पाकिस्तानी फौजी के बेटे सामी पर क्यों मेहरबानी!
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पाकिस्तानी फौजी के बेटे सामी पर क्यों मेहरबानी!

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Nov 9, 2013, 12:00 am IST
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दिंनाक: 09 Nov 2013 15:40:31

० 65 और 71 की लड़ाई में पाकिस्तानी वायुसेना से लड़े फ्लाइट लेफ्टिनेंट अरशद सामी के पुत्र हैं अदनाम सामी ०  अदनान एक अर्से से भारत में वीसा की तिथि बढ़वाकर रह रहे हैं और पैसा बना रहे हैं ० भारत के किसी गायक को पाकिस्तान सरकार अपने यहां आकर गाने का मौका नहीं देती
पहले एक सवाल। क्या कारगिल या उससे पहले 1965 या 1971 में पाकिस्तान के साथ हुई जंग के नायक के पुत्र या पुत्री को पाकिस्तान में 'सेलिब्रिटी' का दर्जा मिल सकता है ? जरा सोचिए। सोचने के बाद आप कहेंगे ह्य कतई नहीं।' जाहिर है,आप इस तरह की उम्मीद नहीं कर सकते कि पाकिस्तान के साथ हुई जंग के किसी भारतीय नायक को या उसकी संतान को पाकिस्तान में कोई सम्मानजनक स्थान मिलेगा। ये भी लगभग नामुमकिन है कि भारतीय सेना के किसी योद्घा का अस्वस्थ होने पर पाकिस्तान में इलाज हो। पर यह सब भारत में हुआ और हो रहा है। बरसों से हो रहा है।
अब असली मुद्घे पर आते हैं। फ्लाइट लेफ्टिनेंट अरशद सामी खान को पाकिस्तान अपने सबसे आदरणीय योद्घाओं की श्रेणी में रखता है। वे उन्हीं अदनान सामी के पिता थे, जो गीत-संगीत से ज्यादा घरेलू पचड़ों में फंसे रहते हैं। हाल ही में अदनान सामी को भारत छोड़ने के लिए भी कहा गया था। उनका भारत में प्रवास का वीजा समाप्त हो गया था। उसका नवीनीकरण नहीं हुआ था। बाद में उन्होंने अपील की तो मामला सुलझता नजर आ रहा है। यानी वे भारत में आगे भी रहते रहेंगे। अब फिर फ्लाइट लेफ्टिनेंट अरशद सामी खान पर लौटते हैं। उनका खास तौर पर उल्लेख पाकिस्तानी वायुसेना के संग्रहालय और वेबसाइट में किया गया है। उनके चित्र के साथ उनकी बहादुरी का बखान करते हुए कहा गया है, ह्यफ्लाइट लेफ्टिनेंट अरशद सामी खान ने भारत के खिलाफ 1965 की जंग में शत्रु (भारत) के एक लड़ाकू विमान,15 टैंकों और 12 वाहनों को नष्ट किया। वे रणभूमि में विपरीत हालतों के बावजूद शत्रु की सेना का बहादुरी से मुकाबला करते रहे। फ्लाइट लेफ्टिनेंट अरशद सामी खान को उनकी बहादुरी के लिए सितारा-ए-जुर्रत से नवाजा जाता है।ह्ण स्वाभाविक रूप से फ्लाइट लेफ्टिनेंट अरशद सामी खान के संबंध में किए गए इस दावे की जांच की जरूरत नहीं है। सभी देश अपने योद्घाओं के रणभूमि के कारनामों को महिमामंडित करते हैं। पाकिस्तान तो इस तरह के दावों को करने में बहुत आगे रहा है।
फ्लाइट लेफ्टिनेंट अरशद सामी खान वायुसेना से रिटायर होने के बाद भी पाकिस्तान के सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे। डेनमार्क और नार्वे में राजदूत भी रहे। वे पाकिस्तान के राष्ट्रपतियों क्रमश:  गुलाम इसहाक खान, फारुख लेगारी और प्रधानमंत्रियों, बेनजीर भुट्टो,गुलाम मुस्तफा जोतोई और नवाज शरीफ के निजी स्टाफ में भी रहे। यानी पाकिस्तान में उनका एक अहम रुतबा रहा। उन्हें 14 अगस्त, 2012 में मरणोपरांत सितारा-ए-इम्तियाज से भी सम्मानित किया गया।
बहरहाल, फ्लाइट लेफ्टिनेंट अरशद सामी खान को अपने मुल्क में जितना भी सम्मान मिले, इससे हमें क्या फर्क पड़ता है। पर आप हैरान होंगे कि उसी फ्लाइट लेफ्टिनेंट सामी की किताब का विमोचन राजधानी नई दिल्ली में होता है। ये बात है 28 फरवरी,2008 की। पुस्तक का नाम था- ह्यथ्री प्रेसिडेंट एंड… लाइफ पवर एंड पलिटिक्स।ह्ण उस विमोचन के मौके पर पूर्व प्रधानमंत्री आई.के. गुजराल और पंजाब के मुख्यमंत्री रहे अमरिंदर सिंह समेत राजधानी के सेमिनार सर्किट के तमाम नामी-गिरामी लोग मौजूद थे। गुजराल ने किताब का विमोचन किया। उन्होंने भारत-पाकिस्तान संबंधों पर अपने ख्यालात रखे। सामी अपनी किताब पर बोले। कुछ लोगों ने भारत-पाक संबंधों पर सवाल पूछे। उन्होंने अमन और बातचीत की वकालत की। पर, वे 1965 की जंग से जुड़े किसी भी मसले पर बात करने के लिए तैयार नहीं थे। वे अंग्रेजी,उर्दू और पंजाबी में गुफ्तुगू कर रहे थे। वहां पर ही पता चला कि सामी कौन हैं और अदनान सामी का उनसे क्या संबंध है। अदनान सामी उस कार्यक्रम में मौजूद नहीं थे।
 उसके बाद एक रोज खबर आई कि फ्लाइट लेफ्टिनेंट अरशद सामी खान का मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में निधन हो गया। वे केंसर से पीडि़त थे। पाकिस्तान और कुछ और देशों में इलाज चला था। उसके बाद अदनान सामी उन्हें इलाज के लिए मुंबई ले आए। तब ये बात काफी दिनों तक दिल के किसी कोने में चलती रही कि क्या हमारा दिल इतना विशाल है, कि हम उसे भी अपना अतिथि बनाने-मानने के लिए तैयार हो जाते हैं, जिसने हमारे खिलाफ जंग लड़ी हो? क्या 1971 की जंग के भारतीय नायक सैम मानेकशाह को पाकिस्तान में अपनी पुस्तक विमोचित करने का मौका मिलता?  क्या उनके या उनके जैसे किसी भारतीय योद्घा की संतान को पाकिस्तान में वही दर्जा मिल सकता था,जो हमने अदनान सामी को अपने यहां दिया है?
फ्लाइट लेफ्टिनेंट अरशद सामी खान की पुस्तक के विमोचन से लेकर उनका भारत में अपना इलाज करवाना और भारत की सरजमीं पर अंतिम सांसें लेना इस बात की गवाही हैं कि हम अलग हैं। क्या ये कोई मामूली बात है।  इसलिए हम चाहें तो अपने ह्यइन्क्रेडिबल इंडियाह्ण का नागरिक होने का दावा कर सकते हैं।
पिछले दिनों जब पाकिस्तान के गायक अदनान सामी के भारत छोड़ने संबंधी खबरें आईं तो उनके अब्बा का ख्याल बरबस ही तैर आ गया। उस कार्यक्रम का सारा माहौल भी दिमाग में फिर से जीवंत होने लगा। तब लगा कि जिस शख्स को भारत के खिलाफ बहादुरी से जंग लड़ने पर सम्मानित किया गया हो, उसके पुत्र को देश छोड़ने के लिए कहना कितना उचित है। वह तो करीब डेढ़ दशक से भारत में रह रहा है। यहां पर गीत-संगीत की दुनिया में अपने लिए एक मुकाम बना भी चुका है। मतलब यह कि अदनान सामी को तो अब हम ह्यअपनाह्ण ही मानते हैं।  
छात्रा से ईसाई प्राचार्य ने किया दुष्कर्म
बानरहाट थाना क्षेत्र (सिलीगुड़ी) के अंतर्गत केलाबाड़ी स्थित लोयोला हाई मिशनरी स्कूल के प्राचार्य पर दसवीं कक्षा की एक छात्रा से दुष्कर्म के प्रयास का आरोप लगा है। इस संबंध में बानरहाट पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी प्राचार्य फिलोमन तिर्की को गिरफ्तार कर लिया है।
पीडि़ता कन्या छात्रावास में रहती थी। उसने अभिभावकों को बताया कि प्राचार्य फिलोमन ने उसे अपने कमरे में पढ़ाई के बहाने से बुलाया था। इसके बाद उसने छेड़छाड़ शुरू कर दी और दुष्कर्म का प्रयास किया। उसने विरोध किया तो प्राचार्य ने छात्रा के कपड़े फाड़ दिये। यही नहीं, शोर सुनकर जब साथ वाले छात्रावास से छात्र पहंुचे तो उन्हें धमकाकर प्राचार्य ने भगा दिया। छात्रा को उसके घर भी नहीं जाने दिया गया। बाद में वह स्कूल से सीधे अपने घर पहंुची। इस घटना की जानकारी मिलने के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की उग्र भीड़ स्कूल पर एकत्रित हो गई। उग्र भीड़ ने प्राचार्य के बंगले सहित छात्रावास में तोड़फोड़ भी की, जिसे रोकने के लिये पुलिस बल को बुलाना पड़ा। पुलिस की मौजूदगी में आरोपी प्राचार्य को थाने ले जाया गया। स्कूल के छात्रावास में कुल 25 छात्र/छात्राएं रहते हैं। इन सभी ने प्राचार्य के गलत आचरण को लेकर पुलिस से शिकायत की। इसके बाद पीडि़तों ने आरोपी को सख्त सजा दिलाने की मांग की। मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि इस क्षेत्र में कई मिशनरी स्कूल हैं, जहां पर समय-समय पर छात्राओं के यौनाचार के मामले उजागर होते रहते हैं। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन तनावपूर्ण बनी हुई है।  बासुदेव पाल
अमरीकी संसद में मनी पहली बार दीपावली
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मना पर्व
पिछले दिनों अमरीका की संसद में  पूरे विधि विधान से दीपावली का त्योहार मनाया गया। यह पहला अवसर था जब अमरीका की संसद में यह त्योहार मनाया जा रहा था। परंपरागत दीया जलाने के लिए अमरीकी संसद कैपिटल हिल में करीब दो दर्जन सांसद और भारतीय मूल के प्रसिद्घ अमरीकी जमा हुए । कैपिटल हिल में अपने तरह के इस पहले समारोह का आयोजन सांसद जोए क्राउले और पीटर रस्कैम द्वारा किया गया। इस मौके पर भारत-अमेरिका संबंधों के महत्व का भी उल्लेख किया गया। अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस अफ रिप्रेजेंटेटिव में डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता नैंसी पेलोसी ने कहा कि मैं यहां शुभ दीपावली कहने के लिए आई हूं। अमरीका भारत का अहसानमंद है, क्योंकि अमरीका का नागरिक अधिकार आंदोलन भारत के अहिंसक आंदोलन पर आधारित था। मार्टिन लूथर किंग ने भारत में पढ़ाई की थी । हम खुशकिस्मत हैं कि अमरीका में बहुत से भारतीय मूल के लोग रहते हैं। क्राउले ने कहा कि वास्तव में यह एक ऐतिहासिक पल है । रस्कैम ने कहा कि भारतीय मूल के अमरिकी व्यापक प्रभाव वाले बड़े प्रवासी समूह का उदाहरण हैं । जय हिंद के साथ अपनी संक्षिप्त टिप्पणी प्रारंभ करते हुए सांसद एड रयस ने कहा कि भारत और अमरीका के संबंधों में मजबूती आ रही है। रयस संसद की विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष हैं ।                         

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