बीजिंग के इशारे पर अनेक लोगों पर झूठे मुकदमे जड़कर उन्हें जेल में डाल दिया गया था। लोकतंत्र समर्थक अखबारों और मीडिया समूहों पर जबरन ताला जड़ दिया गया।
- हांगकांग के कानून में ‘एक देश-दो प्रणाली’ का सिद्धांत दरअसल ब्रिटेन और चीन के बीच हुए एक समझौते से उपजा है। इसके तहत 2047 तक हांगकांगवासियों को एक सुरक्षा प्राप्त है; यह वही समय सीमा है जिसे लेकर हांगकांग में लोग चिंतित हैं। क्योंकि उन्हें लगता है कि उसके बाद कम्युनिस्ट सत्ता यहां वहीं बर्बरता अपनाएगी जैसी वह बाकी जगह दिखा रही है।
- हांगकांग में अपने भाषण में शी ने संकेत दिया कि इस ”एक देश-दो प्रणाली” सिद्धांत का लंबे समय तक पालन हो। इसे एक साफ संकेत माना जा रहा है कि यहां चीन अपने इस राजनीतिक मॉडल को बनाए रखने की मंशा रखता है।
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सच्चा लोकतंत्र? हांगकांग के सुप्रसिद्ध लोकतंत्र समर्थक अखबार एप्पल डेली के संपादक को गिरफ्तार करके ले जाती पुलिस (फाइल चित्र)
- राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भाषण के बीच बार-बार तालियों का बजना बता रहा था कि दर्शकों में भी चुन-चुनकर चीन के प्रति रसूख वाले वफादारों को ही बैठाया गया था।
- शी ने कहा कि ‘एक देश-दो प्रणाली’ को अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने खुलकर समर्थन दिया है और हांगकांग में रहने वालों का भी ‘सर्वसम्मत समर्थन’ है। इससे आगे बढ़कर चीन के राष्ट्रपति का यह कहना कि चीन में वापस लौटकर हांगकांग का ‘सच्चा लोकतंत्र शुरू हुआ’ है। लेकिन यह सफेद झूठ है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों से हांगकांग में लोकतंत्र के प्रश्न पर भारी उथलपुथल रही है। हांगकांग प्रशासन ने लोकतंत्र समर्थक आंदोलन को पूरी बर्बरता से कुचला है जिसका कई पश्चिमी देशों और नामी लोगों ने विरोध किया है और हांगकांग में बीजिंग के बढ़ते दखल की आलोचना की है।
- दो साल पहले, 2020 में चीन ने हांगकांग में एक विवादास्पद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू किया था, जिसने वहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और असहमति का गला घोंट दिया था। इसका बड़े पैमाने पर विरोध हुआ, बीजिंग के इशारे पर अनेक लोगों पर झूठे मुकदमे जड़कर उन्हें जेल में डाल दिया गया था। लोकतंत्र समर्थक अखबारों और मीडिया समूहों पर जबरन ताला जड़ दिया गया।
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