पंजाब

जेल में बना ईसाई, फिर खेलने लगा गंदा खेल : पादरी बजिंदर का काला सच उजागर!

मोहाली कोर्ट ने पास्टर बजिंदर सिंह को दुष्कर्म केस में उम्रकैद की सजा दी। पादरी बजिंदर का अपराध से पुराना नाता रहा है, जेल से शुरू हुए खेल में सेक्स और धोखा भी शामिल है। जानिए 'चमत्कारी उपचार' के नाम पर गंदा खेल खेलने वाले पादरी का सच

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SHIVAM DIXIT

मोहाली । मंगलवार को मोहाली कोर्ट ने स्वयंभू ईसाई मत प्रचारक पास्टर बजिंदर सिंह को दुष्कर्म के एक मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई। पादरी बजिंदर सिंह पर 2018 में जीरकपुर की एक महिला ने बजिंदर पर विदेश ले जाने का लालच देकर बलात्कार करने और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया था। जिसमे कोर्ट ने शुक्रवार को उसे दोषी करार दिया था। जिसके बाद आज मंगवार को कोर्ट ने पादरी बजिंदर को BNS की धारा 376, 323 और 506 के तहत सजा सुनते हुए उसे उम्रकैद करार दिया।

चार्जशीट के मुताबिक बजिंदर सिंह ने ताजपुर गांव स्थित चर्च में पीड़िता के साथ अश्लील हरकतें कीं। वह उसे चर्च के केबिन में अकेले बुलाता और वहां उसका यौन शोषण करता। उसने पीड़िता का फोन नंबर लेकर उसे अश्लील संदेश भी भेजे।

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बजिंदर सिंह को जुलाई 2018 में दिल्ली एयरपोर्ट से उस वक्त गिरफ्तार किया गया था, जब वह लंदन जाने की कोशिश कर रहा था। वह ‘द चर्च ऑफ ग्लोरी एंड विज्डम’ नामक संस्था से जुड़ा हुआ था और खुद को चमत्कारी पादरी बताकर बीमारियों को ठीक करने के दावे करता है। जिसके वीडियो भी अक्सर सोशल मीडिया पर प्रमोशन कर वायरल कराए जाते हैं।

कौन है पादरी बजिंदर सिंह?

42 वर्षीय बजिंदर जालंधर में ‘चर्च ऑफ ग्लोरी एंड विजडम’ का संस्थापक है। जानकारी के अनुसार वह हरियाणा के करनाल का रहने वाला, इसने अपने फर्जी मतांतरण के धंधे के बल पर अपनी संस्था की देशभर में 260 ब्रांच खोल ली। जिसके तहत ये लोगों को झूठे चमत्कार दिखा कर मतांतरित करवाता था। पादरी बजिंदर ने 15 साल पहले जेल में इसाई मत को अपनाया था। वह उस समय हत्या के मामले में जेल के अन्दर था।

कैसे शिकार बनी युवती..?

पीड़िता के अनुसार, वह दिसंबर 2017 से पादरी बजिंदर सिंह की मंडली में शामिल हो रही थी और वर्ष 2020 तक उसकी ‘वर्शिप टीम’ का हिस्सा थी। इस दौरान पादरी ने उसके मोबाइल नंबर पर आपत्तिजनक मैसेज भेजने शुरू किए। उस समय पीड़िता महज 17 साल की थी।

एफआईआर के मुताबिक युवती ने कहा- “मैं उससे डरने लगी, लेकिन माता-पिता से बताने में कतराती थी। 2022 में उसने मुझे रविवार को अपने केबिन में बैठाना शुरू कर दिया। जब मैं अकेली होती, तो वह मुझे जबरन गले लगाता और गलत तरीके से छूता था, इसके बाद मुझे घबराहट के दौरे पड़ने लगे और मानसिक तनाव झेलना पड़ा”।

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पीड़िता ने बताया कि पादरी उसकी हर गतिविधि पर नजर रखता था और कॉलेज जाते समय कार से उसका पीछा करता था। जब पीड़िता ने इसका विरोध किया, तो पादरी ने उसे धमकी दी कि अगर उसने उसकी बात नहीं मानी या अपने माता-पिता को कुछ बताया, तो वह उसके परिवार को मरवा देगा।

पीड़िता ने बताया कि मार्च 2023 में उसकी शादी एक अन्य ईसाई प्रचारक राजा सिंह से तय हुई थी, लेकिन तब भी पादरी बजिंदर सिंह उसे धमकाता रहा। उसने चर्च के अध्यक्ष से उसकी माँ से बात करवाई और चुप रहने के लिए धमकाया।

पहले भी लग चुके हैं गंभीर आरोप

पादरी बजिंदर सिंह पहले भी कई बार विवादों में रहा है। 2023 में इनकम टैक्स ने उसके ठिकानों पर छापेमारी की थी। हाल ही में बजिंदर पर यौन उत्पीड़न और मारपीट के नए मामले दर्ज हुए। फरवरी 2024 में एक 22 वर्षीय महिला ने उत्पीड़न का आरोप लगाया, जिसकी जांच कपूरथला पुलिस कर रही है। मार्च में एक वायरल वीडियो में उसे एक महिला को थप्पड़ मारते देखा गया, जिस पर मोहाली पुलिस अपनी कार्रवाई कर रही है।

गुरुओं की भूमि पंजाब में बढ़ता ईसाई कन्वर्जन.!

पंजाब, जो सिख गुरुओं की पावन भूमि है, वहाँ पिछले कुछ वर्षों में तेजी से ईसाई मिशनरियों द्वारा कन्वर्जन अभियान चलाए जा रहे हैं। खासकर सीमावर्ती जिलों में, गरीब और दलित परिवारों को निशाना बनाया जा रहा है।

बजिंदर सिंह ‘चर्च ऑफ ग्लोरी एंड विजडम’ नामक चर्च चलाता है और खुद को ‘चमत्कारी उपचार’ करने वाला बताकर भोले-भाले लोगों को ईसाई धर्म में लुभाता है। वह ‘चमत्कार’ और ‘बीमारी दूर करने’ के नाम पर प्रार्थनाएं करवाता है और फिर लोगों को ईसाई बनने का सुझाव देता है।

कैसे फैलाया जा रहा है ईसाई मत का जाल..?

  • गरीब तबके के लोगों को बीमारी का डर दिखाकर चर्च में बुलाया जाता है।
  • ‘चमत्कारी उपचार’ के नाम पर लोगों को मानसिक रूप से प्रभावित किया जाता है।
  • आर्थिक सहायता और नौकरियों का लालच देकर उन्हें ईसाई बनने पर मजबूर किया जाता है।
  • ईसाई बनने के बाद उन्हें अपने पुराने धार्मिक रीति-रिवाजों को छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है।

पंजाब में कैसे बढ़ रहा है कन्वर्जन..?

पिछले कुछ वर्षों में पंजाब में ईसाई मिशनरियों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। खासकर मलेरकोटला, तरनतारन, अमृतसर, कपूरथला, होशियारपुर और जालंधर में इनका प्रभाव बढ़ा है। कई जगहों पर गुरुद्वारों के करीब चर्च बनाए जा रहे हैं और वहाँ ‘चमत्कारी सभा’ के नाम पर बड़े-बड़े आयोजन किए जा रहे हैं। इन आयोजनों में वंचित समाज के लोगों को ज्यादा से ज्यादा मात्रा में लाया जाता है. जहां झूठ और फरेब के बल पर उन्हें प्रभावित कर ईसाइयत में मतांतरित किया जा रहा है।

पंजाब, जिसे सिख गुरुओं और संतों की भूमि कहा जाता है, वहाँ ऐसी गतिविधियाँ समाज के लिए घातक हो सकती हैं। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि कैसे ईसाई पादरी अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल कर भोले-भाले लोगों का शोषण कर रहे हैं।

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