बहुआयामी वीर सावरकर (7) : व्यक्ति नहीं राष्ट्र की बात

बहुआयामी वीर सावरकर  (7वीं) कड़ी- जीवनी अथवा चरित्र-लेखन ललितेतर साहित्य की एक महत्त्वपूर्ण विधा है, जो इतिहास और कथा-साहित्य के मध्य सेतु का कार्य करती है। वीर सावरकर ने अनेक चरित्र तथा आत्मचरित्र लिखे और इस विधा के संबंध में अपनी स्पष्ट साहित्यिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि प्रस्तुत की। आत्मचरित्र की भूमिका में उन्होंने व्यक्ति-चरित्र के … Continue reading बहुआयामी वीर सावरकर (7) : व्यक्ति नहीं राष्ट्र की बात