देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अवैध मदरसों की जांच करने का आदेश दिया था। इसके बाद सत्यापन में सामने आए अवैध मदरसों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई न होने पर सवाल उठ रहे हैं। हिंदुत्वनिष्ठ संगठन बार-बार ये मांग कर रह हैं कि अवैध मदरसे बंद किए जाने चाहिए ।
कुछ सप्ताह पूर्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डीजीपी और मुख्य सचिव को मदरसों के सत्यापन की जांच-पड़ताल किए जाने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद देहरादून पुलिस-प्रशासन ने आनन-फानन जांच-पड़ताल कर शासन को रिपोर्ट भेज दी। इनमें वे मदरसे भी शामिल हैं, जोकि बिना सरकार की अनुमति से चलाए जा रहे हैं। इनमें क्या पढ़ाया जा रहा है? इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
पुलिस प्रशासन की सत्यापन रिपोर्ट में देहरादून जिले में 125 मदरसे चार क्षेत्रों में चिन्हित किए गए हैं,जबकि कुछ क्षेत्रों में मदरसे शून्य दिखाए गए हैं। विकास नगर तहसील क्षेत्र में 78 मदरसे चिन्हित हुए जिनमें केवल 18 पंजीकृत हैं और 60 अवैध रूप से चल रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये अवैध मदरसे देवबंद,सहारनपुर और दिल्ली में स्थित छोटे बड़े संस्थानों के संरक्षण में चल रहे हैं। देहरादून सदर क्षेत्र में 33 मदरसे चिन्हित हुए। सत्यापन रिपोर्ट में 10 पंजीकृत और शेष 23 अवैध रूप से संचालित होते हुए मिले। अवैध मदरसों की फंडिंग कहां से और कौन कर रहा है,इस बारे में अभी किसी रिपोर्ट का खुलासा नहीं किया गया है।
डोईवाला क्षेत्र में 6 मदरसे मिले, जिनमें से कोई भी पंजीकृत नहीं हैं। बताया गया है कि यहां मस्जिदों के संरक्षण में और भी मदरसे अवैध रूप से ग्रामीण क्षेत्र में चल रहे हैं। देहरादून जिले के जौनसार बावर क्षेत्र के कालसी में एक मदरसा है जोकि अवैध रूप से संचालित है। डोईवाला और कालसी दोनों क्षेत्रों में क्रमशः 684 व 55 बच्चे इस्लामिक शिक्षा ले रहे हैं। यहां क्या पढ़ाया जा रहा है,इस बारे में जांच रिपोर्ट में विस्तार से कोई चर्चा नहीं की गई है। सवाल यह भी है कि जब मदरसों की कोई मान्यता नहीं है तब यहां राष्ट्रीय पाठ्यक्रम पढ़ाया कैसे पढ़ाया जा रहा होगा ?
देहरादून जिले में बड़ी संख्या में ऐसे अवैध मदरसे हैं जहां बाहरी राज्यों के बच्चे लाकर पढ़ाए जा रहे हैं। ऐसा क्यों हो रहा है ? इसका जवाब प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में नहीं दिया है। कुछ माह पहले उत्तराखंड बाल संरक्षण सुधार आयोग की अध्यक्ष डॉ गीता खन्ना द्वारा देहरादून पुलिस प्रशासन को एक अवैध मदरसे के विषय में जानकारी दी गई थी, जिसमें बाहरी राज्यों के बच्चे पढ़ रहे थे। एसएसपी के द्वारा इसके संचालकों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई थी। इससे ये भी पता चलता है कि राजधानी देहरादून में ही अवैध रूप से संचालित मदरसों में सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है।
बताया जाता है कि उत्तर प्रदेश और असम में अवैध मदरसों के खिलाफ जब सख्ती की गई तो ये उत्तराखंड की तरफ शिफ्ट हो गए। यहां पढ़ने वाले बाहरी राज्यों के बच्चे कल उत्तराखंड के निवासी बन जायेंगे और ऐसा हर साल सैकड़ों की संख्या में आने वाले बच्चों के साथ होने जा रहा है यानि जनसंख्या असंतुलन की समस्या का ये पहला पड़ाव बन रहा है। केवल देहरादून ही नहीं,उत्तराखंड के सभी जिलों में बाहरी राज्यों के बच्चे पढ़ते हुए मिल रहे हैं। बड़ा सवाल ये है कि इन मदरसों में फंडिंग कहां से और कैसे हो रही है? पुलिस-प्रशासन के सत्यापन में इस बारे में कोई जानकारी नहीं ली गई है। इन मदरसों की भूमि और भवन संबंधी दस्तावेजों की कोई जानकारी नहीं दी गई है।
फिलहाल रिपोर्ट तो शासन के पास आ गई है और उसके बाद शासन इस पर क्या कार्रवाई करने जा रहा है, ये अभी तक तय नहीं है। पिछले दिनों निकाय चुनाव फिर राष्ट्रीय खेल और अब यूसीसी लागू होने के कारण शासन प्रशासन की व्यस्तता भी मजबूरी हो सकती है,लेकिन अब प्रशासन के पास कारर्वाई के लिए कोई बहाना नहीं है। पुलिस की जांच-पड़ताल पूरी हो चुकी है वैध और अवैध मदरसों की जानकारी शासन के पास पहुंच चुकी है, देखना अब ये है कि उत्तराखंड सरकार आगे क्या एक्शन लेती है?
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