कॉकरोच, कठपुतलियां और पिटे हुए पहलवान

भारत में प्रतीकों की उम्र बहुत लंबी होती है। यहां कोई शब्द केवल शब्द नहीं रहता, कोई जीव केवल जीव नहीं रहता, कोई मजाक केवल मजाक नहीं रहता। यहां चाय की प्याली से संसद तक रास्ता निकल सकता है और रसोई की दरार से निकला कॉकरोच भी अचानक लोकतंत्र, युवा आक्रोश, मीम बाजार और राजनीतिक … Continue reading कॉकरोच, कठपुतलियां और पिटे हुए पहलवान