पद्म पुरस्कार 2023 : पौधों के लिए पद्मश्री

लगभग 500 ऐसे पौधे हैं, जिनका संग्रह उन्होंने भारत के अलग-अलग हिस्सों से किया है

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WEB DESK

कालाहांडी जिले के लोग बहुत ही गरीब हैं। लोगों के पास न तो घर हैं और न ही पर्याप्त अनाज। लोग बीमार होते हैं तो किसी बड़े अस्पताल में इलाज नहीं करा पाते हैं। ऐसे लोग मेरे पास आते हैं। मैं उन्हें जड़ी-बूटी से बनी दवा देता हूं।
-पद्मश्री पतायत साहू

ओडिशा में कालाहांडी जिले के नान्दोल गांव के रहने वाले पतायत साहू पद्मश्री से सम्मानित किए गए हैं। यह सम्मान उन्हें औषधीय पौधों की खेती के लिए दिया गया है। उल्लेखनीय है कि उन्होंने अपने घर के पीछे 1.5 एकड़ जमीन पर 3,000 से भी अधिक औषधीय पौधे लगाए हैं।

इनमें से लगभग 500 ऐसे पौधे हैं, जिनका संग्रह उन्होंने भारत के अलग-अलग हिस्सों से किया है। बाकी पौधों को उन्होंने कालाहांडी के जंगलों से संग्रहित किया है। यह काम वे पिछले 40 वर्ष से कर रहे हैं। पतायत साहू जैविक खेती भी करते हैं। इसके लिए वे बेकार पानी का इस्तेमाल करते हैं।

‘‘कालाहांडी जिले के लोग बहुत ही गरीब हैं। लोगों के पास न तो घर हैं और न ही पर्याप्त अनाज। लोग बीमार होते हैं तो किसी बड़े अस्पताल में इलाज नहीं करा पाते हैं। -पतायत साहू

आज तक उन्होंने कभी भी रसायनिक खादों का उपयोग नहीं किया है। पतायत अपने खेत में लगे पौधों से औषधि भी बनाते हैं। दूर-दूर से उनके पास मरीज आते हैं। वे उनका इलाज करते हैं और दवाई भी देते हैं। इसके बदले वे किसी से पैसे की मांग नहीं करते हैं। जिसको जो देना होता है, वह दे देता है और जो नहीं दे सकता है, तो कोई बात नहीं। पतायत कहते हैं, ‘‘कालाहांडी जिले के लोग बहुत ही गरीब हैं।

लोगों के पास न तो घर हैं और न ही पर्याप्त अनाज। लोग बीमार होते हैं तो किसी बड़े अस्पताल में इलाज नहीं करा पाते हैं। ऐसे लोग मेरे पास आते हैं। मैं उन्हें जड़ी-बूटी से बनी दवा देता हूं। भगवान की कृपा है कि लोग ठीक भी हो जाते हैं। जब तक मेरी जिंदगी है तब तक यह सेवा चलती रहेगी।’’

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