भारत के पड़ोसी जिन्ना के इस्लामी देश की सेना में हड़कंप मचा है। वहां अफसरों और सेनाध्यक्ष जनरल असीम मुनीर के बीच ठन गई है। अफसर फौजी मुखिया पर ठीक से काम न करने का आरोप लगाते हुए ‘इस्तीफा दो’ का शोर मचा रहे हैं। ‘द गार्डियंस ऑफ ऑनर’ शीर्षक से लिखी एक चिट्ठी ने लीक होकर पाकिस्तानी फौज में मची सिर फुटौव्वल को जगजाहिर कर दिया है। इसने फौज के अंदर मतभेदों के बहुत अधिक गहरा जाने का सच सबके सामने ला दिया है। इस चिट्ठी में सेना के निचले और मध्य दर्जे के अफसरों ने सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की अगुआई करने की काबिलियत पर ही सवाल उठा दिए हैं। मुनीर पर कमान संभालने में अक्षमता, भ्रष्टाचार, राजनीतिक उत्पीड़न और आर्थिक कुप्रबंधन जैसे अनेक गंभीर आरोप सत्ता और सैन्य अधिष्ठानों में अफरातफरी मचाए हुए हैं।
उक्त चिट्ठी में मुनीर से फौरन इस्तीफा देने की मांग की गई है। उन्हें साफ चेतावनी दी गई है कि अगर उन्होंने पद नहीं छोड़ा, तो सेना मुख्यालय की ओर मार्च करके अपने लिए हालात मुश्किल बना दिए जाएंगे। यह स्थिति पाकिस्तान की सेना के भीतर गहराते संकट को दर्शाती है। अफसरों का कहना है कि मुनीर ने सेना और देश का भरोसा खो दिया है। यह चिट्ठी ऐसे समय में सामने आई है जब मुनीर पर अपने रिश्तेदारों को ऊंचे पदों पर बैठाने और सरकार के कामकाज में दखल देने का आरोप है।
पाकिस्तान की सेना को उस देश में सबसे दबदबे वाली संस्था माना जाता रहा है। लेकिन अब इस चिट्ठी के लीक होने से सेना की छवि पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सेना के भीतर बगावत की आशंका ने पाकिस्तान की स्थिरता पर गंभीर खतरा पैदा किया है। अफसरों का कहना है कि देश के हालात 1971 जैसे बदतर हो गए हैं, जब पाकिस्तानी फौज की ‘गलतियों’ की वजह से पूर्वी पाकिस्तान अलग होकर बांग्लादेश नाम का नया देश बन गया था।
सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जनरल मुनीर की मुश्किलें बढ़ रही हैं। अमेरिका और ब्रिटेन में जनरल के खिलाफ कानूनी दबाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिका ने पाकिस्तान को सैन्य और आर्थिक मदद देने से इनकार कर दिया है और मुनीर पर प्रतिबंध लगाने से जुड़ा बिल भी संसद में पेश किया है। अगर यह बिल पास हो जाता है, तो मुनीर की संपत्ति जब्त हो सकती है और उन पर यात्रा प्रतिबंध लग सकता है।
चिट्ठी में लिखी बातों से साफ है कि पाकिस्तान की सेना के अंदर गहरी दरार है जो अब उजागर हो गई है। साफ है कि सेना के भीतर नेतृत्व का संकट उफन रहा है। यह स्थिति पाकिस्तान के पहले से डावांडोल राजनीतिक और आर्थिक तंत्र को और भुरभुरा कर सकती है। सेना के अफसरों का सुझाव है कि सेना की नाक बचाए रखने के लिए जनरलों की एक परिषद नेतृत्व को अपने हाथ में ले ले।
टिप्पणियाँ