विश्लेषण

रोदरहैम में पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग्स के बीच ब्रिस्टल में सोमाली मुस्लिमों द्वारा श्वेत लड़कियों के शोषण की कहानी

जब मामले सामने निकलकर आ रहे हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है कि ब्रिटेन के कई शहरों में विभिन्न देशों की पृष्ठभूमि के लोग उनकी अपनी बेटियों को निशाना बना रहे थे, जिनमें से अधिकांश अपराधी मुस्लिम थे।

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सोनाली मिश्रा

ब्रिटेन में बच्चियों के साथ यौन शोषण और बलात्कार की घटनाओं का सामने आने का सिलसिला जारी है। यह और भी अधिक दुर्भाग्यपूर्ण है कि पूरे विश्व और विशेषकर भारत को महिला अधिकारों के विषय में नसीहतें देने वाला देश अपने ही देश की लड़कियों की पीड़ाओं पर केवल चुप्पी ही नहीं साधे था, बल्कि वह लड़कियों को ही दोषी ठहरा रहा था। ऐसा नहीं हैं कि केवल रोदरहैम में श्वेत बच्चियों का एक रणनीति बनाकर यौन शोषण और उत्पीड़न किया गया, बल्कि एक ब्रिस्टल से भी एक मामला सामने आया था और उसमें तेरह सोमाली मुस्लिमों को सजा दी गई थी।

जब मामले सामने निकलकर आ रहे हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है कि ब्रिटेन के कई शहरों में विभिन्न देशों की पृष्ठभूमि के लोग उनकी अपनी बेटियों को निशाना बना रहे थे, जिनमें से अधिकांश अपराधी मुस्लिम थे। फिर भी वह कौन सा कारक था कि वहाँ का प्रशासन लड़कियों के प्रति संवेदनहीन बना रहा और इन मुस्लिम अपराधियों के प्रति संवेदनशील?

प्रशासन की अपनी राजनीतिक मजबूरियाँ हो सकती हैं, मगर मीडिया की? मीडिया क्या कर रहा था? पश्चिम का कम्युनिस्ट मीडिया आखिर लड़कियों के साथ हो रहे इन अत्याचारों पर चुप क्यों रहा? ब्रिस्टल में वर्ष 2014 में 13 सोमाली आदमियों को ब्रिस्टल सेक्स रिंग चलाने को लेकर अपराधी घोषित किया था, जो छोटी ब्रिटिश लड़कियों को निशाना बनाते थे।

इसमें भी वे छोटी लड़कियों को निशाना बनाते थे और फिर उन्हें जबरन देह व्यापार के धंधे में धकेलते थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गैंग के जो सदस्य होते थे उनके बहुत ही आकर्षक नाम होते थे, जैसे लेफ्ट आई, मैजिक, और ट्रिगर, जो ब्रिस्टल की उन किशोरियों को यह कहकर ग्रूम करते थे कि जब तक वे रिश्ते में हैं, तब तक सेक्स एक अच्छे रिश्ते के लिए बहुत जरूरी है।

उसके बाद वे ऐसी लड़कियों को बहुत ही मामूली रकम के बदले या फिर शराब, ड्रग, या तोहफों के बदले किसी दूसरे बड़े उम्र के आदमी के साथ सेक्स संबंध बनाने के लिए मजबूर करते थे। इस गैंग की भी कार्यशैली पूरी की पूरी तरह वही थी जो ब्रिटेन के दूसरे शहरों में ऐसे गैंग्स की थी।

एक 13 साल की बच्ची के साथ तीन अलग-अलग आदमियों ने चार बार बलात्कार किया था और उसे एक आदमी द्वारा पूरे शहर में एक जगह से दूसरी जगह भेजा गया था। पुलिस को उस बच्ची की पीड़ा के बारे में वर्ष 2012 में पता चला था, मगर चूंकि बच्ची को अपनी ज़िंदगी को लेकर खतरा था, इसलिए उसने पुलिस के साथ शुरू में सहयोग करने से इनकार कर दिया गया।

एक फ्लैट जिसे ड्रग्स और सेक्स का अड्डा बना दिया गया था, वह एक लड़की का था, जिसने एक बार इन गैंग के लोगों से ड्रग खरीदी थी। वह उनके जाल में फँसती गई और लड़कियों को लाती गई। उसकी अपनी चौदह साल की बहन भी इस गैंग का निशाना बनी थी। उसकी अपनी चौदह साल की बहन केवल अपने अंत:वस्त्रों में एक सिंक के नीचे छिपी मिली थी।

जब उसके पास एक महिला पुलिस कर्मी गई तो उसने बताया था कि उसके साथ एक आदमी ने बलात्कार किया है।

कुछ पीडिताओं को अपने कथित बॉयफ्रेंड्स के दोस्तों के साथ रिवाज के नाम पर संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया क्योंकि उनसे कहा गया कि यह “सोमाली रिवाज है कि आदमी लोग एक दूसरे की गर्लफ्रेंड्स के साथ सेक्स करते हैं।“

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस सेक्स रिंग में अपराधी घोषित किये गए लोग थे “लिबन आब्दी उर्फ ​​लेफ्ट बैक, 21, मुस्तफा ग्रीन्स फराह, 21, अराफात लेफ्ट आई उस्मान, 20, इदलेह स्नाइपर उस्मान, 22, अब्दुलाही ट्रिगर अदन, 20, सईद जकारिया, 22, मुस्तफा डेरिया, 22 और डेरिया के चचेरे भाई मोहम्मद मैजिक जामा , 20,”।

इन सभी को 18 महीनों से लेकर 15 साल तक की सजा मिली थी।  ज़कारिया, जिसका उपनाम टारगेट था, और छह अन्य पुरुषों – मोहम्मद जुमाले, 24, उसके भाई उमर जुमाले, 20, मोहम्मद दाहिर, 22, जुसुफ अब्दिजिरक, 20, अब्दिराशिद अब्दुलाही, 21 और सकारिया शेख, 21 – को ब्रिस्टल में चार युवा लड़कियों को बहला-फुसलाकर उनके साथ यौन दुर्व्यवहार करने के दूसरे मुकदमे में दोषी ठहराया गया।

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वहीं उस समय ब्रिस्टल सोमाली फॉर्म की अध्यक्ष मूना अली ने कहा था कि इसे केवल अपराध की तरह देखा जाए, सोमाली अपराधी की तेरह नहीं। उन्होनें कहा था कि जो इस समय पूरे देश में हो रहा है, यह भी उससे अलग नहीं है और मुझे आशा है कि लोग इसे केवल अपराध की तरह देखेंगे न कि सोमाली समुदाय को अपराधी की तरह।

प्रश्न यह नहीं है कि अपराधों को किस तरह देखा जाए, प्रश्न यह है कि बच्चियों को फुसलाकर सेक्स और ड्रग के जाल में फँसाने वाले इन गैंग्स की कहानियों पर कम्युनिस्ट मीडिया या कहें कम्युनिस्ट राजनेताओं ने विमर्श के आधार पर चुप्पी क्यों साध रखी थी? क्यों उनके लिए उनके ही अपने देश की लड़कियों की पीड़ा मायने नहीं रखती? फिर चाहे वह रोदरहैम की लड़कियां हों, जिन्हें पाकिस्तानी मूल के मुस्लिम लोगों ने सेक्स और ड्रग्स के जाल में धकेला या फिर ब्रिस्टल की वह लड़कियां जिन्हें सोमाली मूल के मुस्लिम लोगों ने सेक्स और ड्रग्स के जाल में धकेला।

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