बहुआयामी वीर सावरकर (6) : राष्ट्रमंत्र के महाकवि

बहुआयामी वीर सावरकर (6) कड़ी बाल्यावस्था में वीर सावरकर का स्वप्न एक महाकवि बनने का था, किंतु भारतमाता की पराधीनता ने उनकी प्रतिभा को साहित्य की एकांत साधना-पथ पर नहीं, अपितु सशस्त्र क्रांति के दुर्गम मार्ग पर अग्रसर कर दिया। इस भाव को उन्होंने अत्यंत मार्मिक काव्यमय भाषा में व्यक्त किया है। मानो, भारतमाता उनसे … Continue reading बहुआयामी वीर सावरकर (6) : राष्ट्रमंत्र के महाकवि