अरब डॉलर या 8,546 करोड़ रुपये का भारी भरकम कानूनी खर्च किया। अमेजन रिश्वत मामले में कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के निगरानी में जांच की मांग की है। संघ समर्थित स्वदेशी जागरण मंच ने भी अनुचित व्यापार व्यवहार को लेकर अमेजन जैसी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। फ्यूचर समूह के अधिग्रहण को लेकर अमेजन की पहले ही कानूनी लड़ाई चल रही है और वह भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग  की जांच का सामना कर रहा है। पाञ्चजन्य की यह आवरण कथा भी हिट रही और यह अंक इस आवरण कथा के कारण पहचाना गया।    

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