बहुआयामी वीर सावरकर (3) : निर्भीक उपन्यासकार
बहुआयामी वीर सावरकर : कड़ी (3) सावरकर एक निर्भीक तथा यथार्थवादी उपन्यासकार भी थे। उनके साहित्य में कल्पना की अपेक्षा ऐतिहासिक यथार्थ, सामाजिक विश्लेषण और राष्ट्रीय चेतना का अधिक प्रभाव दिखाई देता है। उनके दो प्रमुख उपन्यास- ‘मोपला विद्रोह अर्थात मुझे क्या उसका?’ (1926) तथा ‘कालापानी’ (1937) केवल साहित्यिक कृतियां नहीं, बल्कि तत्कालीन भारतीय समाज, … Continue reading बहुआयामी वीर सावरकर (3) : निर्भीक उपन्यासकार
Copy and paste this URL into your WordPress site to embed
Copy and paste this code into your site to embed