कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र स्थित श्रीमद्भगवद्गीता वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आयोजित ‘आचार्य विकास एवं पुनश्चर्या वर्ग’ के दौरान विद्या भारती के अखिल भारतीय महामंत्री अवनीश भटनागर जी ने शिक्षकों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने आधुनिक शिक्षण पद्धति को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने पर विशेष बल दिया और समग्र शिक्षा का महत्व समझाया।
शिक्षा के 3 मुख्य आधार स्तंभ
अवनीश भटनागर जी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जा सकता। यह वास्तव में विद्यार्थी के भीतर छिपी जिज्ञासा को जाग्रत करने की एक निरंतर प्रक्रिया है। उन्होंने शिक्षा के तीन मुख्य आधार स्तंभों का उल्लेख किया:
- शिक्षा दर्शन (Philosophy of Education)
- शिक्षा मनोविज्ञान (Educational Psychology)
- शिक्षण शास्त्र (Pedagogy)
उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा हमारे आधुनिक शिक्षण को एक नई और सकारात्मक दिशा प्रदान कर सकती है, जिससे विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास संभव है।
समग्र शिक्षा: पंचकोश विकास और कठोपनिषद् का रोचक उदाहरण
महामंत्री जी ने ‘पंचकोश विकास’, ‘पंचमहाभूतों’ तथा मनुष्य की इंद्रियों के उचित समन्वय को समग्र शिक्षा का मूल आधार बताया। आधुनिक युग की तकनीक और प्राचीन ज्ञान का अद्भुत समन्वय करते हुए उन्होंने कठोपनिषद् के एक उदाहरण को अत्यंत रोचक ढंग से प्रस्तुत किया:
“मानव शरीर रूपी संरचना में मन को ‘स्क्रीन’, चित्त को ‘हार्डडिस्क’, और बुद्धि को ‘निर्णयकर्ता (प्रोसेसर)’ समझा जा सकता है। वहीं, आत्म-नियंत्रण ही इसकी असली ‘लगाम’ है। वास्तव में, मन पर बुद्धि का प्रभावी नियंत्रण होना ही सही मायनों में शिक्षा मनोविज्ञान है।”












