भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम का जन्मोत्सव 6 अप्रैल को वैसे तो पूरे देश में मनाया जाएगा लेकिन अयोध्या में इसकी अलग ही धूम होगी। रामनवमी के पावन अवसर पर रामलला अयोध्या में एक विशेष तरह की पोशाक में राजकुमार की भांति सज-धजकर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। वैसे भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर के अलावा भी देश के विभिन्न हिस्सों में भगवान राम के कई ऐसे मंदिर हैं, जो भक्तों के बीच आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। रामनवमी के अवसर पर उनका उल्लेख करना भी प्रासंगिक होगा। केरल में त्रिशूर जिले के दक्षिण-पश्चिमी शहर त्रिप्रयार में त्रिपारा नदी के तट पर स्थित मंदिर में स्थापित मूर्ति का अनोखा इतिहास माना जाता है। यह मंदिर कोडुंगल्लूर शहर से करीब 15 किलोमीटर और त्रिशूर से 25 किलोमीटर दूर स्थित है। कहा जाता है कि भगवान विष्णु के ही अवतार भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं त्रिप्रयार में इस मंदिर में स्थापित मूर्ति की पूजा की थी। बताया जाता है कि इस मूर्ति को केरल के चेट्टुवा जिले के एक मछुआरे ने बनाया था और समुद्र में डुबो दिया था, जिसे बाद में सम्राट वक्कायिल कैमल ने त्रिप्रयार मंदिर में रख दिया था। इस आकर्षक मंदिर में अद्वितीय मूर्तियां और लकड़ी की नक्काशी इसे भारत के शीर्ष राम मंदिरों में से एक बनाती हैं।
अयोध्या भगवान श्रीराम की जन्मभूमि है और इसी अयोध्या में राम जन्मभूमि, रामकोट के उत्तर-पूर्व में स्थित कनक भवन अयोध्या के बेहतरीन और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। माना जाता है कि अयोध्या नरेश दशरथ के आग्रह पर देवशिल्पी विश्वकर्मा ने अयोध्या में अति सुंदर कनक भवन बनाया था, जिसमें असंख्य दुर्लभ रत्न जड़े हुए थे। महारानी कैकेयी द्वारा यह भवन श्रीराम से विवाह के तुरंत बाद देवी सीता को उपहार में दिया गया था। यह देवी सीता और भगवान राम का निजी महल था, जो माता कैकेयी द्वारा अपनी बहू सीता को मुंह-दिखाई में दिया गया था। विवाह के बाद राम और सीता इसी भवन में रहने लगे थे। राम और सीता की मूर्तियों के स्वर्ण अलंकरण और स्वर्ण सिंहासन के कारण इस मंदिर का नाम कनक पड़ा। जम्मू में स्थित रघुनाथ मंदिर उत्तर भारत के प्रसिद्ध राम मंदिरों में से एक है, जिसका निर्माण 1822 से 1860 के बीच हुआ था। इस मंदिर का निर्माण महाराजा गुलाब सिंह ने शुरू करवाया था और इसका पूर्ण निर्माण महाराजा रणजीत सिंह के शासनकाल में हुआ था। मंदिर का निर्माण मुगल शैली जैसा ही है, जो भारत में मुगलों के लंबे शासनकाल को दर्शाता है। यह राम मंदिर आकर्षक वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है, जिसके सर्पिल आकार के खंभों पर सोने की परत चढ़ी है। मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर के बाहर हिन्दू देवताओं को समर्पित सात छोटे ऐतिहासिक मंदिर हैं और रघुनाथ मंदिर में प्रत्येक हिन्दू देवताओं को दर्शाया गया है, जो अन्य मंदिरों के मुकाबले दुर्लभ है। मंदिर के आसपास भी कई मंदिर स्थित हैं, जिनका संबंध रामायण काल के देवताओं से है।
अमृतसर का श्रीराम तीर्थ मंदिर भगवान राम को समर्पित है। मान्यता है कि यहां महर्षि वाल्मीकि का आश्रम और एक कुटी थी, इसलिए इसे वाल्मीकि तीर्थ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह वही स्थान है, जहां परित्याग के पश्चात माता सीता ने शरण ली थी और जुड़वां बच्चों लव और कुश को जन्म दिया था। महर्षि वाल्मीकि ने यहीं लव और कुश को शस्त्र चलाने की शिक्षा दी थी। श्रीराम तीर्थ मंदिर लव-कुश और भगवान राम की सेना के बीच युद्ध का स्थल भी था। इसी आश्रम में वाल्मिकी ने 24 हजार छंदों वाला सम्पूर्ण रामायण महाकाव्य लिखा था। यह मंदिर भारत के सबसे पवित्र राम मंदिरों में से एक है। यहां वाल्मीकि की 8 फुट ऊंची स्वर्ण जड़ित प्रतिमा स्थापित की गई है। मंदिर के समीप ही एक सरोवर है, जिसे बहुत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इस सरोवर को स्वयं हनुमानजी ने खोदकर बनाया था। मंदिर के समीप ही प्राचीन श्री रामचंद्र मंदिर, जगन्नाथपुरी मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर, राम, लक्ष्मण, सीता मंदिर, महर्षि वाल्मीकि जी का धूना, सीताजी की कुटिया, श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, सीता राम-मिलाप मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल हैं, जो रामायण की याद दिलाते हैं।
मध्य प्रदेश के ओरछा नगर में स्थित राम राजा मंदिर को ओरछा मंदिर के रूप में भी जाना जाता है, जो एक पवित्र हिन्दू तीर्थ स्थल है। मकर संक्रांति, बसंत पंचमी, शिवरात्रि, रामनवमी, कार्तिक पूर्णिमा और विवाह पंचमी जैसे महत्वपूर्ण हिन्दू त्योहारों के दौरान यहां आने वाले भक्तों की संख्या हजारों में होती है। यह भारत का एकमात्र मंदिर है, जहां भगवान राम की पूजा भगवान के बजाय एक राजा के रूप में की जाती है और वह भी एक महल में। यहां प्रतिदिन भगवान राम को सशस्त्र सलामी दी जाती है और पुलिसकर्मियों को मंदिर में राजा राम के गार्ड के रूप में नियुक्त किया जाता है। मंदिर की विशेषता यह है कि भगवान राम के दाहिने हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में ढ़ाल है, श्रीराम पद्मासन में बैठे हैं, उनका बायां पैर उनकी दाहिनी जांघ के ऊपर है। इस राम मंदिर को एक शानदार किले जैसा बनाया गया है।
महाराष्ट्र में नासिक शहर के पंचवटी क्षेत्र में स्थित कालाराम मंदिर पश्चिमी भारत में भगवान राम के बेहतरीन आधुनिक मंदिरों में से एक है, जो उसी स्थान पर स्थित है, जहां भगवान राम अज्ञातवास के दौरान रहे थे। इस मंदिर को 1782 में सरदार रंगराव ओढ़ेकर ने एक पुराने लकड़ी के मंदिर के स्थान पर बनवाया था। कहा जाता है कि मंदिर का निर्माण कार्य करीब 12 वर्षों तक चला और इस कार्य में प्रतिदिन 2000 लोग कार्यरत रहते थे। मंदिर में भगवान राम, सीता और लक्ष्मण की करीब 2 फुट ऊंची काले पत्थर की खड़ी प्रतिमाएं हैं। भगवान राम की काली प्रतिमा के कारण ही इस मंदिर को कालाराम मंदिर नाम दिया गया। रामायण महाकाव्य के अनुसार श्रीराम वनवास के दसवें वर्ष के बाद लक्ष्मण और सीता के साथ नासिक के पास गोदावरी के उत्तरी तट पर ढ़ाई साल तक रहे थे। इसी स्थान को पंचवटी के नाम से जाना जाता है। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित चित्रकूट धाम एक पवित्र और आध्यात्मिक तीर्थ स्थल है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, पौराणिक महत्व और आध्यात्मिक शांति के लिए प्रसिद्ध है। इसे भगवान राम के वनवास का मुख्य स्थान माना जाता है, इसीलिए यह स्थान हिन्दुओं में बहुत पूजनीय है। चित्रकूट भगवान राम की कर्म भूमि है। भगवान राम ने वनवास के 11 वर्ष चित्रकूट में ही बिताये थे। इसी स्थान पर ऋषि अत्रि और सती अनसुइया ने ध्यान लगाया था।
तेलंगाना के भद्राद्रि कोठागुडेम जिले के भद्राचलम में स्थित सीता रामचन्द्र स्वामी मंदिर भारत के प्रमुख राम मंदिरों में से एक है। यह मंदिर गोदावरी के तट पर ठीक उसी स्थान पर बना है, जहां सीता की खोज में दक्षिण की यात्रा करते समय राम पहुंचे थे। कहा जाता है कि उन्होंने सीता जी को लंका से वापस लाने के लिए यही गोदावरी नदी पार की थी। मंदिर के भीतर स्थापित एक मूर्ति त्रिभंग को दर्शाती है, जिसमें भगवान राम अपने हाथों में धनुष और बाण पकड़े हुए हैं और देवी सीता उनके बगल में कमल पकड़े खड़ी हैं। इस मंदिर के धार्मिक महत्व और यहां के प्राकृतिक सौन्दर्य के कारण यह धार्मिक स्थल के साथ-साथ एक खूबसूरत पर्यटन स्थल के रूप में भी प्रसिद्ध है। तमिलनाडु के कुंभकोणम में स्थित रामास्वामी मंदिर को देश के सबसे आश्चर्यजनक राम मंदिरों में से एक माना जाता है। मंदिर की संरचना अत्यंत मनोरम है और इस मंदिर में स्थापित भव्य मूर्तियां महाकाव्य रामायण के सभी महत्वपूर्ण प्रसंगों को दर्शाती हैं। यह देश का एकमात्र ऐसा राम मंदिर है, जिसमें राम, सीता और लक्ष्मण के अलावा भरत और शत्रुघ्न की भी मूर्तियां हैं। कावेरी नदी के तट पर स्थित यह मंदिर तंजावुर नायक राजा अच्युतप्पा नायक (1560-1614) के शासनकाल के दौरान बनाया गया था और रघुनाथ नायक (1600-34) के शासनकाल के दौरान पूरा हुआ था।
केरल के तिरुवनंतपुरम में मलप्पुरम जिले के तिरुवंगड नामक स्थान पर स्थित श्री रामास्वामी मंदिर भगवान राम के भक्तों के बीच लोकप्रिय प्रमुख धार्मिक स्थल है। इस मंदिर का इतिहास करीब 400 साल पुराना है, जिसका निर्माण चोल वंश के राजा भास्कर रवि वर्मा द्वारा करवाया था। इस मंदिर में भगवान राम की मूर्ति की पूजा की जाती है, जिन्हें यहां श्री रामास्वामी कहा जाता है। मंदिर में सुंदरकांड पर आधारित कई लीलाएं और कहानियां सुनाई जाती हैं, जो भक्तों को आध्यात्मिक संवाद में डुबो देती हैं। मंदिर की विशेषता इसके शैलीबद्ध गोपुरम और काव्य द्वारा सजीव मूर्तिकला में निहित है।
उड़ीसा के भुवनेश्वर में खारवेल नगर के पास स्थित राम मंदिर भगवान राम के उपासकों के लिए सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक है, जो शहर के केन्द्र में स्थित है। मंदिर में राम, लक्ष्मण और सीता जी की मनमोहक तस्वीरें मंदिर की शोभा बढ़ाती हैं। इस मंदिर के परिसर में भगवान शिव, हनुमान और अन्य देवताओं के मंदिर भी हैं।
कर्नाटक के चिकमंगलूर में भगवान विष्णु के अवतार भगवान राम को समर्पित ‘कोदंडा रामास्वामी मंदिर’ तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित है। इस अत्यंत प्रतिष्ठित हिन्दू मंदिर में भगवान राम, लक्ष्मण और देवी सीता की आदमकद मूर्तियां स्थापित हैं। इन भव्य मूर्तियों की खास बात यह है कि ये मूर्तियां एक ही चट्टान से गढ़ी गई हैं और उनके आभूषणों सहित प्रत्येक विशेषता को बड़ी कुशलता और मेहनत से पत्थर में तराशा गया है। नृत्य मुद्रा में भगवान गणेश की एक मूर्ति भी मंडपम की शोभा बढ़ाती है। इस मंदिर के निर्माण में होयसल और द्रविड़ शैली का अद्भुत संयोजन है। यह भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां सीता जी भगवान राम के दायीं ओर तथा लक्ष्मण जी बायीं ओर खड़े हैं।
मध्य प्रदेश के सतना में रामवन को ‘रामायण सर्किट’ का हिस्सा माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यह स्थान भगवान राम के वनवास के दौरान उनके विश्राम स्थलों में से एक है। वनगमन के दौरान राम अत्रि ऋषि के आश्रम से सतना पहुंचे थे, जहां वे विभिन्न ऋषियों के आश्रम में गए और वहां से उन्होंने सीता और लक्ष्मण के साथ दण्डकारण्य की ओर प्रस्थान किया। रामवन में कई मंदिर भगवान राम, सीता और लक्ष्मण को समर्पित हैं और उनके वनवास की कहानियों से जुड़े हैं। इन मंदिरों में की जाने वाली पूजा और धार्मिक अनुष्ठान भारतीय धर्म और संस्कृति की गहरी झलक प्रदान करते हैं।
(लेखिका डेढ़ दशक से शिक्षण क्षेत्र से जुड़ी हैं)
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