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भाजपा के वरिष्ठ नेता केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपीनाथ पाण्डुरंग मुंडे का 3 जून की सुबह करीब साढ़े छह बजे नई दिल्ली में एक सड़क दुर्घटना में देहावसान हो गया। आरंभिक जांच से पता चला है कि उनकी कार से बगल की सड़क से तेजी से आती कार टकरा गई थी। उसके बाद कुछ क्षण होश में रहने के बाद मुंडे अचेत हो गए थे। उनका वाहन चालक और सुरक्षाकर्मी उन्हें पास ही एम्स अस्पताल ले गए, जहां डाक्टरों ने करीब 50 मिनट तक उन्हें होश में लाने की असफल कोशिश की, किन्तु अत्यधिक खून बह जाने की वजह से दिमाग और शरीर के अन्य अंगों ने काम करना बंद कर दिया और करीब 8 बजे भाजपा के वरिष्ठ नेता श्री नितिन गडकरी ने मीडिया को उनके देहावसान की सूचना दी। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन सुबह से ही अस्पताल में उपस्थित थे। उन्होंने भी बताया कि बाहरी तौर पर कोई चोट न आने के बावजूद अंदरूनी चोट की वजह से श्री मुंडे का निधन हो गया।
श्री मुंडे के निधन की खबर सुनते ही उनके समर्थक, भाजपा के कार्यकर्ता और केन्द्रीय मंत्री, सांसद केन्द्रीय कार्यालय 11 अशोक रोड पहंुचने लगे। पोस्टमार्टम के बाद दोपहर लगभग 1 बजे पार्थिव देह अंतिम दर्शनों के लिए वहां लाई गई। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, वरिष्ठ नेता श्री लालकृष्ण आडवाणी सहित अनेक मंत्रियों, सांसदों और सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने दिवंगत नेता को पुष्पाञ्जलि अर्पित की। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की ओर से पुष्पचक्र अर्पित किए गए। राजग के तमाम सहयोगी दलों के नेताओं ने भी स्वयं उपस्थित होकर उन्हें पुष्पाञ्जलि अर्पित की।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत, सरकार्यवाह श्री भेैयाजी जोशी और सहसरकार्यवाह श्री सुरेश सोनी, विश्व हिन्दू परिषद के संरक्षक श्री अशोक सिंहल ने भी भाजपा कार्यालय पहंुचकर श्री मुंडे की पार्थिव देह पर पुष्प अर्पित किए।
विधि की कैसी विडम्बना है कि हाल ही में बीड से लोकसभा चुनाव जीतने वाले श्री मुंडे वहां के समर्थकों द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह में भाग लेने के लिए मुम्बई रवाना हो रहे थे और रास्ते में यह हादसा हो गया। छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय 64 वर्षीय मुंडे वंचितों और किसानों के मुद्दे खूब प्रखरता से उठाते थे। वे समाज में अंतिम स्थान पर खड़े व्यक्ति की चिंता करते थे इसीलिए उनके चाहने वाले उन्हें जमीन से जुड़ा नेता बताते थे। 15वीं लोकसभा में भाजपा संसदीय दल के उपनेता के रूप में उन्होंने सभी दलों के नेताओं के दिल में ऐसी जगह बनाई कि उनके निधन पर दलगत विरोध भुलाकर वे उन्हें अपनी श्रद्धाञ्जलि अर्पित करने भाजपा कार्यालय पहंुचे थे। ऐसे नेताओं में प्रमुख थे, कांग्रेस उपाध्यक्ष श्री राहुल गांधी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत, राकांपा के अध्यक्ष शरद पवार, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पूर्णो संगमा, उनकी पुत्री अगाथा, भाकपा के नेता अतुल अंजान। करीब 2.20 पर फूलों से सजी तोपगाड़ी पर उनकी पार्थिव देह भाजपा मुख्यालय से हवाई अड्डे के लिए रवाना हुई। इस मौके पर सैनिकों ने बंदूकें नीची करके और बिगुल पर मातमी धुन बजाकर दिवंगत नेता को विदा किया। वाहन के पीछे सैकड़ों कार्यकर्ता 'भारत माता की जय', 'गोपीनाथ मुंडे अमर रहें' का उद्घोष कर रहे थे। दिल्ली हवाई अड्डे से विशेष विमान से उनकी पार्थिव देह उनके मुम्बई स्थित निवास स्थान ले जाई गई।
अगले दिन 4 जून की सुबह मुम्बई से लातूर होते हुए स्व. मुंडे की पार्थिव देह को अंतिम संस्कार के लिए बीड में उनके पैतृक गांव ले जाया गया जहां करीब 1.50 पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। जैसे ही उनकी बड़ी बेटी पंकजा ने उन्हें मुखाग्नि दी, सारा माहौल भावुक हो उठा, 'गोपीनाथ मुंडे अमर रहें' के नारे गूंज उठे। इस अवसर पर राजनीतिक-सामाजिक जगत के अनेक गणमान्यजन उपस्थित थे। भाजपा के अनेक वरिष्ठ नेता, केन्द्रीय मंत्री, सांसद, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, म.न.से. प्रमुख राजठाकरे और श्री मुंडे के चुनाव क्षेत्र के उनके लाखों समर्थकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धाञ्जलि दी।मुंडे जुझारु नेता थे। राजनीति में उनका पदार्पण 1976 में पुणे से कानून की पढ़ाई करने के साथ ही हो गया था। वे भाजपा में सक्रिय हुए और पांच बार महाराष्ट्र में विधायक रहे। 1991 से 1995 के बीच महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे। मार्च 1995 में उन्हें राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाया गया। 2009 में उन्होंने बीड से लोकसभा चुनाव जीता था और अब 2014 में भी उन्हें बीड की जनता ने अपना प्रतिनिधि चुनकर लोकसभा में भेजा था। लेकिन 3 जून की भोर उनके लिए काल रात्रि बनकर आई और ऐसे सदा मुस्कुराते व्यक्तित्व को हमसे छीन ले गई।
पाञ्चजन्य ब्यूरो











