शिक्षा, स्वदेशी और सेवा को जीवन में लागू करने से भारत विश्वगुरु बन सकता है
September 5, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

शिक्षा, स्वदेशी और सेवा को जीवन में लागू करने से भारत विश्वगुरु बन सकता है

Written byArchiveArchive
Nov 12, 2011, 12:00 am IST
inArchive

शिक्षा, स्वदेशी और सेवा को जीवन में लागू करने से भारत विश्वगुरु बन सकता है

दिंनाक: 12 Nov 2011 13:56:51

भगिनी निवेदिता के स्मृति शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में महिला सम्मेलन

–प्रमिला ताई मेढ़े, प्रमुख संचालिका, राष्ट्र सेविका समिति

प्रतिनिधि

'शिक्षा, स्वदेशी और सेवा इन तीन बिन्दुओं को यदि हम जीवन में लागू करते हैं तो हमारा देश फिर से विश्वगुरु बन सकता है। भगिनी निवेदिता के जीवन के अनेक आयाम हैं, परन्तु राष्ट्र सेविका समिति ने केवल इन तीन बिन्दुओं पर ध्यान केन्द्रित करने का निर्णय किया है।' उक्त उद्गार राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका सुश्री प्रमिला ताई मेढ़े ने गत 5 नवंबर को नई दिल्ली में भगिनी निवेदिता के स्मृतिʇशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित महिला सम्मेलन को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। वे यहां मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थीं।

सुश्री मेढ़े ने कहा कि भगिनी निवेदिता का जन्म भारत से बाहर हुआ, परन्तु भारत की धरती का स्पर्श होते ही वह अपने को भारतीय मानने लगीं। 13 अक्तूबर, 1911 को उनका महाप्रयाण हुआ। उस समय जब श्रद्धाञ्जलि सभा हुई तो उसमें रवीन्द्र नाथ ठाकुर ने कहा कि 'हम किसी कार्य के लिए अपना समय दे सकते हैं। किसी कार्य के लिए अपना शरीर दे सकते हैं। किसी कार्य के लिए अपना धन दे सकते हैं, परन्तु किसी काम के लिए अपना मन देना बहुत कठिन है और मन निवेदिता ने अपने कार्य के लिए दिया, इसलिए बहुत कम समय में वह इतना कार्य कर सकीं।'

सुश्री मेढ़े ने कहा कि भगिनी निवेदिता के जीवन के अनेक आयामों में से समिति ने तीन बिन्दुओं–शिक्षा, स्वदेशी और सेवा पर ध्यान केन्द्रित करने का निर्णय किया है। आज हमारे देश में शिक्षा की बहुत दयनीय स्थिति है। स्वाधीनता के छ: दशक बीत जाने के बाद भी हमारे देश में हमारी कोई राष्ट्रीय शिक्षा नीति नहीं है, राष्ट्रीय अर्थनीति नहीं है, राष्ट्रीय सुरक्षा नीति भी अब तक नहीं बन पाई है। परन्तु इन तीनों बिन्दुओं पर भगिनी निवेदिता ने अपने जीवन में चिंतन किया और कुछ कार्य भी किया। शिक्षा उनकी रुचि का विषय था। शिक्षा के बारे में उनका मानना था कि शिक्षा ऐसी हो कि भारत के बारे में भक्तिभाव निर्माण हो, भारत के लिए अपना जीवन देने की तैयारी हो। दूसरे विषय स्वदेशी के बारे में उनकी कल्पना मात्र इतनी नहीं थी कि दो-चार चीजें अपने देश में बनें व उनकी खरीदारी हो। स्वदेशी अर्थात स्वदेश अर्थनीति। स्वदेश अर्थनीति वह है, जो हमारे समाज के अंतिम व्यक्ति तक को दो समय का भोजन करा सकती है। व्यक्ति शांति-  सुरक्षा से रह सकता है। तीसरा बिन्दु है सेवा। हम जानते हैं कि हमारे यहां तो सेवा आंतरिक गुण है। परन्तु यह सेवा क्यों? यह इसलिए, जो व्यक्ति हमारे हैं, उसके जीवन में किसी भी प्रकार की कमी न रहे इसलिए अपनेपन की भावना से स्वार्थ की बुद्धि से नहीं। जब हम यह प्रयत्न करते हैं तो उस सेवा से हमको आनन्द मिलता है। परन्तु आज तो सेवा का अर्थ ही बदल गया है, सेवा की आड़ में हमारे देश की भोली-भाली जनता को ही नहीं, अपितु शिक्षित लोगों को भी अनेक प्रकार का लालच और आर्कषण दिखाकर मत परिवर्तन कराया जाता है। सुश्री मेढ़े ने कहा कि भगिनी निवेदिता के यह जो तीन बिंदु हैं इन पर हम अगर गौर करते हैं तो आज भी बहुत कुछ ठीक हो सकता है। भारत फिर से विश्वगुरु बन                   सकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं प्रसिद्ध लेखिका श्रीमती मृदुला सिन्हा ने कहा कि आज विकास की चर्चा तो बहुत होती है, लेकिन हमारा विकास संवेदनहीन हो गया है, हमारा मन भी संवेदनहीन हो गया है। महिला सुरक्षा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज महिलाएं हर जगह भयभीत हैं। अपने घर तक में वे अपने को सुरक्षित महसूस नहीं करतीं। लेकिन आज से 50 साल पहले ऐसा नहीं था। श्रीमती सिन्हा ने कहा कि ऐसे में महिलाओं को भयमुक्त वातावरण देना सरकार तथा समाज की जिम्मेदारी है। देश की समृद्धि पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत को समृद्ध बनाना है तो भ्रष्टाचार की समाप्ति की ओर सबको ध्यान देना होगा।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित श्रीमती किरण लड्डा ने कहा कि भारत का इतिहास महिलाओं की महान गाथाओं से भरा पड़ा है। हर क्षेत्र में महिलाओं ने उत्कृष्ट योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि परिवार में महिला का महत्वपूर्ण स्थान है और यदि परिवार को आदर्श बनाना है तो महिलाओं का जागरूक होना बहुत आवश्यक है।

कार्यक्रम में भगिनी निवेदिता के जीवन पर आधारित एक लघु नाटिका का मंचन भी किया गया, जिसे उपस्थित महिलाओं ने खूब सराहा। इस अवसर पर राष्ट्र सेविका समिति की अ.भा. सह-कार्यवाहिका श्रीमती आशा शर्मा, दिल्ली की प्रांत कार्यवाहिका श्रीमती राधा मेहता, प्रांत प्रचारिका सुश्री पूनम, रा.स्व.संघ, दिल्ली के प्रांत संघचालक श्री रमेश प्रकाश सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थीं

 

Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

महिला एशिया कप

india vs pakistan: भारत ने पाकिस्तान को बुरी तरह हराया, 55 रन पर किया ढेर, महिला एशिया कप में श्री चरणी और प्रेमा चमकीं

सौरभ दास और गौरव भाटिया

CJP प्रवक्ता सौरभ दास ने फैलाई फेक न्यूज, चेतावनी मिलते ही पोस्ट डिलीट

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

संघ का शताब्दी वर्ष और विश्व के लिए भारत का संदेश

‘वह शैतान और एंटी-क्राइस्ट था’, मां ने 2 साल के बेटे को फांसी पर लटकाकर मार दिया

फ्रांस में हिजाब का समर्थन कर रहीं फेमिनिस्ट

क्यों फ्रांस की गैर मुस्लिम फेमिनिस्ट हिजाब के समर्थन में उतरीं?

शुभेंदु अधिकारी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल

बंगाल में खुलेंगे विद्या भारती के 1000 नए स्कूल, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने की घोषणा

Load More

ताज़ा समाचार

महिला एशिया कप

india vs pakistan: भारत ने पाकिस्तान को बुरी तरह हराया, 55 रन पर किया ढेर, महिला एशिया कप में श्री चरणी और प्रेमा चमकीं

सौरभ दास और गौरव भाटिया

CJP प्रवक्ता सौरभ दास ने फैलाई फेक न्यूज, चेतावनी मिलते ही पोस्ट डिलीट

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

संघ का शताब्दी वर्ष और विश्व के लिए भारत का संदेश

‘वह शैतान और एंटी-क्राइस्ट था’, मां ने 2 साल के बेटे को फांसी पर लटकाकर मार दिया

फ्रांस में हिजाब का समर्थन कर रहीं फेमिनिस्ट

क्यों फ्रांस की गैर मुस्लिम फेमिनिस्ट हिजाब के समर्थन में उतरीं?

शुभेंदु अधिकारी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल

बंगाल में खुलेंगे विद्या भारती के 1000 नए स्कूल, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने की घोषणा

लेफ्टिनेंट शिवम अहलावत

पांच पीढ़ियां, एक रेजिमेंट, 140 साल की सेवा और देश के नाम एक अटूट विरासत

शिकागो में 1893 में आयोजित विश्व धर्म संसद के मंच पर विराजमान स्वामी विवेकानंद। इसी मंच से उन्होंने पश्चिम को हिंदू धर्म और वेदांत से परिचित कराते हुए अपना पहला भाषण दिया था।

सरसंघचालक श्री मोहन भागवत का विदेश प्रवास : क्षण-विलक्षण

बाल विवाह होगा पूरी तरह खत्म (फोटो- प्रतीकात्मक और एआई द्वारा निर्मित)

27 नवंबर: ‘अंतर्राष्ट्रीय बाल विवाह उन्मूलन दिवस’, भारत की बड़ी कूटनीतिक और सामाजिक जीत

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री दत्तात्रेय होसबाले। मंच पर बैठे हैं डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालू ‘ एवं श्री जयप्रकाश

‘अपरिचित को परिचित और परिचित को मित्र बनाएं’

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies