
रवि किशन प्रख्यात अभिनेता एवं सांसद, गोरखपुर
मुंबई के प्रतिष्ठित ताज होटल में पाञ्चजन्य की ओर से आयोजित ‘सुशासन संवाद-मुंबई संकल्प’ में अभिनेता और गोरखपुर से सांसद रवि किशन ने वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा जी और नन्हे बालक अहान के साथ विशेष बातचीत की। सिनेमा के पर्दे से लेकर संसद तक का लंबा सफर तय करने वाले रवि किशन ने इस संवाद में अपनी निजी यात्रा, 34 वर्षों के संघर्ष और इंतजार, महादेव के प्रति अपनी आस्था, गोरखपुर में आए बदलाव, सिनेमा और राजनीति के अनुभव तथा युवाओं के बीच अपनी बढ़ती लोकप्रियता पर खुलकर बात की।
प्रश्न. आजकल आपकी लोकप्रियता खासकर युवाओं के बीच काफी दिखाई देती है। सोशल मीडिया पर आपकी रील्स और मीम्स खूब वायरल होते हैं। आपको यह बदलाव कैसा लगता है?
उत्तर: यह सब महादेव की कृपा है। एक सामान्य परिवार से निकलकर जब पूरा विश्व आपको एक कलाकार और सांसद के रूप में जानने लगे और फिर जीवन में एक ऐसा दौर आए, जब आपको लगे कि शायद आपका समय अब बीत रहा है, तभी महादेव ऐसी डमरू बजाते हैं कि समय फिर बदल जाता है। मैं आज भी वही व्यक्ति हूं- वही आंखें हैं, वही आवाज है। लेकिन आज देश के जन-जन में, खासकर छोटे बच्चों और युवाओं के बीच मेरे लिए जो प्रेम दिखाई देता है, वह मेरे लिए किसी कृपा से कम नहीं है। यह प्रारब्ध है, यह महादेव की कृपा है। आज 34 साल बाद वह समय आया है। इन वर्षों में मैंने जो संयम रखा, वही आज मेरे काम आया। इसलिए मैं अपनी सफलता को केवल अपनी मेहनत नहीं मानता। मैं इसे महादेव, अपने गुरुओं और अपने मित्रों की कृपा मानता हूं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन पूरा देश इस तरह मेरे पीछे खड़ा होगा और मुझे इतना प्यार देगा। मैं हमेशा यही मानता हूं-
“दाता तू, विधाता तू,
देता तू, लेता तू।
सत्य तू, असत्य हम।
भगवंत तू, मनुष्य हम।
शेष तू, सुंदर तू, शक्ति तू।
सब कुछ तू, मैं कुछ नहीं।”
प्रश्न. आपने सिनेमा में भी काम किया, संसद में भी सक्रिय रहे और आपको अभिनय तथा संसदीय कार्यों के लिए सम्मान भी मिले। आप अपनी इस पूरी यात्रा को कैसे देखते हैं?
उत्तर: मैं इसे भी कृपा ही मानता हूं। मैंने अलग-अलग भाषाओं में काम किया है। लापता लेडीज से लेकर मिर्जापुर तक और अपनी फिल्मों तक, मुझे लोगों ने अलग-अलग भूमिकाओं में स्वीकार किया। संसद में भी मुझे काम करने का अवसर मिला। मुझे सर्वश्रेष्ठ सांसद के रूप में सम्मान मिला और सबसे ज्यादा प्रश्न पूछने वाले सांसदों में भी मेरा नाम आया। इसके साथ-साथ गोरखपुर जैसी पवित्र धरती की सेवा करने का अवसर मिला। गोरखनाथ बाबा की धरती है, योगी महाराज जी की गद्दी है। वहां की सेवा करना अपने आप में सौभाग्य है। मेरे पिता पंडित श्याम नारायण शुक्ल मेरे गुरु भी थे। उन्होंने गरीबी और कठिनाइयां देखीं, लेकिन जीवनभर पूजा-पाठ और अध्ययन करते रहे। उन्होंने मुझे जीवन का ज्ञान दिया। आज मैं जो भी हूं, उसमें मेरे पिता का बहुत बड़ा योगदान है।
प्रश्न. अभी आपके लिए अभिनय ज्यादा महत्वपूर्ण है या राजनीति?
उत्तर: जब मैं तकलीफ में था, तब मेरी कोई मदद नहीं करता था। महादेव ने मौका दिया और पार्टी ने मुझे अवसर दिया। गोरखनाथ बाबा की धरती तक पहुंचने का अवसर मिला और संसद में अपने विचार रखने का अवसर मिला। आज अगर मैं किसी गरीब की मदद कर पाता हूं, किसी को अस्पताल में सहायता दिला पाता हूं, तो यह सांसद पद की गरिमा है। मुझे अच्छा लगता है कि मैं यह काम कर पाता हूं। मैं महीने में काफी समय गोरखपुर में रहता हूं। वहीं मेरा घर है। बाकी समय सिनेमा और दूसरे कामों में रहता हूं। मैं राजनीति को निस्वार्थ भाव से करता हूं। संसद, कमेटी की बैठकें, देश में अलग-अलग जगहों के कार्यक्रम और चुनावी प्रचार- सबके कारण बहुत यात्रा करनी पड़ती है। नींद कम मिलती है, भागदौड़ बहुत है, लेकिन दोनों क्षेत्रों में मुझे आनंद मिलता है।
प्रश्न. अगर आप आज मेरी उम्र के होते और रवि किशन की रील्स और मीम्स देखते, तो रवि किशन के बारे में क्या सोचते?
उत्तर: मैं सोचता- “कितने मस्त-मौला आदमी हैं” मैं सोचता कि यह आदमी सांसद भी है, सुपरस्टार भी है, लेकिन किसी चीज का बहुत ज्यादा लोड नहीं लेता। यह हमें खुश रखता है। आज मेरी वजह से अगर कोई छोटा बच्चा या युवा अपनी भाषा में बात करता है और मुझे फॉलो करता है, तो यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। जेनरेशन-ज़ेड के युवाओं को मैं प्रणाम करता हूं। भारत की बड़ी युवा आबादी है और यही युवा आगे देश को संभालेंगे। आपको संसद में आना है, विधानसभा में आना है। अपनी संस्कृति और अपने विचारों को समझना है। मैं देश और दुनिया में मौजूद अपने सभी प्रशंसकों से कहना चाहता हूं कि यह बहुत सुंदर देश है। हमने बहुत संघर्ष के बाद आजादी पाई है। अब इसे संभालकर रखना अगली पीढ़ी की जिम्मेदारी है।
प्रश्न. क्या कभी आपके मन में आया कि आपको अपनी शैली बदलनी चाहिए ताकि ज्यादा लोग आपको फॉलो करें?
उत्तर: मैं सच कहूं तो मैं कुछ सोचकर नहीं करता। जिस दिन मैं सोचकर कुछ करने लगूंगा, उस दिन शायद फ्लॉप हो जाऊंगा।
प्रश्न. फिल्मों में आपने इतने संवाद बोले हैं, लेकिन इंटरनेट पर कई बार आपका सिर्फ एक एक्सप्रेशन वायरल हो जाता है। आपके हिसाब से ज्यादा महत्वपूर्ण क्या है- डायलॉग या एक्सप्रेशन?
उत्तर: साइलेंस में बहुत साउंड होता है। मैंने यह चीज सीखी है कि कई बार बिना बोले भी बहुत कुछ कहा जा सकता है।
प्रश्न. आज की पीढ़ी 15-20 सेकंड में कंटेंट देख लेती है। अगर आपको उन्हें सिर्फ 15-20 सेकंड में कोई लाइफ लेसन देना हो, तो आप क्या कहेंगे?
उत्तर: अपने देश से प्यार करो। सब कुछ करो, लेकिन अपनी मिट्टी से प्यार करो। “राष्ट्र सर्वोपरि” का बहुत बड़ा अर्थ है। इसे केवल किसी संगठन का नारा मत समझिए। यह एक मनुष्य का, मानवता का विचार भी हो सकता है। अगर हम इसे समझ लें तो हम कभी गुलाम नहीं होंगे।
प्रश्न. युवाओं के हाथ में मोबाइल है। आप उन्हें मोबाइल और सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर क्या संदेश देना चाहेंगे?
उत्तर: मोबाइल आपके हाथ में है, यह ठीक है। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि मोबाइल मत रखिए। लेकिन एक बात याद रखिए- मोबाइल आप चलाइए, मोबाइल आपको न चलाए। आप मोबाइल की गिरफ्त में मत आइए। तकनीक का इस्तेमाल कीजिए, लेकिन अपनी सोच और समय की कमान अपने हाथ में रखिए। और किताबें पढ़िए। क्योंकि जब तक आप खुद नहीं पढ़ेंगे, तब तक एआई से भी सही सवाल नहीं पूछ पाएंगे।