अमरोहा में शौहर सुहैल अहमद ने बीवी को लगाया दांव पर
उत्तर प्रदेश के अमरोहा में एक समाचार ने सभी का ध्यान आकर्षित किया, जिसमें लिखा था कि “एक और महाभारत, पत्नी को जुए में हार गया पति” तो किसी ने उसे शीर्षक दिया कि “जुए में पत्नी को हार गया पति, कृष्ण बन भाई ने बचाई आबरू” तो किसी ने लिखा कि “धनतेरस पर जुए में पत्नी को हार गया पति, कृष्ण बन भाई ने बचाई आबरू!” एक ने शीर्षक दिया “अमरोहा में महाभारत: दिल्ली में जुआ हारने पर पत्नी को गिरवी रखा, विरोध करने पर पीटा।।विवाहिता का भाई बना कृष्ण”।
एक और मीडिया हाउस ने खबर चलाई कि अमरोहा में एक और महाभारत! जुए में पत्नी के ऊपर ही खेल दिया दांव”। और एक ने लिखा कि “धनतेरस पर हुए में हार गया पति पत्नी को” और उसमें एक हिन्दू महिला की तस्वीर लगाई। जैसे ही यह खबर और तस्वीरें वायरल हुईं वैसे ही हिन्दुओं को बदनाम करने वाली लॉबी सक्रिय हुई और उसने हिन्दू धर्म पर हमला करते हुए वह तस्वीरें वायरल करनी शुरू कर दीं। हिन्दुओं के विरुद्ध अथाह घृणा दिखने लगी। अली सोहराब ने लिखा #संस्कृति! दीपा सम्राट नामक यूजर ने लिखा कि “जुए में हारने पर पति ने पत्नी को गिरवी रख दिया, उत्तर प्रदेश के अमरोहा की है घटना——-! कोई संस्कारी समाज से होगा इसलिए नाम बताया नहीं!” साजिद अली ने लिखा कि “सनातन धारण”- भक्तों कैसे हो बे सालों। जुए में हारने पर पति ने पत्नी को रख दिया गिरवी!”
मुश्ताक अहमद ने लिखा कि “जुए में हारने पर पति ने पत्नी को रख दिया गिरवी। उत्तर प्रदेश के अमरोहा की है यह घटना। महिला के भाई ने आकर बचाई लाज। मामला दर्ज। इसीलिए इस्लाम में जुआ शराब आदि हराम है!”
अभिषेक तिवारी शो नामक यूजर ने ये तमाम स्क्रीनशॉट साझा करते हुए उस एजेंडे की पोल खोल दी, जो मीडिया चला रहा था। दरअसल यह सोशल मीडिया का युग है। अभी जो भी एजेंडा हिन्दू पर्वो के विरुद्ध चलाया जाएगा, उसकी पोल तुरंत खुल जाती है। अभी तक ऐसा होता आया था और अभी भी होता है कि उन लोगों के अपराधों का ठीकरा भी हिन्दू धर्म ग्रंथों पर फोड़ दिया जाता है, जिनका उनसे कोई लेना देना नहीं होता है।
इस घटना में अमरोहा पुलिस ने कदम उठाते हुए आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। मगर जब यह बात खुली तो पता चला कि दरअसल जिस घटना को लेकर हिन्दू धर्म और हिन्दू धर्मग्रंथों को बदनाम किया जा रहा है, वह सुहैल अहमद द्वारा की गयी घटना है।
और इसी घटना को लेकर अमृतकाल की महाभारत जैसे शब्दों का प्रयोग किया जा रहा था। और इसी पोस्ट पर अमरोहा पुलिस ने बताया कि “वेदिका की तहरीर के आधार पर उसके पति सुहैल अहमद एवं अन्य ससुरालीजन पर दहेज उत्पीडन व अन्य सुसंगत धाराओ मे अभियोग पंजीकृत है तथा अग्रिम विधिक कार्यवाही प्रचलित है ।“
जुए में धनतेरस को अपनी बीवी को हारने वाला और कोई नहीं बल्कि सुहैल अहमद है। जनपद के डिडौली कोतवाली क्षेत्र के गाँव सिनोरा में जलालाबाद की रहने वाली एक विवाहित महिला ने अपने शौहर पर जुए में खुद को हारने का आरोप लगाया और मुकदमा दर्ज कराया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसके शौहर ने उसे ही गिरवी कर दिया था और उसका निकाह तीन वर्ष पहले हुआ था। पीड़िता ने बताया कि निकाह के बाद से ही शौहर सुहैल अहमद, सास सलमा, ससुर रईस अहमद, देवर फूजैल, दूसरा देवर सुहैब, ननद कहकशा, महका और दरकशा – ये सब मिल कर उसे परेशान थे। प्रश्न यही है कि आखिर मीडिया द्वारा सुहैल के अपराधों को हिन्दू धर्म ग्रंथों पर थोपने का कारण क्या है? उसने ऐसा क्यों किया?
क्या मीडिया अपराधों को दूसरे पंथ के ग्रंथों पर मढ़ सकता है? महाभारत जैसे पवित्र ग्रन्थ को सुहैल के अपराध के साथ जोड़ना खुद में बहुत बड़ा अपराध है और मीडिया का एक बहुत बड़ा वर्ग लगातार यह कुकृत्य करता रहता है। पीड़ित महिला की दो बेटियाँ हैं और उसने यह बताया कि उसके शौहर की जुआ खेलने की आदत है। और जब चूंकि वह आदतन जुआरी है, तो क्या उसके इस अपराध में धनतेरस जैसे पवित्र पर्व को बीच में लाना अनिवार्य था?
हालांकि सोशल मीडिया पर यूजर्स ने विरोध करते हुए लिखा कि महाभारत को क्यों बदनाम किया जा रहा है?
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मीडिया के अनुसार उसका शौहर उसे एक महीना पहले ही जुए में सारे पैसे दांव पर लगाने के बाद उसे भी हार चुका था और फिर वह उसे जीते हुए आदमी के पास छोड़कर चला आया था। फिर इसमें प्रश्न है कि यदि वह एक महीने पहले ही हार चुका था तो फिर धनतेरस को बदनाम क्यों किया जा रहा है? प्रश्न यही है कि मीडिया के एक बड़े वर्ग को हिन्दू पर्वों से इतनी घृणा क्यों है?
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