तमिलनाडु

हिन्दू धर्म से इतनी नफरत : DMK नेता ए राजा ने अपने कैडर्स से कहा- हिन्दू प्रतीकों को धारण न करें

डीएमके नेता ए राजा ने अपने कैडर्स से हिंदू धार्मिक प्रतीकों जैसे तिलक और राख न धारण करने को कहा, भाजपा ने इसे वोटबैंक की राजनीति बताया।

Published by
सोनाली मिश्रा

डीएमके नेताओं की हिन्दू धर्म से अरुचि छिपी नही है और रह रहकर हिन्दू धर्म के लिए कटुता इनके बयानों मे उभरकर आती रहती है। अब डीएमके के नेता ए राजा ने एक बार फिर हिन्दू धर्म के प्रतीकों के विषय में हमला बोलते हुए अपने पार्टी के कैडर्स से कहा है कि वे हिन्दू प्रतीकों को धारण न करें।

दरअसल राजनीति पहचान की ही होती है। हर राजनेता अपने दल की अलग पहचान चाहता है और हर लड़ाई पहचान की ही लड़ाई होती है। और यह किसी भी प्रजातन्त्र में सहज ही है कि कोई राजनेता अपने दल की कोई विशिष्ट पहचान बना ले। मगर क्या पहचान की इस लड़ाई में हिन्दू धर्म के प्रतीकों को निशाना बनाया जा सकता है?

डीएमके के ए राजा ने अपने पार्टी के कैडर्स को संबोधित करते हुए कहा कि “”जब आप ‘पोट्टू’ (माथे पर बिंदी/तिलक/धार्मिक चिह्न) रखते हैं और एक संघी भी उसे लगाता है, और जब आप दोनों ताली बजाते हैं, तो हम नहीं जानते कि कौन-कौन है। इसलिए मैं कह रहा हूँ, भगवान से प्रार्थना करो। अगर आपके माता-पिता तुम्हारे माथे पर पवित्र राख रखते हैं, तो उसे रखो। लेकिन एक बार जब तुम डीएमके धोती पहन लो, तो उसे हटा दो!”

यह बहुत ही अपमानजनक है कि पार्टी के लिए अपने उस प्रतीक को छोड़ दिया जाए, जो व्यक्ति की धार्मिक पहचान है। ए राजा का यह कहना है कि वे यह नहीं कह रहे कि इंसान भगवान की पूजा न करें। उन्होनें यह भी कहा कि वे भगवान के खिलाफ नहीं हैं, मगर फिर उन्होनें आगे यह भी कहा कि जिस भगवान को हम जानते हैं वह एक मासूम दिल में रहता है और जो गरीबों की मुस्कान में दिखता है।

इसे लेकर अब राजनीतिक गहमागहमी भी बढ़ गई है। भाजपा की तमिलनाडु इकाई ने इस बयान की आलोचना की है और इसे वोटबैंक से प्रेरित बताया है।

विनोद पी सेलवम ने कहा कि डीएमके के ए राजा का बयान यह बताता है कि डीएमके हिन्दू संस्कृति को नीचे दिखाना चाहती है और वर्ष 2026 के चुनावों में अल्पसंख्यकों के मत जीतने के लिए वह कुछ भी करेगी। यह पूरे तमिलनाडु और डीएमके में हिंदुओं के लिए चेतावनी है। क्या आप एक राजनीतिक दल के लिए अपनी पहचान को मिटाने के लिए तैयार हैं?

हालांकि ए राजा का हिन्दू विरोध आज की बात या नई बात नहीं है। इस बयान से पहले भी ए राजा कई बार हिन्दू धर्म की और भारत की हिन्दू पहचान का विरोध कर चुके हैं। उन्होनें तो सनातन धर्म की तुलना एचआईवी और कोढ़ तक से की थी।

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