सामग्री
चावल, दही, घी और शक्कर।
छत्तीसगढ़ का एक लोकप्रिय व्यंजन पीडिया है। यह नाश्ते में परोसा जाने वाला व्यंजन है। यह व्यंजन बरसों तक घरों तक सीमित रहा, इस कारण बाजार तक नहीं पहुंचा। रायपुर के पूर्व छात्र नेता और इस व्यंजन का व्यवसाय करने वाले आलोक दुबे बताते हैं कि छत्तीसगढ़ी व्यंजनों को बाजार में लाने का पहला प्रयास वरिष्ठ पत्रकार स्व. बसंत दीवान ने किया था।
उनके बाद स्व. नीलिमा शर्मा ने अपनी संस्था मदर हुड के जरिये इसे जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया। बताते हैं कि पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. सुषमा स्वराज और मेनका गांधी भी उनके व्यंजनों की मुरीद थीं।
बनाने की विधि
चावल को धो कर धूप में सुखाने के बाद इसका आटा तैयार किया जाता है। यह ध्यान रखें कि चावल की गुणवत्ता अच्छी हो। फिर इसे मीठी दही से गूंथा जाता है। इसे बिना दही के भी बनाया जा सकता है। इसके बाद जैसे बेसन का सेव बनता है, वैसे ही चावल के आटे का सेव बनाकर उसे शुद्ध देसी घी में तलने के बाद इसे मिक्सी में पीसा जाता है। एक किलो चावल के आटे में आधा किलो या इससे कम शक्कर मिलाया जाता है। घी में तला होने के कारण दोबारा पीसे हुए पाउडर के साथ शक्कर को गूंथने में अतिरिक्त घी की जरूरत नहीं पड़ती। इस मिश्रण को कटलेट की तरह लंबाई और गोलाकार आकृति देने के बाद घंटे भर छोड़ दिया जाता है, ताकि थोड़ा कठोर हो जाए। इसके बाद शक्कर पतली चाशनी में इसे डुबाकर निकाल लिया जाता है। अच्छी पीडिया मुंह में जाते ही घुल जाती है।
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