ऐसा प्रतीत होता है कि अमेरिका खुद नहीं चाहता है कि खाड़ी संकट का समाधान हो। ऐसा इसलिए, क्योंकि हर बार अजीब तरह की मांगे रखकर के ईरान के साथ चल रही वार्ता में विघ्न डाल दिया जाता है। इसी क्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से मुआवजे की मांग की है। यह मांग उस समय आई है जब दोनों देश होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और चल रहे युद्ध को खत्म करने की बातचीत कर रहे हैं।
बातचीत में नया मोड़
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करके कहा कि ईरान के प्रतिनिधि पिछले पांच महीने के सैन्य संघर्ष में हुए नुकसान का मुआवजा मांग रहे हैं। यह संघर्ष फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों से शुरू हुआ था। ट्रंप के मुताबिक, यह युद्ध इसलिए हुआ क्योंकि ईरान परमाणु हथियार नहीं छोड़ना चाहता था। उन्होंने इसे दिलचस्प आइडिया बताया और उसी तर्ज पर खुद भी मांग रख दी।
ट्रंप ने लिखा कि अब वे ईरान से मुआवजा मांग रहे हैं। इसमें उन लोगों का जिक्र है जिन्हें रोडसाइड बम और कई संघर्षों में मारा या घायल किया गया। उन्होंने जनरल सुलेमानी का नाम लिया और यूएसएस कोल पर हुए हमले के पीड़ित परिवारों का भी जिक्र किया। साथ ही हजारों अन्य सैनिकों की मौतों का मुआवजा भी मांगा।
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क्या-क्या मांगा गया
ट्रंप ने आगे कहा कि पिछले 50 सालों में ईरान ने सैकड़ों हजार निर्दोष प्रदर्शनकारियों को मारा है। उनके परिवारों को भी मुआवजा मिलना चाहिए। पिछले पांच महीनों में मारे गए 52,000 लोगों का भी जिक्र किया। उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को निर्देश दिया कि भविष्य की किसी भी बातचीत में इस मांग को जरूर शामिल किया जाए।
एक और पोस्ट में ट्रंप ने लेबनान, सीरिया, यमन और गाजा के लोगों को हुए नुकसान और मौतों की जिम्मेदारी भी ईरान पर डाली। व्हाइट हाउस में उन्होंने दोहराया कि ईरान ने मुआवजा मांगा तो अमेरिका भी पिछले 50 साल के नुकसान का पैसा मांगेगा।
होर्मुज और मौजूदा स्थिति
होर्मुज जलडमरूमध्य से पहले दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार होता था। युद्ध शुरू होने के बाद यह बंद सा हो गया है। ईरान ने कहा था कि पानी का रास्ता खोलने के लिए मुआवजा, प्रतिबंध हटाना और सैन्य धमकियां बंद करना जरूरी है। ओमान के साथ कुछ बातचीत चल रही है, लेकिन डील अभी नहीं बनी है।
हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण पर अड़ा इजरायल
इसी दौरान इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप समर्थित 15-सूत्रीय गाजा शांति योजना को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि हमास को पहले पूरी तरह निरस्त्र होना होगा। ट्रंप ने नेतन्याहू के साथ अपने रिश्ते को अच्छा बताया। युद्ध शुरू होने के बाद से मध्य पूर्व में ईरान से जुड़े हमलों में कम से कम 18 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं। ट्रंप मध्य पूर्व के कई संघर्षों को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बातचीत अभी अटकी हुई लग रही है।

















