वंदे मातरम्’ की 150 वर्ष की यात्रा पर पाञ्चजन्य पत्रिका का विशेष आयोजन

2026 का भारत 1937 का भारत नहीं है। यह वह भारत है जिसने चंद्रयान भेजा, डिजिटल क्रांति की, दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बनाई। लेकिन राष्ट्रीय प्रतीकों के मामले में कांग्रेस यदि 1937 के निर्णय को आज भी अपना राजनीतिक मानक मानती है, तो यह विचार करने की आवश्यकता है कि क्या उसकी … Continue reading वंदे मातरम्’ की 150 वर्ष की यात्रा पर पाञ्चजन्य पत्रिका का विशेष आयोजन