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प्रतिष्ठित साहित्यकार और उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल आचार्य विष्णुकान्त शास्त्री की 10वीं पुण्यतिथि पर 17 अप्रैल को कोलकाता के श्रीबड़ाबाजार पुस्तकालय में एक समारोह आयोजित किया गया। समारोह के मुख्य वक्ता और आई.आई.टी., खड़गपुर के हिन्दी अधिकारी डॉ. राजीव रावत ने आचार्य विष्णुकान्त के साहित्यिक कृतित्व के महत्वपूर्ण पक्षों को उद्घाटित किया।
उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तित्व विरले ही होते हैं जो अपनी लेखनी, वाणी तथा आचरण से लोगों के दिलों पर स्थाई छाप छोड़ते हैं। आर्य समाज, कोलकाता के श्री योगेश राज उपाध्याय ने शास्त्री जी की सर्वजनप्रियता तथा उनके सौम्य-शालीन प्रभावी व्यक्तित्व का उल्लेख किया। अध्यक्षता पुस्तकालय के अध्यक्ष डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने की। समारोह में साहित्य, कला आदि क्षेत्रों के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे। ल्ल प्रतिनिधि
संघ बना रहा है भारत सीमा पर छात्रावास
देश की सीमाओं की सुरक्षा के सम्बंध में सरकारों को बराबर सचेत करने के साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने स्तर पर भी प्रयास शुरू कर दिए हैं। चीन की सीमा से लगे उत्तराखण्ड के सीमांत जिलों में संघ छात्रावास खोल रहा है। उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़, चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग आदि जिले चीन की सीमा के नजदीक हैं। वहां आए दिन चीनियों की घुसपैठ की शिकायतें आती रहती हैं। ताजा हालात के मद्देनजर संघ ने सीमा सुरक्षा के प्रति दृष्टिकोण बदला है और उत्तरांचल दैवी आपदा पीडि़त सहायता समिति के जरिए छात्रावासों का निर्माण करा रहा है। प्रांत प्रचारक डॉ़ हरीश रौतेला ने बताया कि इन छात्रावासों में रहने वाले छात्र लोगों को सीमा सुरक्षा के प्रति सजग करेंगे, गांवों के उत्थान में सहयोग और लोगों में पलायन की प्रवृत्ति दूर करने के लिए काम करेंगे।
सीमांत जिलों में छात्रावासों की श्रृंखला का शुभारंभ केदारधाम से हो गया है। 9 अप्रैल को यहां छात्रावास का भूमि-पूजन हुआ। इस दौरान संघ के क्षेत्र प्रचारक (पश्चिम) श्री आलोक, उत्तराचंल दैवी आपदा पीडि़त सहायता समिति के अध्यक्ष श्री दिनेश गुप्ता और दूसरे अधिकारी मौजूद थे।
छात्रावासों की योजना नैटवाड़ बेल्ट, पुरोला, धारचूला और टौंस घाटी में शुरू हो गई है। कुछ सीमांत क्षेत्रों में छात्रावास निर्माण के लिए भूमि तलाशी जा रही है। छात्रावासों के साथ ही स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना, क्षेत्रीय विकास कार्य और समाज सुधार की योजनाओं की शुरुआत भी की जाएगी। उल्लेखनीय है कि सीमावर्ती गांवों में सुविधाओं का अभाव होने से गांव खाली हो रहे हैं। लोग रोजी-रोटी के लिए शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।
गांवों में खाली पड़े घरों पर असामाजिक तत्व कब्जा जमा रहे हैं। इससे अनेक तरह की समस्याएं पैदा हो रही हैं। उनका समाधान लोगों के पलायन को रोक कर ही किया जा सकता है। कार्यकर्ता पूरे क्षेत्र में घूम-घूमकर समस्याओं की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। इस दौरान कई ऐसी जानकारियां मिल रही हैं, जो चौकाने वाली हैं। इनका समाधान जल्दी हो! ल्ल वि.सं.केन्द्र, देहरादून











