आदिगुरु शिव का अवतरण
August 16, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

आदिगुरु शिव का अवतरण

Written byArchiveArchive
Jul 18, 2015, 12:00 am IST
inArchive

दिंनाक: 18 Jul 2015 12:00:34

गुरु पूर्णिमा की रात को प्रथम गुरु-आदिगुरु-शिव की रात माना जाता है। वह पहले गुरु हैं और वही आखिरी भी हैं। बीच वाले सिर्फ उनके सहायक हैं। इसी दिन मानव जाति के इतिहास में पहली बार, लोगों को यह याद दिलाया गया था कि उनका जीवन पहले से तय किया हुआ नहीं है-वे फंसे हुए नहीं हैं। अगर वे कोशिश करना चाहें, तो अस्तित्व का हर द्वार खुला है। मनुष्य ने अभी तक इस ज्ञान की गहराई,और इसकी क्षमता को पूरी तरह नहीं समझा है। मनुष्य का विवेक इतना विकसित है कि उसे खुद पर लगाई गई सीमा से कष्ट होता है। उसे यातना से अधिक कैद से कष्ट होता है। जिस पल वो कैद में महसूस करता है, उसे अत्यंत पीड़ा होती है ।
इसलिए यह सम्भावना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे मनुष्य प्रकृति की बंदिशों से मुक्त हो सकता है। हम भारत की और थोड़ा-बहुत अमरीका की जेलों में कार्यक्रम करते रहे हैं। मैं जब भी जेल में प्रवेश करता हूं, मुझे वहां के माहौल में पीड़ा महसूस होती है। वहां हवा में बहुत अधिक पीड़ा होती है। इस अनुभव को मैं कभी बयान नहीं कर सकता। मैं भावुक किस्म का आदमी नहीं हूं। लेकिन ऐसा एक बार भी नहीं हुआ कि मैं जेल गया और मेरी आंखें आंसुओं से न भर गई हों। वहां के माहौल में ही बहुत पीड़ा होती है, सिर्फ पीड़ा, क्योंकि यह कैद की पीड़ा है। एक इंसान को किसी और चीज से अधिक कैद से कष्ट होता है। इसे जानते हुए, एक इंसान की इस मूल प्रकृति को समझते हुए आदियोगी ने मुक्ति की बात की।
इस संस्कृति ने मुक्ति को सर्वोच्च और इकलौते लक्ष्य के रूप में अपनाया है। यहां आप अपने जीवन में जो कुछ भी करते हैं, वह सिर्फ आपके मोक्ष के लिए होता है। कैद चाहे किसी भी किस्म की हो-चाहे वह जेल के पहरेदारों ने लगाई गई हो, स्कूल के शिक्षकों ने लगाई हो, शादी ने लगाई हो, या बस प्रकृति के नियमों का बंधन हो, चाहे उसकी वजह कुछ भी हो, मनुष्य कैद को बर्दाश्त नहीं कर सकता क्योंकि उसकी स्वाभाविक चाह मोक्ष की होती है।
कुछ हजार साल पहले, सभी मतों के बनने से पहले इसी दिन पहली बार आदियोगी ने उपदेश दिया था। खुशकिस्मती से उस समय पृथ्वी पर संप्रदायवादी मतों की कोई धारणा नहीं थी। उन्होंने न सिर्फ लोगों को याद दिलाया, बल्कि उन्होंने इस कैद से बाहर निकलने के तरीके भी बताए। वरना इससे पहले लोग सिर्फ 'थोड़ा-और' पाना चाहते थे। वे सबकुछ एक साथ पाने के बारे में कभी नहीं सोचते थे।
आदिगुरु शिव ने अचानक से अस्तित्व और सृष्टि के स्रोत के बारे में लोगों के अनुभव और समझ में भारी बदलाव ला दिया। उन्होंने सृष्टि के एक छोटे अंश और सृष्टि के स्रोत के बीच खुद को पुल बना दिया। उन्होंने कहा, 'अगर आप इस मार्ग पर चलें, तो आप, और आप जिसे स्रष्टा कहते हैं, इन दोनों के बीच कोई फर्क नहीं रह जाएगा।' यह सृष्टि से स्रष्टा तक का सफर है। इसी दिन मानव जाति को इतना शानदार अवसर हासिल हुआ। कुछ समय पहले तक इस दिन को इस देश और इस संस्कृति में सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता था। इस आध्यात्मिक संभावना का असर इस देश से दूर देशों में भी फैला।
जब आदिगुरु शिव ने उपदेश दिया, तो उन्होंने न धर्म की बात की, न सिद्धांत  की, न ही वह किसी तरह के मत को प्रचारित कर रहे थे। वह एक वैज्ञानिक पद्धति की बात कर रहे थे, जिससे आप प्रकृति द्वारा मानव जीवन के लिए तय की गई सीमाओं को नष्ट कर सकते हैं। उन्होंने यह बताया कि कितने तरीकों से आप मोक्ष पा सकते हैं, और प्रकृति ने जीवन के लिए किस तरह की सीमाएं तय की हैं। हम जो भी सीमाएं बनाते हैं, शुरुआत में उनका मकसद सुरक्षा होता है। हम आश्रम के चारों ओर भी बाड़ लगाते हैं लेकिन उसका मकसद सुरक्षा होता है। आत्मरक्षा की सीमाएं कैद की सीमाएं तब बन जाती हैं, जब आप भूल जाते हैं कि आपने ये सीमाएं किसलिए बनाई थीं। और ये सीमाएं किसी एक रूप में नहीं होतीं। ये बहुत सारे जटिल रूप अपना लेती हैं।
मैं सिर्फ उन मनोवैज्ञानिक सीमाओं की बात नहीं कर रहा, जो आपने अपने लिए बनाई  हैं। मैं आपकी सुरक्षा और खुशहाली के लिए प्रकृति द्वारा बनाई गई सीमाओं की भी बात कर रहा हूं। मानव स्वभाव ऐसा है कि जब तक आप सीमाओं को पार नहीं करते, तब तक आप परम आनंद का अनुभव नहीं कर सकते। यही मानव की दुर्दशा है। जब आप खतरे में होते हैं, तब आप अपने चारों ओर किला बना लेते हैं। लेकिन जैसे ही खतरा टल जाता है, आप उसे नष्ट करना चाहते हैं। पर जब ऐसा नहीं होता, तब आप खुद को कैद में महसूस करते हैं।
आदिगुरु शिव ने हमें जागरूकता पाने के ऐसे साधन दिए हैं, जो हमें इन सीमाओं के पार ले जाते हैं। साथ ही वे हमें सुरक्षित रखते हैं, और हमें कैद नहीं करते। खुद प्रकृति के मूल मायावी स्वभाव का उपयोग करते हुए उन्होंने बहुत से तरीके बनाए। बदकिस्मती से मुट्ठी भर इंसानों में भी अपनी सीमाओं के परे जाने के लिए जरूरी एकाग्रता, धैर्य और दिलचस्पी नहीं है। उन्हें लगता है कि वे कैद से निकलने के लिए नशीली दवाएं ले सकते हैं, धुआं उड़ा सकते हैं या शराब पी सकते हैं या खूब खा सकते हैं, या फिर खूब सो सकते हैं।
सृष्टि के तरीके इतने सरल नहीं हैं। यह हिफाजत का कितना अनोखा डिजाइन है! पर जो इंसान नहीं देख पाता कि यह अंदर और बाहर दोनों तरफ से बंधन है, वह इसका मकसद नहीं जान पाता, क्योंकि वह कभी बाहर जा ही नहीं पाया है।
गुरुपूर्णिमा का दिन इस बात का उत्सव मनाने के लिए है कि आज के ही दिन पहली बार मानव जाति के लिए ऐसी नयी सोच, ऐसा असाधारण काम शुरू हुआ। मैं आदियोगी के आगे उनकी महानता के लिए सिर  झुकाता हूं।     
सद्गुरु

Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य

स्वतंत्रता संग्राम से सांस्कृतिक पुनर्जागरण तक: गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का प्रेरक जीवन

वंदे मातरम गायन के दौरान असहज हुईं सोनिया गांधी

क्या पूरा ‘वंदे मातरम’ गाए जाने पर असहज हुईं सोनिया गांधी? खरगे के साथ बातचीत का Video वायरल, BJP हमलावर

श्री कृष्णगोपाल जी ने दिल्ली में केशवकुंज में फहराया तिरंगा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री कृष्ण गोपाल जी ने केशवकुंज में किया ध्वजारोहण

कोलकाता स्थित संघ कार्यालय में तिरंगा फहराते सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले

देश की स्वतंत्रता को सुरक्षित बनाए रखना वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी : सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले

नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में तिरंगा फहराते सरसंघचालक श्री मोहन भागवत

स्वतंत्रता दिवस: सरसंघचालक श्री मोहन भागवत ने फहराया तिरंगा, कहा- आजादी की रक्षा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी

भारत के विभाजन के साथ, पाकिस्तान की स्थापना ने न केवल भौगोलिक विभाजन किया बल्कि दीर्घकालिक सुरक्षा संकट का द्वार भी खोला

भारत विभाजन से हमने क्या सीखा ?

Load More

ताज़ा समाचार

पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य

स्वतंत्रता संग्राम से सांस्कृतिक पुनर्जागरण तक: गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का प्रेरक जीवन

वंदे मातरम गायन के दौरान असहज हुईं सोनिया गांधी

क्या पूरा ‘वंदे मातरम’ गाए जाने पर असहज हुईं सोनिया गांधी? खरगे के साथ बातचीत का Video वायरल, BJP हमलावर

श्री कृष्णगोपाल जी ने दिल्ली में केशवकुंज में फहराया तिरंगा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री कृष्ण गोपाल जी ने केशवकुंज में किया ध्वजारोहण

कोलकाता स्थित संघ कार्यालय में तिरंगा फहराते सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले

देश की स्वतंत्रता को सुरक्षित बनाए रखना वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी : सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले

नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में तिरंगा फहराते सरसंघचालक श्री मोहन भागवत

स्वतंत्रता दिवस: सरसंघचालक श्री मोहन भागवत ने फहराया तिरंगा, कहा- आजादी की रक्षा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी

भारत के विभाजन के साथ, पाकिस्तान की स्थापना ने न केवल भौगोलिक विभाजन किया बल्कि दीर्घकालिक सुरक्षा संकट का द्वार भी खोला

भारत विभाजन से हमने क्या सीखा ?

Bharat Bhushan tiwari Fact check

फैक्ट चेक: झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा पत्थरबाजी का दावा झूठा

Income Tax filing

Explainer: विदेशी बैंक अकाउंट, प्रॉपर्टी व जेवरात का खुलासा: क्या है छोटे टैक्सपेयर्स के लिए CBDT की नई स्कीम?

लोकसभा में राहुल गांधी

राहुल गांधी लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह से नदारद, भाजपा बोली- ये ‘दिमागी नक्सल’ मानसिकता

Pojk protest

PoJK में पाकिस्तान के अत्याचार के खिलाफ सुधनोटी, हजीरा मंढोल और ब्रुसेल्स में विरोध

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies