ब्रिटेन में रहने वाले हिंदुओं को लेकर डेली मेल की एक रिपोर्ट पर हंगामा मचा हुआ है। इस रिपोर्ट में नेशनल पुलिस चीफ’स काउंसिल द्वारा बनाई गई एक खुफिया रिपोर्ट के माध्यम से यह कहा गया है कि ब्रिटेन में हिन्दू चरमपंथ, जिसे हिन्दुत्व कहा जाता है वह हिंदुओं और अन्य समुदायों जैसे सिखों और मुस्लिमों के बीच रिश्तों को खराब कर रहा है।
इस रिपोर्ट में लीसेस्टर में वर्ष 2022 में हुए दंगों का उल्लेख किया गया है और यह दावा किया गया है कि ये दंगे हिन्दुत्व के कारण हुए थे, जबकि यह रिकार्ड है कि लीसेस्टर में जो हिंसा हुई थी, उसमें किस समुदाय के घरों पर हमला हुआ था और किस समुदाय के मंदिरों को तोड़ा गया था। लीसेस्टर में हो हिंसा हुई थी, उसमें लगभग सौ हिंदुओं के घरों पर हमला हुआ था और दो मंदिरों को तोड़ा गया था।
इसे लेकर सांसद बॉब ब्लेकमेन ने भी एक्स पर लिखा कि उन्होनें संसद में एनपीसीसी की रिपोर्ट का मुद्दा उठाया, जिसमें वर्ष 2022 में हुए लीसेस्टर के दंगे के लिए हिन्दू चरमपंथ को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होनें कहा कि वह भी इस तथ्य के बावजूद कि – 105 हिंदुओं के घरों पर हमला किया गया, 0 मुसलमानों के घरों पर। 2 हिंदू मंदिरों पर हमला किया गया, 0 मस्जिदों पर। मैंने सरकार से पूरी रिपोर्ट जारी करने को कहा ताकि हम इसकी जांच कर सकें।
I raised the NPCC’s report which blamed Hindu extremism for the Leicester riots in 2022.
This is despite the fact that;
105 Hindu homes were attacked, 0 Muslim homes.
2 Hindu temples were attacked, 0 Mosques.I asked the Govt to release the full report so we can scrutinise it. pic.twitter.com/xHTjmPy1qu
— Bob Blackman (@BobBlackman) March 31, 2025
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि हिन्दुत्व के कारण सिखों के साथ संबंध खराब हो रहे हैं। मगर यह भी पूरी तरह से दुराग्रह से ही भरा हुआ है, क्योंकि खालिस्तान समर्थकों ने जितने भी हमले किये हैं, वे हिन्दू मंदिरों पर किये हैं, फिर चाहे वह कनाडा हो या फिर ऑस्ट्रेलिया या फिर अमेरिका।
किसी भी अन्य धर्म के धार्मिक स्थलों पर पूरे विश्व में उतने हमले नहीं हुए हैं, जितने कि हिंदुओं के धार्मिक स्थलों पर हुए हैं, फिर भी एनपीसीसी की इस रिपोर्ट में हिन्दू धर्म के प्रति इस दुराग्रह को लेकर लोगों के मन में प्रश्न उठ रहे हैं और सांसद तक इसका विरोध कर रहे हैं।
एनपीसीसी का यह भी कहना है कि ब्रिटेन की जेल में सजा काट रहे ‘दक्षिणपंथी’ टॉमी रॉबिन्सन, जिनका असली नाम स्टीफन येक्सली लेनन है, उनके साथ भी कुछ समूहों ने मीटिंग की कि किस प्रकार मुस्लिम विरोधी अभियान चलाया जाए और उसकी व्यक्तिगत उपस्थिति को भारतीय मीडिया और कुछ ब्रिटिश हिंदुओं द्वारा स्वागत किया गया।
इस पेपर ने यह भी चिंता जताई कि हिन्दुत्व चरमपंथी, जो मोदी की भाजपा के साथ जुड़े हैं, वे ब्रिटेन के चुनावों में हस्तक्षेप कर सकते हैं।
एनपीसीसी की इस रिपोर्ट के अनुसार हिंदुओं द्वारा बोले जाने वाला “जय श्री राम” हिंदुओं और अन्य समुदायों जैसे मुस्लिम और सिखों के बीच तनाव उत्पन्न कर सकता है, विशेषकर जब इसे धार्मिक वर्चस्व के लिए इस्तेमाल किया जा रहा हो।
इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ फिल्में ऐसी बन रही हैं, जिनके कारण हिन्दू और अन्य समूहों के बीच संघर्ष हो रहा है और इसके लिए फिल्म इमरजेंसी का उल्लेख किया गया।
यह बहुत ही हैरान करने वाला मामला है कि जहां एक तरफ ब्रिटेन में श्वेत लड़कियां ग्रूमिंग गैंग का शिकार हो रही हैं तो वहीं एनपीसीसी की रिपोर्ट धार्मिक द्वेष को लेकर हिंदुओं को दोषी ठहरा रही है। इस रिपोर्ट को लेकर ब्रिटेन के हिन्दू संगठन भी विरोध में आ गए हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार इन्साइट यूके, नामक एक संगठन ने द मॉल ऑन संडे और इंडिपेंडेंट प्रेस स्टैन्डर्ड ऑर्गनाइज़ेशन से शिकायत करने की योजना बनाई है।
उन्होनें फ़्रीडम ऑफ इनफॉर्मेशन अनुरोध के माध्यम से पूरी रिपोर्ट मांगी है। उनके प्रवक्ता ने कहा कि यह आधारहीन एवं बिना प्रमाण के बनाई गई रिपोर्ट है। इस लेख से ब्रिटेन में रह रहे हिन्दू कम सुरक्षित अनुभव करेंगे।
हिंदुस फॉर लेबर के अध्यक्ष नीरज पाटिल ने भी कहा कि यूके में कोई भी विश्वसनीय हिन्दू संगठन या मुख्य हिन्दू संस्थाएं किसी भी ब्रिटिश चरमपंथी समूह के साथ जुड़ी हैं। इस रिपोर्ट में जो दावे किये गए हैं, उनका प्रमाण देना पड़ेगा। इस तरह के नैरेटिव ऐसे लोग फैला रहे हैं, जो ब्रिटिश हिंदुओं के बढ़ते प्रभाव से जलते हैं।
वहीं OFBJP UK& Europe के संयोजक कुलदीप शेखावत ने ब्रिटिश चुनावों में संगठन के चुनाव प्रचार के अधिकार का बचाव किया। दरअसल इस रिपोर्ट में यह कहा गया है कि लीसेस्टर में और अन्य शहरों में चुनावों के दौरान हिन्दू संगठनों ने कन्सर्वटिव पार्टी के समर्थन में प्रचार किया था। इसे लेकर कुलदीप शेखावत का कहना है कि वे ब्रिटिश नागरिक हैं और चुनावों में किसी के भी समर्थन में वे प्रचार कर सकते हैं।
लीसेस्टर में हिन्दू समूहों ने इस रिपोर्ट को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह पूरे समुदाय को अलग थलग कर सकती है।
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