पिछले पांच दशकों से समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण और नदी बचाओ आंदोलन जैसे सेवा कार्यों में लगी बसंती दीदी को पद्मश्री सम्मान दिया गया है। मन की बात में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने उनकी सेवाओ की सराहना कर उनसे प्रेरणा लेने की बात कही है। बसंती दीदी का संबंध कौसानी के लक्ष्मी सदन से है। 12 साल की उम्र में उन्होंने गांधी प्रतिष्ठान लक्ष्मी सदन में आश्रय लिया था। तब उनके पति की मृत्यु हो गई थी। उसके बाद उन्होंने वहीं से शिक्षा लेकर समाज सेवा के कार्य शुरू किए। लक्ष्मी सदन, महात्मा गांधी की शिष्या सरल बहन का आश्रम हुआ करता था। सरला बहन ने अपने जीवन के अंतिम साल यहीं गुजारे और उन्होंने उत्तराखंड के गरीब बच्चियों को पढ़ाने और उन्हें समाज सेवा से जोड़ने के लिए संस्कार दिए। उनके सेवा कार्य ज्यादातर गांधी जी द्वारा स्थापित प्रतिष्ठानों से जुड़े होते थे।
लक्ष्मी सदन की प्रमुख सरला बहन की मृत्यु के बाद इस वक्त राधा बहन देख रही है। उन्ही के सानिध्य में बसंती दीदी ने सेवा कार्यो को आगे बढ़ाया। बसंती दीदी का मूल निवास पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट के दिगरा गांव में है, जहां इनदिनों वो रह रही है। हिमालय क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के लिए महिलाओं के स्वयं सहायता समूह बनाकर वे सेवा कार्य करती रही हैं। कोसी नदी बचाओ आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में बसंती बहन और उनके सेवा कार्यों की प्रशंसा की और कहा कि मुझे उनसे प्रेरणा मिली है। पीएम मोदी ने कहा बसंती बहन ने सामान्य जीवन यापन करते हुए असाधारण उपलब्धि हासिल की है।
अपने सुदूर गांव में जब मन की बात बसंती दीदी ने सुनी तो वो भावुक हो गईं, उन्होंने कहा कि जब उनकी सेवाओं का प्रधानमंत्री जी उल्लेख कर रहे हैं, उन्हें पद्मश्री सम्मान मिल रहा है। इसके लिए मैं उन बहनों का आदर पूर्वक आभार प्रकट करती हूं, जिनकी वजह से मुझे ये सम्मान मिला। बसंती दीदी ने इस सम्मान के लिए सरला बहन और राधा बहन द्वारा दिये गए संस्कारों के लिए भी आभार प्रकट किया। बसंती दीदी को 2016 में नारी शक्ति सम्मान पुरस्कार और 2017 का फेमिना वीमेन ज्यूरी सम्मान भी मिल चुका है।
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