गुजरात: विख्यात धोलावीरा को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल के रूप में दी मान्यता
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होम भारत गुजरात

गुजरात: विख्यात धोलावीरा को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल के रूप में दी मान्यता

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jul 28, 2021, 03:36 pm IST
inगुजरात

गुजरात स्थित हड़प्पा कालीन स्थल धोलावीरा से संबंधित भारतीय नामांकन को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल किया है।  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट कर इस पर खुशी व्यक्त की । 


 

गुजरात स्थित हड़प्पा कालीन स्थल धोलावीरा से संबंधित भारतीय नामांकन को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल किया है। भारत ने जनवरी, 2020 में “धोलावीरा; हड़प्पा कालीन नगर से विश्व धरोहर स्थल तक” शीर्षक से अपना नामांकन जमा किया था। यह स्थल 2014 से यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल था। हड़प्पाकालीन नगर धोलावीरा दक्षिण एशिया में संरक्षित प्रमुख नगर जीवन स्थलों में एक है और जिसका इतिहास तीसरी शताब्दी ईसा-पूर्व से लेकर दूसरी शताब्दी ईसा-पूर्व के मध्य तक का है।

धोलावीरा के विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट किया – “इस समाचार से बेहद खुश हूं। धोलावीरा एक प्रमुख जीवन स्थल था और यह हमारे अतीत के साथ जोड़ने वाले सबसे प्रमुख संपर्कों में से हैं। जिन लोगों की इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व में रुचि है, उन्हें यह स्थल जरूर देखना चाहिए।”

इस सफल नामांकन के साथ भारत के कुल 40 विश्व धरोहर स्थल हैं। इनमें 32 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और एक मिश्रित संपत्ति हैं। केंद्रीय संस्कृति मंत्री ने उन देशों का भी उल्लेख किया, जहां 40 या इससे अधिक विश्व धरोहर स्थल हैं. इनमें भारत के अलावा अब इटली, स्पेन, जर्मनी, चीन व फ्रांस शामिल हैं।

धोलावीरा: हड़प्पा संस्कृति का यह नगर, दक्षिण एशिया में तीसरी से मध्य-दूसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व काल की चंद सबसे अच्छे से संरक्षित प्राचीन शहरी बस्तियों में से है। अब तक खोजे गए 1,000 से अधिक हड़प्पा स्थलों में छठा सबसे बड़ा और 1,500 से अधिक वर्षों तक मौजूद रहा धोलावीरा न सिर्फ मानव जाति की इस प्रारंभिक सभ्यता के उत्थान और पतन की पूरी यात्रा का गवाह है, बल्कि शहरी नियोजन, निर्माण तकनीक, जल प्रबंधन, सामाजिक शासन और विकास, कला, निर्माण, व्यापार और आस्था प्रणाली के संदर्भ में भी अपनी बहुमुखी उपलब्धियों को प्रदर्शित करता है। अपनी अत्यंत समृद्ध कलाकृतियों के साथ, धोलावीरा की बड़ी अच्छी तरह से संरक्षित ये शहरी बस्ती, अपनी बेहद खास विशेषताओं वाले इस क्षेत्रीय केंद्र की एक जीवंत तस्वीर दर्शाती है, जो समग्र रूप से हड़प्पा सभ्यता के मौजूदा ज्ञान में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।

धोलावीरा दरअसल हड़प्पा सभ्यता (शुरुआती, परिपक्व और इसके बाद के हड़प्पा दौर वाले) से संबंधित एक आद्य-ऐतिहासिक कांस्य युग वाली शहरी बस्‍ती का एक उत्‍कृष्‍ट उदाहरण है और वहां तीसरी और दूसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व के दौरान एक बहु-सांस्कृतिक एवं वर्गीकृत समाज होने के अनेक प्रमाण मिलते हैं। हड़प्पा सभ्यता के प्रारंभिक हड़प्पा चरण के दौरान 3000 ईसा पूर्व के शुरुआती साक्ष्य मिले हैं। यह नगर लगभग 1,500 वर्षों तक खूब फला-फूला जिससे वहां काफी लंबे समय तक लोगों के निरंतर निवास करने के संकेत मिलते हैं। यहां पर उत्खनन के जो अवशेष हैं वे स्पष्ट रूप से बस्ती की उत्पत्ति, उसके विकास, चरम पर पहुंचने और फि‍र बाद में उसके पतन का संकेत देते हैं जो इस नगर के स्‍वरूप एवं स्थापत्य तत्वों या घटकों में निरंतर होने वाले परिवर्तनों के साथ-साथ विभिन्न अन्य विशेषताओं में स्‍पष्‍ट तौर पर परिलक्षित होते हैं.

धोलावीरा अ‍पनी पूर्व नियोजित नगर योजना, बहु-स्तरीय किलेबंदी, परिष्कृत जलाशयों और जल निकासी प्रणाली, और निर्माण सामग्री के रूप में पत्थर के व्यापक उपयोग के साथ हड़प्पा शहरी नियोजन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। ये विशेषताएं हड़प्पा सभ्यता के पूरे क्षेत्र में धोलावीरा की अनूठी स्थिति को दर्शाती हैं।

पानी की उपलब्ध हर बूंद को इकट्ठा करने के लिए डिज़ाइन की गई विस्तृत जल प्रबंधन प्रणाली लोगों की तेज़ भू-जलवायु परिवर्तनों के मुकाबले जीवित रहने की सरलता को दर्शाती है। मौसमी जलधाराओं, अल्प वर्षा और उपलब्ध भूमि से अलग किए गए पानी को बड़े पत्थरों के जलाशयों में संग्रहित किया गया था, जो पूर्वी और दक्षिणी किलेबंदी के साथ मौजूद हैं। पानी तक पहुंचने के लिए, कुछ पत्थर के कुएं, जो सबसे पुराने उदाहरणों में से एक हैं, नगर के विभिन्न हिस्सों में स्पष्ट रूप से मौजूद हैं, और इनमें से सबसे प्रभावशाली एक कुआं नगर में स्थित है। धोलावीरा के इस तरह के विस्तृत जल संरक्षण के अद्वितीय तरीके हैं और प्राचीन दुनिया की सबसे कुशल प्रणालियों में से एक मानी जाती हैं।

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