वंदे मातरम्! प्रश्न केवल गीत का नहीं, भारत की राष्ट्रीय दृष्टि का है
किसी राष्ट्र को केवल नक्शे से नहीं समझा जा सकता। नक्शा सीमाएं बताता है, राष्ट्र का मन नहीं। भारत का मन उस सभ्यता में बसता है जिसने धरती को माता, नदी को मां और मिट्टी को जननी माना। अथर्ववेद का ‘माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः’ इसी अनुभूति की प्राचीन अभिव्यक्ति है। इसी दीर्घ सांस्कृतिक परंपरा को … Continue reading वंदे मातरम्! प्रश्न केवल गीत का नहीं, भारत की राष्ट्रीय दृष्टि का है
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