कहते हैं जो जैसा बोएगा वैसे ही काटेगा। उत्तराखंड में कांग्रेस नेता और चुनाव संचालन समिति के प्रमुख हरीश रावत के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। विधानसभा चुनाव में हाई कमान ने उन्हें रामनगर से टिकट दिया। वहां प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रंजीत रावत ने विरोध किया। अब हाईकमान ने हरीश रावत को लालकुआं सीट पर लड़ने भेज दिया है।
हरीश रावत कांग्रेस में नारायण दत्त तिवारी के बाद सबसे अनुभवी नेता माने जाते रहे हैं, केंद्र सरकार में मंत्री, उत्तराखंड में प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री पद पर रहने वाले हरीश रावत को आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए सीट नहीं मिल रही है। अपने राजनीतिक जीवन में हरीश रावत ने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया। अपने स्वार्थ के लिए उन्होंने अपनों से भी बैर लिया। कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रंजीत रावत जो उनके लिए कभी रक्षक की भूमिका में रहते थे, रामनगर में हरीश रावत के टिकट के विरोधी हो गए। रंजीत रावत ने यहां पिछले चुनाव बीजेपी के दीवान सिंह से हारा था। इस बार भी वो यहीं से टिकट मांग रहे थे, लेकिन हरीश रावत यहां चले आये और रंजीत रावत को सल्ट भेज दिया गया। रंजीत के समर्थक इतने गुस्से में आये कि हरीश रावत को यहां से मैदान छोड़ना पड़ा और अब रामनगर सीट पर महेन्द्र पाल का लाया गया और हरीश रावत को लालकुआं में जाकर चुनाव लड़ने के लिए हाई कमान को कहना पड़ा। जहां पहले से ही कांग्रेस में हरीश दुर्गापाल हरेंद्र बोरा, संध्या डालाकोटी को टिकट मिलने पर बगावत कर चुके थे।
कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि एक परिवार से एक को ही टिकट मिलेगा परन्तु उत्तराखंड में यशपाल आर्य और उनके बेटे संजीव आर्य को टिकट मिला। अब हरीश रावत को लालकुआं और उनकी बेटी अनुपम्मा रावत को हरिद्वार ग्रामीण से टिकट मिला। ऐसे में बीजेपी से कांग्रेस में आये हरक सिंह ने अपना और अपनी बहू अनुकृति के लिए टिकट मांगा। अनुकृति को लैंसडॉन से टिकट मिल गया है। हरक सिंह अपने को टिकट नहीं मिलने के लिए हरीश रावत को कोस रहे हैं। उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार के समय किशोर उपाध्याय अध्यक्ष बने थे। हरीश रावत से मतभेदों के चलते वो भी आज बीजेपी में शामिल होकर, टिहरी से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। हरीश रावत की हरकतों से नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह भी परेशान रहे हैं क्योंकि वो मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनना चाहते थे, लेकिन हरीश रावत ने खुद ही अपने आप को मुख्यमंत्री तक कहना शुरू कर दिया। कुल मिलाकर हरीश रावत के स्वभाव व्यवहार से कांग्रेस को ही नुकसान उठाना पड़ रहा है। यही वजह है कि कांग्रेस उत्तराखंड में अपने भीतरघात से कई सीटों को गंवाने जा रही है।
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