उत्तराखंड में पिछले तीन दिनों से बारिश और हिमपात ने जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया है। चुनाव प्रचार ठंडा पड़ गया है और शासन प्रशासन को भी 14 फरवरी को मतदान कराने के लिए हिमालयी जिलो में दिक्कतें पेश आ सकती हैं, लिहाजा निर्वाचन आयोग से मतदान की तिथि आगे बढ़ाने का अनुरोध किया जा सकता है।
हिमालय जिलों में पिछले 72 घंटे से हिमपात और बारिश की खबरे हैं। केदारनाथ, बद्रीनाथ, हेमकुंड व्यास दारमा घाटी में 10 से 15 फुट तक बर्फ गिरने की खबर है। शिवालिक रेंज में मसूरी, धनोल्टी, नैनीताल, मुक्तेश्वर , जौनसार बावर, पौड़ी चमोली, ग्वालदम आदि पहाड़ी नगरों में भी भारी हिमपात हुआ है। मौसम विभाग सूत्रों के मुताबिक जनवरी माह में इससे पहले 1989 में बारिश हुई थी, हिमपात की वजह से पहाड़ों की सड़कें बन्द हैं, जिन्हें खोलने के लिए लोक निर्माण और सीमा सड़क संगठन के कर्मचारियों को लगाया गया है। एसडीआरएफ भी राहत के कामों में हाथ बंटा रही है।

तराई और भावर के क्षेत्रों में भी भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है। अभी अगले दो दिन और भी बारिश होने का अलर्ट जारी किया गया है। सर्द, बारिश और हिमपात को देखते हुए विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रचार जनसंपर्क में भी बाधा आ रही है। चुनाव प्रचार के लिए कार्यकर्ता घर से नहीं निकल पा रहे हैं। कोविड की वजह से गला दर्द, पीठ दर्द और तेज बुखार के डर ने राजनीतिक कार्यकर्ताओं को भी बांध कर रख दिया है। निर्वाचन आयोग ने 31 जनवरी तक कोविड के नियमों की सख्ती बढ़ा दी है, एक जनवरी के बाद हालात को देखते हुए केवल 500 लोगों की जनसभा को वीडियो के माध्यम से करने की अनुमति दी जा सकती हैं। डोर टू डोर केवल 10 लोगों को प्रचार करने की अनुमति मिल रही है।
चुनाव का माहौल पहले कोविड ने फिर अब मौसम ने ठंडा कर दिया है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक मौसम के हालात को देखते हुए निर्वाचन आयोग से 14 फरवरी की मतदान की तिथि आगे बढ़ाने का अनुरोध किया जा सकता है। पंजाब में तिथि आगे बढ़ने पर उत्तराखंड शासन भी पहाड़ों में खास तौर पर हिमालय क्षेत्रों में हिमपात और सर्दी की वजह से मतदान तिथि बदलने का अनुरोध कर सकता है।
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