बहुआयामी वीर सावरकर की लिपि-दृष्टि

बहुआयामी वीर सावरकर (10वीं कड़ी) वीर सावरकर देवनागरी को राष्ट्रीय लिपि के रूप में प्रतिष्ठित देखना चाहते थे। यद्यपि इस विचार के वे प्रथम प्रवर्तक नहीं थे, उन्होंने लिपिशुद्धि आंदोलन चलाया और उसके सिद्धांतों का स्वयं पालन किया। वह समूचे भारत के लिए नागरी को समान राष्ट्रीय लिपि बनाने के सबसे मुखर वक्ता थे। भाषा … Continue reading बहुआयामी वीर सावरकर की लिपि-दृष्टि