
प्रतीकात्मक तस्वीर
ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शनों की चर्चा अब पूरे विश्व में हो रही है और साथ ही वहाँ पर फांसी देने की दर भी लगातार बढ़ती जा रही है। मगर अब जो एक नया समाचार सामने आया है, वह इनसे भी कहीं अधिक बढ़ा और गंभीर है। पिछले दिनों ईरान से कई लोगों को फांसी दिए जाने के समाचार आए थे और इनमें लड़कियां और लड़के दोनों ही थे और साथ ही वहाँ की जेलों की अमानवीय स्थितियों के भी समाचार आए थे।
यह तथ्य और भी हैरान और परेशान करने वाला है कि जहां ईरान एक तरफ अमेरिका के साथ युद्ध मे लगा हुआ है, तो वहीं उसका अपने नागरिकों पर भी दमनचक्र लगातार चल रहा है। इस वर्ष वहाँ पर 800-900 से अधिक लोगों को फांसी दी जा चुकी है। जहां ईरान की सरकार का यह दावा है कि यह मौत की सजाएं नशीली दवाइयों और अन्य मामलों को लेकर हैं तो वहीं मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ये सजाएं सरकार के प्रति विरोध और विद्रोह को दबाने का एक माध्यम है।
वर्तमान में ईरान में हजारों लोगों को मौत की सजा सुनाई गई है और वे लोग मौत की सजा के क्रियान्वयन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। तेहरान के पास स्थित गजल हेसार जेल में मौत की सजा पाए कैदियों ने लगभग दो सप्ताह पहले भूख हड़ताल शुरू कर दी थी।
यह भूख हड़ताल तब शुरू हुई जब नशीली दवाइयों से जुड़े हुए कुछ अपराधियों को उनकी फांसी के चलते एकांतवास में भेज दिया गया। ईरान में मानवाधिकार समूहों ने कुछ वीडियो साझा किए, जिनमें यह देखा जा सकता है कि जेल के अंदर कैदी इकट्ठे हुए हैं और वे “No to Executions” और “हमारी आवाज बनें” जैसे नारे लिखकर बैठे हुए हैं।
एक वीडियो में एक कैदी यह कह रहा है कि उसने जब देखा कि अधिकारी भूख हड़ताल को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं, तो उसने अपने होंठों को सिलने का फैसला किया है। और एक वीडियो में दिख रहा है कि एक कैदी एक सुई और धागे से अपने होंठों को सिल रहा है। दरअसल इन कैदियों का कहना है कि यहाँ पर जगह कम है और लोग ज्यादा हैं। लोगों को इजरायल के लिए जासूसी करने के आरोपों में भी फांसी दी जाती है और साथ ही अमेरिका के लिए जासूरी करने को लेकर भी। ईरान में पिछले वर्ष दिसंबर और इस वर्ष जनवरी में सरकार को लेकर जो विरोध प्रदर्शन हुए थे, उन्हें लेकर लोगों को कैद करने का और सजा देने का सिलसिला चल रहा है।
लोग इन गिरफ्तारियों का विरोध कर रहे हैं, मगर न ही गिरफ्तारियाँ रुक रही हैं और न ही फाँसियाँ! फांसी से पहले जेल में भी उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है और इस अमानवीय व्यवहार के कारण ही वे भूख हड़ताल कर रहे हैं और जब उनकी बात सुनी नहीं गई तो उन्होंने अपने मुंह भी सिल लिए।
वहीं 28 जुलाई की घटना भी दिल दहला देने वाली है। ईरान में इसफहन में 28 जुलाई की सुबह सरकार ने दो ईरानी प्रदर्शनकारियों को सरेआम फांसी पर लटका दिया। वहाँ पर इसका विरोध करने के लिए हजारों लोगों की भीड़ जमा हुई। इससे यह भी पता चलता है कि सरकार ने शायद जानबूझकर ही यह रास्ता चुना कि लोगों के मन में सरकार का डर पैदा किया जा सके, या फिर यह देखा जा सके कि सरकार के प्रति लोगों का समर्थन कितना है? लोग इस सजा का समर्थन करते हैं या विरोध?
सरकार की तमाम उम्मीदों पर पानी फेरते हुए जनता ने इस सजा का विरोध किया और सरकार विरोधी नारे लगाने शुरू कर दिए। आज के सभ्य समाज में क्या यह कोई सहज कल्पना भी कर सकता है कि सार्वजनिक रूप से कोई सरकार ऐसे फांसी दे सकती है? मगर ईरान में सब कुछ संभव है। फ्रांस24 के अनुसार, सरकार ने सार्वजनिक रूप से फांसी देने की तैयारी एक शाम पहले ही कर ली थी और अलीखानी स्क्वायर में एक कामचलाऊ मंच बनाया था; अधिकारियों का दावा है कि जनवरी 2026 में सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने यहीं पर चार पुलिस अधिकारियों की हत्या कर दी थी।
इस घटना के वीडियो वायरल हो रहे हैं और उनमें यह देखा जा रहा है कि आम लोग सरकार के विरोध मे और पुलिस के विरोध में नारे लगा रहे हैं। वहाँ पर सुबह-सुबह ही लोग इकट्ठे हो गए और सरकार के खिलाफ आवाज उठाने लगे। लोगों को तितर बितर करने के लिए, दंगा विरोधी बल का भी प्रयोग करना पड़ा था। पुलिस ने भीड़ को तितर बितर किया और लोगों को आसपास की सड़कों तक दौड़ा दिया। उनपर आँसू गैस के गोले भी चलाए गए।
सोशल मीडिया पर यह वीडियो जमकर वायरल हो रहा है और लोग प्रश्न पूछ रहे हैं कि क्या इस तरह आज के समय में सार्वजनिक रूप से फांसी की सजा दी जा सकती है?
आम लोगों से लेकर कैदियों तक को यह खतरा है कि उनके साथ कुछ भी हो सकता है, मगर फिर भी वे न ही जेल में अपनी आवाज उठाने से डर रहे हैं और न ही सार्वजनिक रूप से फांसी देने पर!