बहुआयामी वीर सावरकर (5) : निबंधकार और कृतिशील समाज-सुधारक

बहुआयामी वीर सावरकर (5वीं) कड़ी वीर सावरकर ने तर्क, विज्ञान और राष्ट्रचेतना को अपनी लेखनी का आधार बनाया।उनके निबंध केवल विचार नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और राष्ट्रीय पुनर्जागरण के घोषणापत्र हैं डॉ. नीरज देव निबंध-विधा के संदर्भ में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार वि. स. खांडेकर का कथन है- ‘यूरोप ने निबंध-रचना की, … Continue reading बहुआयामी वीर सावरकर (5) : निबंधकार और कृतिशील समाज-सुधारक