बहुआयामी वीर सावरकर : कहानियों से झलकता वैचारिक प्रबोधन

वीर सावरकर : (दूसरी कड़ी) सावरकरजी ने 1925 से 1936 के दौरान लगभग 22 कहानियां लिखी थीं, जो कालांतर में ‘समाजचित्र’ या ‘अंधश्रद्धा निर्मूलक कथा’ के रूप में दो भागों में प्रकाशित हुईं। इन कहानियों का मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त अंधविश्वासों, भ्रांतियों तथा आत्मघाती रूढ़ी-परंपराओं से समाज को मुक्त कराना तथा विज्ञानवाद की दीक्षा … Continue reading बहुआयामी वीर सावरकर : कहानियों से झलकता वैचारिक प्रबोधन