ईद इबादत का पर्व है। कहा जादा है कि यह शांति और भाईचारे का संदेश देता है परन्तु किशनगंज के पोठिया प्रखंड अंतर्गत पनासी पंचायत में ईद की नमाज अता करने आए नमाज़ियों में जमकर मारपीट हुई। इन लोगों ने ईद को मोहर्रम और ईदगाह को कर्बला में बदलना चाहा। लेकिन प्रशासन की तत्परता के कारण कोई अनहोनी नहीं हुई।
ऐसा बताया जा रहा है कि यहां बिहार और बंगाल के हजारों नमाजी आपस में भिड़ गए। लेकिन अंदरूनी लड़ाई सूरजापुरी (स्थानीय) और शेरशाहबदिया या बदिया (बांग्लादेशी घुसपैठियों) की है। दोनों पक्षों की तरफ से जमकर लाठी डंडे चले जिसमें कई लोग चोटिल हुए। हंगामें के कारण मौके पर अफरा-तफरी मच गई और लोग इधर-उधर भागते नजर आए।
*क्या है पूरा मामला?*
पूरा मामला किशनगंज जिले के पहाड़कट्टा थाना क्षेत्र स्थित पनासी पंचायत के रतनपुर उच्च माध्यमिक विद्यालय के समीप स्थित ईदगाह का है। यह स्थान बांग्लादेश के समीप है। पनासी के मुखिया नवेद आलम के अनुसार 50 वर्षों से अधिक समय से इस ईदगाह में ईद के मौके पर बिहार और बंगाल के निवासी नमाज अदा करते हैं। बंगाल और बिहार वालों के लिए अलग-अलग समय निर्धारित रहता है। यहां पहले बंगाल के लोग नमाज अदा करते हैं, उसके बाद बिहार के नमाजियों द्वारा नमाज अदा की जाती है। लेकिन सोमवार को बंगाल के लोगों ने निर्धारित समय से अधिक समय नमाज में लगा दिया, जिसकी वजह से चिलचिलाती धूप में खड़े बिहार के लोगों का गुस्सा भड़क उठा और देखते ही देखते पूरा ईदगाह रणक्षेत्र में बदल गया। हालांकि वे एक अफवाह को भी इस हंगामें की वजह बताते हैं।
हाथों में लाठी डंडे लेकर लोग आपस में ही भिड़ गए और एक दूसरे की पिटाई करने लगे। इस दौरान मौके पर मौजूद पुलिस जवान भी गुस्साए लोगों को रोकने में असफल साबित हुए।घटना की जानकारी मिलने के बाद तुरंत ठाकुरगंज एसडीपीओ 2 मंगलेश कुमार सिंह के साथ पहाड़कट्टा थानाध्यक्ष धनजी कुमार सदल बल घटना स्थल पर पहुँच गए। इस दौरान कई थानों की पुलिस भी वहां पहुंची और किसी तरह लोगों को समझा बुझाकर मामला शांत करवाया गया। इसके बाद बिहार के लोगों ने नमाज अदा की।
एसडीपीओ मंगलेश कुमार सिंह ने भी घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि बंगाल बॉर्डर पर ईदगाह मौजूद है और बंगाल के नमाजी नमाज पढ़ने को लेकर विलंब कर रहे थे, जिसकी वजह से झड़प हुई। बाद में मामले को शांत करवा दिया गया है। उन्होंने कहा कि किसी भी पक्ष से कोई आवेदन नहीं मिला है और यदि आवेदन मिलता है तो विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।
*अत्यंत संवेदनशील है यह स्थान*
पनासी चिकननेक के समीप स्थित है। ईद के एक दिन पहले बांग्लादेश के प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस ने चीन के साथ इस स्थान के बारे में गुप्त समझौता किया। यहां से पश्चिम बंगाल के गुंजरिया बस हाल्ट की दूरी 2 किलोमीटर है जहां प्रसिद्ध गुंजरिया जामा मस्जिद भी है। पनासी का इतिहास अत्यंत समृद्ध रहा है। पनासी स्टेट की स्थापना हाजी मोहम्मद हुसैन ने 1820 या 30 में की थी। कभी पनासी स्टेट अत्यंत समृद्धशाली हुआ करता था लेकिन वक्त के साथ इस स्थान की अहमियत कम होते चली गई। यह पूरा इलाका पूर्णिया जिला के अंतर्गत पड़ता था। बंगाल विभाजन के बाद पनासी पूर्णिया जिला (वर्तमान में किशनगंज जिला) में आ गया और बाकी हिस्से बंगाल राज्य में चले गए।
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