वक्फ बोर्ड जब चाहे तब किसी भी संपत्ति पर दावा कर देता है। इसका सेक्शन 40 इसे बड़ी छूट देता है। लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पेश किया गया है। सदन में इस पर चर्चा भी हो रही है। यह विधेयक वक्फ संपत्तियों की पारदर्शिता को लेकर है, लेकिन विपक्ष इसे मजहबी दिशा देने की कोशिश कर रहा है। आइये जानते हैं कि किसानों की जमीन के अलावा वक्फ ने किन मंदिरों और चर्च पर अपना दावा ठोका है।
दिल्ली: वक्फ बोर्ड ने दिल्ली के 6 प्रमुख मंदिरों पर दावा किया है। यह खुलासा 2019 की एक रिपोर्ट से हुआ था, जिसमें कहा गया कि ये मंदिर वक्फ की जमीन पर स्थित हैं।
तमिलनाडु: तमिलनाडु के तिरुचेंथुरई गांव में वक्फ बोर्ड ने एक 1500 साल पुराने हिंदू मंदिर सहित पूरे गांव पर दावा किया था, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ।
उत्तर प्रदेश: लखनऊ में 250 साल पुराने शिवालय गोपेश्वर महादेव मंदिर पर वक्फ बोर्ड ने दावा ठोका है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश में कई अन्य संपत्तियों पर भी दावे की खबरें आई हैं।
बिहार: मुजफ्फरपुर के गरीबनाथ मंदिर को दी गई 270 वर्गफीट जमीन पर सोगरा वक्फ बोर्ड ने दावा किया है, जिसका मामला वक्फ ट्रिब्यूनल में चल रहा है।
केरल: एर्नाकुलम जिले में मुनंबम और चेराई क्षेत्रों में वक्फ बोर्ड ने 404 एकड़ जमीन पर दावा किया है, जहां 600 से अधिक परिवार रहते हैं। इनमें से लगभग 400 ईसाई परिवार हैं। इस क्षेत्र में कई चर्च भी स्थित हैं, और स्थानीय ईसाई समुदाय का दावा है कि उनकी संपत्तियों, जिनमें चर्च शामिल हैं, पर वक्फ बोर्ड ने अवैध रूप से दावा ठोका है। सिरो-मालाबार चर्च और केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल ने इस मुद्दे को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के समक्ष उठाया है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि कितने चर्चों पर सीधे दावा किया गया, लेकिन इस विवाद में चर्चों की संपत्ति भी शामिल है।
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