फुलवारीशरीफ में शराफत के अलावा सब कुछ है

Published by
Sanjiv Kumar
बिहार की राजधानी पटना से सटा है फुलवारीशरीफ। यहां मुसलमानों की मजहबी संस्था इमारत—ए—शरिया का मुख्यालय है। कभी यह स्थान पुष्पपुर कहलाता था। अब फुलवारीशरीफ देश—विरोधी तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है। यहां अलगाववादी मुस्लिम संगठन पीएफआई ने भी जड़ें जमा ली हैं

गत दिनों फुलवारीशरीफ एक बार फिर से चर्चा के केंद्र में रहा। रिपोर्ट के अनुसार फुलवारीशरीफ के इशोपुर स्थित नूरी मस्ज़िद से जुम्मे की नमाज और तकरीर के बाद 40 लोगों ने एसडीपीआई के बैनर तले जुलूस निकाला था, जिसमें देश—विरोधी नारे लगाए गए। एसडीपीआई मुस्लिम अलगावावादी संगठन पापुलर फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआई) की छात्र इकाई है। ये लोग त्रिपुरा में कथित तौर पर मुसलमानों पर हुए हमले का विरोध कर रहे थे। विरोध के नाम पर इन लोगों ने सड़क बंद कर दी और जिसने भी इनका विरोध किया उन पर हमला कर दिया। इस मामले में फुलवारीशरीफ पुलिस ने पांच नामजद लोगों के साथ 40 अज्ञात लोगों पर मामला दर्ज किया है। यह मामला फुलवारीशरीफ के अंचलाधिकारी अलख निरंजन प्रसाद के लिखित आवेदन के बाद फुलवारीशरीफ पुलिस ने दर्ज किया है। जिन पांच लोगों को नामजद किया गया है, उनमें एक एहसान परवेज भी है, जो एसडीपीआई का महासचिव है। इसके अलावा अतहर परवेज, शब्बीर मलिक, सरफराज और कौशर बानो का नाम भी शामिल है। आरोप है कि इन लोगों ने भड़काऊ नारे लगाए, जिससे कुछ देर के लिए फुलवारीशरीफ का माहौल भी खराब हो गया। 

फुलवारीशरीफ का इतिहास और हंगामा

फुलवारीशरीफ हमेशा विवादों में रहा है। पिछले 50 वर्ष में यहां कई बार साम्प्रदायिक माहौल बिगड़ा है। 2020 में सीएए के विरुद्ध यहां प्रदर्शन हुआ था। उस समय भी माहौल खराब हुआ था। इससे पहले 2017 में यहां हिंदुओं पर हमले हुए थे। कभी यह सम्राट अशोक का बगीचा हुआ करता था। उस समय इसका नाम पुष्पपुर था। 13वीं सदी में यहां मुस्लिमों का राज स्थापित हुआ। उसके पहले 1180 ई. में मनारपत्तन को अरब से आए मुस्लिमों ने जीत लिया था। आज का मनेर ही पहले का मनारपत्तन था। मनार के मठ और देवी मंदिर पर कब्जा जमाने के बाद मुस्लिमों ने इस क्षेत्र में अपने मजहब का विस्तार करना शुरू किया। ऐसा कहा जाता है कि बिहार से पूरब इस्लाम का प्रचार मनेर शरीफ के कारण ही हो पाया। मनेर के समीप ही फुलवारीशरीफ है। यहां खानकाह मुजीबिया, शीश महल, इमारत-ए-शरिया इत्यादि मुस्लिमों के बड़े केंद्र हैं। 
एक रिपोर्ट के अनुसार इमारत-ए-शरिया जैसी संस्थाएं यहां अनेक राज्यों से मुसलमानों को लाकर बसा रही हैं। शहरीकरण के कारण हिंदू भी बस रहे हैं। इस कारण हिंदुओं की आबदी भी यहां बढ़ रही है। हिंदुओं का यहां बढ़ना कुछ तत्वों को पसंद नहीं है। इसलिए कई बार छोटी—सी बात पर भी यहां माहौल बिगाड़ने का प्रयास होता है। इसलिए कई लोग कहते हैं कि फुलवारीशरीफ में  शराफत के अलावा और बाकी सारी चीजें हैं। 

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